scorecardresearch
 

'कृत्रिम सूरज' को मिली ताकत, चीन ने बनाया दुनिया का सबसे बड़ा मैग्नेट

फ्यूजन एनर्जी को हकीकत बनाने की दिशा में चीन को बड़ी सफलता मिली है. वैज्ञानिकों ने रिएक्टर के दो सबसे अहम सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट सफलतापूर्वक तैयार कर लिए हैं.

Advertisement
X
चीन के कृत्रिम सूरज के बनाया गया नया इलेक्ट्रोमैग्नेट. अभी और मैग्नेट बनेंगे. (File Photo: Getty)
चीन के कृत्रिम सूरज के बनाया गया नया इलेक्ट्रोमैग्नेट. अभी और मैग्नेट बनेंगे. (File Photo: Getty)

चीन ने न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक में बड़ी सफलता हासिल की है. देश के वैज्ञानिकों ने 'आर्टिफिशियल सन' यानी कृत्रिम सूरज के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट बनाया है. इसका सफल परीक्षण भी पूरा हो चुका है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे फ्यूचर में फ्यूजन एनर्जी विकसित करने की दिशा में मदद मिलेगी.

'आर्टिफिशियल सन' एक ऐसी मशीन है जिसमें सूरज की तरह एनर्जी बनाने की कोशिश की जाती है. इसमें बहुत गर्म गैस यानी प्लाज्मा बनाई जाती है. उसे नियंत्रित करने की कोशिश होती है ताकि एनर्जी पैदा की जा सके. इसी तकनीक को न्यूक्लियर फ्यूजन कहा जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह तकनीक सफल होती है, तो फ्यूचर में इससे बड़ी मात्रा में साफ एनर्जी  बनाई जा सकती है.

यह भी पढ़ें: 600 भूकंप के झटके, 1700 से ज्यादा मौतें, 58 हजार इमारतें ध्वस्त, वेनेजुएला की तबाही ने झकझोर दिया

China Artificial Sun

दुनिया का सबसे बड़ा सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट तैयार

चीन ने इस मशीन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट तैयार किया है. इसका वजन 582 टन है. इसकी लंबाई 21 मीटर, चौड़ाई 12 मीटर और ऊंचाई 3.3 मीटर है.

Advertisement

इस मैग्नेट का काम मशीन के अंदर मौजूद बहुत गर्म प्लाज्मा को एक जगह बनाए रखना है, ताकि वह मशीन की दीवारों से न टकराए. अगर ऐसा होता है, तो ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया रुक सकती है.

यह मैग्नेट अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन प्रोजेक्ट ITER में इस्तेमाल किए गए ऐसे ही मैग्नेट से करीब 1.3 गुना बड़ा है. इसमें तीन गुना ज्यादा एनर्जी जमा की जा सकती है. आगे चलकर ऐसे 16 मैग्नेट एक साथ लगाए जाएंगे.

यह भी पढ़ें: केतन के कत्ल के वक्त सिया के प्रेमी चेतन के हर मूवमेंट की होगी स्टडी, क्या है Gait analysis

China Artificial Sun

एक और अहम उपकरण भी तैयार

वैज्ञानिकों ने एक खास सुपरकंडक्टिंग कॉयल भी तैयार की है. इसका काम फ्यूजन प्रक्रिया को शुरू करना और प्लाज्मा को पूरे समय सही जगह पर बनाए रखना है.

परीक्षण के दौरान इस कॉइल ने 60 किलोएम्पियर करंट और 6.03 मेगाजूल एनर्जी संभालने की क्षमता दिखाई. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह लंबे समय तक रिएक्टर को चलाने में मदद करेगा.

क्यों अहम है यह उपलब्धि?

वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दोनों उपकरणों के सभी जरूरी हिस्से चीन में ही बनाए गए हैं. इससे इस तकनीक के लिए अब दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम फ्यूचर में साफ और लगातार एनर्जी बनाने वाली तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद करेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement