scorecardresearch
 

धरती पर इन चार पहाड़ों पर छिपे हैं एलियन बेस- CIA के पूर्व स्पाई का खुलासा

पूर्व अमेरिकी इंटेलिजेंस अफसर ने दावा किया है कि अलास्का, ऑस्ट्रेलिया, जिम्बाब्वे और पाइरेनीज के पहाड़ों में एलियंस के 4 सीक्रेट अड्डे हैं. ये ठिकाने UFO की मरम्मत, एलियंस के प्रवेश द्वार जैसे काम करते हैं.

Advertisement
X
ये है वो धरती पर मौजूद चार पहाड़ जहां एलियंस के बेस होने का दावा किया गया है. (Photo: Getty/Wiki)
ये है वो धरती पर मौजूद चार पहाड़ जहां एलियंस के बेस होने का दावा किया गया है. (Photo: Getty/Wiki)

अमेरिकी सेना के इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के रिटायर्ड अधिकारी लिन बुकानन ने एक पॉडकास्ट में बेहद चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने 'अमेरिकन अल्केमी' पॉडकास्ट में होस्ट जेसी मिशेल को दिए इंटरव्यू में बताया कि पृथ्वी के चार अलग-अलग और सुदूर पहाड़ों के भीतर एलियंस के सीक्रेट अड्डे बने हुए हैं. 

ये ठिकाने सिर्फ रहने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये अंतरिक्ष से आने वाले यूएफओ (UFO) के एंट्री पॉइंट, मरम्मत केंद्र और खुफिया जानकारी जुटाने वाले हब के रूप में काम करते हैं. लिन बुकानन कोल्ड वॉर के दौरान अमेरिकी सरकार के एक बेहद गोपनीय साइकिक रिसर्च प्रोग्राम का हिस्सा थे, जहां इंसानी चेतना और दिमाग की शक्तियों का उपयोग करके दूर बैठे दुश्मनों या ठिकानों की जासूसी करने का प्रयास किया जाता था. 

यह भी पढ़ें: "दोस्ती, दुश्मनी ETC... ट्रंप को कब-कब चुभे नेतन्याहू? दोस्ती में क्यों दिख रही दरार

इस तकनीक को रिमोट व्यूइंग कहा जाता है. हालांकि, इन दावों का कोई सार्वजनिक या वैज्ञानिक सबूत मौजूद नहीं है, लेकिन इस खुलासे ने दुनिया भर के यूएफओ प्रेमियों और वैज्ञानिकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है.

क्या है सीआईए का प्रोजेक्ट 'स्टारगेट' और रिमोट व्यूइंग का रहस्य

Advertisement

लिन बुकानन ने जिन हैरान करने वाले दावों का जिक्र किया है, वे असल में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के एक बेहद गोपनीय प्रोजेक्ट का हिस्सा थे, जिसे 'प्रोजेक्ट स्टारगेट' के नाम से जाना जाता है. 1970 के दशक में शुरू हुए इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को सेना में शामिल करना था जिनके पास असाधारण मानसिक या साइकिक क्षमताएं थीं. 

Alien bases inside mountains

इन लोगों को बिना किसी कैमरे, सैटेलाइट या भौतिक साधन के सिर्फ आंखें बंद करके अपने दिमाग की शक्ति से किसी भी दूरदराज के स्थान की तस्वीरें देखने और वहां की हलचल का पता लगाने का काम दिया जाता था, जिसे रिमोट व्यूइंग कहते थे. बुकानन को इस प्रोग्राम के तहत इन गुप्त पहाड़ी ठिकानों पर नजर रखने और उनकी सूची तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. 

हालांकि, अमेरिकी सरकार ने 1995 में इस पूरे प्रोग्राम को यह कहते हुए आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया कि यह तकनीक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए वैज्ञानिक रूप से अविश्वसनीय और अप्रभावी है.

कैसे हुआ इन गुप्त एलियन बेस का पहली बार खुलासा

बुकानन से भी पहले इन गुप्त ठिकानों की पहचान 1973 में 'पैट प्राइस' (Pat Price) नाम के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने की थी, जो इस सरकारी साइकिक प्रोग्राम के शुरुआती और सबसे प्रतिभाशाली रिमोट व्यूअर्स में से एक थे. पैट प्राइस के इन अविश्वसनीय दावों की सत्यता जांचने के लिए सीआईए ने बाद में 'प्रोजेक्ट 8200' नाम से एक और सीक्रेट मिशन चलाया था. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: दिल्ली का कूलिंग सिस्टम खत्म! रात और दिन की गर्मी को लेकर ये रिपोर्ट डराने वाली

लिन बुकानन सहित कई अन्य स्वतंत्र रिमोट व्यूअर्स को बिना कोई जानकारी दिए उन पहाड़ों पर मानसिक नजर रखने को कहा गया. बुकानन का दावा है कि जब उन्होंने बिना नाम जाने उन जगहों को अपने दिमाग से देखा, तो उनके द्वारा बनाए गए स्केच और विवरण सालों पहले पैट प्राइस द्वारा बनाए गए स्केच से हूबहू मेल खा रहे थे. यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत था कि पहाड़ों के भीतर कोई न कोई अजीब और छिपी हुई संरचनाएं जरूर मौजूद हैं.

आइए जानते हैं लिन बुकानन द्वारा बताए गए उन चार पहाड़ों को... 

अलास्का का माउंट हेस - खुफिया निगरानी केंद्र

बुकानन के अनुसार, पहला और सबसे महत्वपूर्ण ठिकाना अमेरिका के अलास्का में स्थित 'माउंट हेस' के भीतर छिपा हुआ है. इस बेस को पूरी पृथ्वी पर नजर रखने वाले एक निगरानी केंद्र है. जब बुकानन से पूछा गया कि इस ठिकाने का उपयोग किसलिए होता था, तो उन्होंने बताया कि इसका काम पृथ्वी से जुड़े सभी प्रकार के डेटा, सिग्नल और खुफिया जानकारियां इकट्ठा करना है.

Alien bases inside mountains

उन्होंने दावा किया कि शुरुआती रिमोट व्यूअर्स (पैट प्राइस और जो मैकमोनीगल) को यहां इंसान और एलियंस एक साथ मिलकर काम करते हुए दिखाई दिए थे. हालांकि, जब सालों बाद बुकानन ने खुद अपने दिमाग से इस साइट को देखा, तो वहां का माहौल बदल चुका था. 

Advertisement

उन्होंने पाया कि अब वहां किसी भी स्टाफ या जीव की जरूरत नहीं थी; पूरा का पूरा बेस पूरी तरह से ऑटोमेटेड हो चुका था और उपकरण अपने आप चल रहे थे. माउंट हेस को वैसे भी लंबे समय से यूएफओ साइटिंग्स और अजीब रोशनी दिखने के कारण एलियंस का गढ़ माना जाता रहा है.

ऑस्ट्रेलिया का माउंट जील- यूएफओ का इंटरनेशनल एयरपोर्ट

ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में स्थित माउंट जील को बुकानन ने एक बिल्कुल अलग और अनोखा ठिकाना बताया. यह पहाड़ खुफिया जानकारी जुटाने के बजाय अंतरिक्ष से आने वाले मेहमानों के लिए एक 'पोर्ट ऑफ एंट्री' या 'अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे' की तरह काम करता है. 

Alien bases inside mountains

ब्रह्मांड से आने वाले दोस्ताना और शांतिप्रिय एलियंस पहले इस पहाड़ के भीतर बने बेस पर उतरते हैं और फिर यहीं से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैल जाते हैं. यह ठिकाना कई मंजिलों या स्तरों में बना हुआ है. इसके ऊपरी स्तरों पर यूएफओ के उतरने और उड़ान भरने के लिए डॉकिंग एरिया बना है, जबकि इसके निचले स्तरों पर इन अंतरिक्ष यानों की तकनीकी जांच और रखरखाव का काम किया जाता है.

बुकानन ने एक बेहद अजीब वाकया साझा करते हुए बताया कि एक सेशन के दौरान जब वे इस बेस को देख रहे थे, तो वहां मौजूद एलियंस को उनकी मानसिक उपस्थिति का अहसास हो गया था. वहां उन्हें एक 'ग्रे एलियन' महिला अपने बच्चे के साथ दिखाई दी थी, जिसने बुकानन को इशारा करके यह जताया कि उन्हें पता है कि कोई उन्हें देख रहा है और इसमें कोई समस्या नहीं है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 114 राफेल की नई डील में क्यों खास है? 22 तैयार होकर आएंगे, 90 भारत में बनेंगे, 50% स्वदेशी पुर्जे इस्तेमाल होंगे

जिम्बाब्वे का माउंट न्यांगानी- यूएफओ रिपेयर सेंटर

अफ्रीका महाद्वीप के जिम्बाब्वे में स्थित 'माउंट न्यांगानी' के भीतर छिपे तीसरे ठिकाने को लिन बुकानन ने एलियंस का वर्कशॉप या रिपेयर सेंटर बताया है. उनका दावा है कि जब भी अंतरिक्ष में या पृथ्वी के वायुमंडल में चक्कर काट रहे यूएफओ या एलियंस के क्राफ्ट में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो उन्हें मरम्मत के लिए इसी पहाड़ी ठिकाने के भीतर लाया जाता है. 

Alien bases inside mountains

बुकानन ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह जगह बेहद सुरक्षित है. इसकी सुरक्षा बहुत कड़ी है. माउंट न्यांगानी क्षेत्र में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के रहस्यमय तरीके से लापता होने की कई पुरानी घटनाएं सामने आती रही हैं. इस पर बुकानन ने आशंका जताई कि जो लोग भी गलती से इस पहाड़ के आसपास किसी संवेदनशील जानकारी या एलियन गतिविधि को देख लेते हैं, उन्हें वहां से हमेशा के लिए गायब कर दिया जाता है. 

फ्रांस-स्पेन सीमा पर पाइरेनीज पर्वत - अज्ञात बेस

बुकानन ने चौथे और अंतिम कथित एलियन ठिकाने का जिक्र यूरोप में फ्रांस और स्पेन की सीमा पर फैले 'पाइरेनीज पर्वत' की श्रृंखलाओं के बीच किया. हालांकि, इस ठिकाने को लेकर उन्होंने ईमानदारी से एक बात स्वीकार की कि उन्होंने खुद कभी इस जगह का रिमोट व्यूइंग सेशन नहीं किया था. 

Advertisement

Alien bases inside mountains

बुकानन ने पॉडकास्ट में कहा कि मैंने कभी पाइरेनीज पर्वत वाले बेस की व्यक्तिगत रूप से जांच नहीं की, इसलिए मैं निश्चित तौर पर नहीं कह सकता कि वहां किस तरह की गतिविधियां चल रही हैं. लेकिन उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि सीआईए के रिकॉर्ड्स और पैट प्राइस के शुरुआती विवरणों में इस चौथी जगह का भी उतनी ही प्रमुखता से उल्लेख किया गया था, जितना बाकी के तीन पहाड़ों का था.

अद्भुत दावे लेकिन पुख्ता सबूतों का अभाव

लिन बुकानन के ये सभी दावे सुनने में किसी साइंस-फिक्शन हॉलीवुड फिल्म की कहानी जैसे लगते हैं. एक आम इंसान के लिए इन बातों पर आसानी से विश्वास करना नामुमकिन है. आज की तारीख में विज्ञान जगत या दुनिया की किसी भी सरकार ने पृथ्वी पर एलियंस के अस्तित्व या उनके ऐसे किसी भूमिगत बेस होने की पुष्टि नहीं की है. 

खुद लिन बुकानन भी मानते हैं कि ये ठिकाने पहाड़ों में इतनी गहराई में छिपे हैं कि किसी आम इंसान के लिए इन्हें ढूंढ पाना असंभव है. लेकिन इसके बावजूद, अमेरिकी सेना के एक पूर्व खुफिया अधिकारी द्वारा इतने बड़े मंच पर पूरी गंभीरता से किए गए इन दावों ने 'एरिया 51' जैसी कॉन्सपिरेसी थ्योरीज और एलियंस के रहस्यों में रुचि रखने वाले लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement