scorecardresearch
 
Advertisement
साइंस न्यूज़

जब पहाड़ टूटकर बने मौत का सैलाब, ग्लेशियर की इन 6 तबाहियों में गईं हजारों जानें

Glacier Disaster
  • 1/8

नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट गया. इसके बाद बर्फ, पत्थर और मलबे के साथ तेज पानी नीचे की ओर बहने लगा. इससे नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. इस हादसे में कम से कम 270 लोगों की मौत हुई है, जबकि 1,000 से ज्यादा लोग अभी लापता हैं. कई गांव, सड़कें, पुल और बिजली के प्रोजेक्ट भी इसकी चपेट में आए हैं. बचाव का काम जारी है. मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है. Photo: PTI

Glacier Disaster
  • 2/8

ग्लेशियर टूटने से होने वाली ऐसी तबाही सिर्फ नेपाल में नहीं हुई है. दुनिया के कई पहाड़ी इलाकों में ग्लेशियर टूटने या ग्लेशियर से बनी झील का पानी अचानक बाहर निकलने से बड़ी बाढ़ आई है. कई मामलों में पानी, बर्फ और मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. Photo: PTI

Glacier Disaster
  • 3/8

1941: पेरू में ग्लेशियल झील फटी... 1941 में पेरू के हुआराज शहर के पास एक ग्लेशियर से बनी झील का पानी अचानक बाहर निकल गया. पानी और मलबे ने शहर के करीब एक-तिहाई हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में करीब 5,000 हजार लोगों की मौत हुई. इसे दुनिया की सबसे खतरनाक ग्लेशियल झील बाढ़ में गिना जाता है. Photo: Getty

Advertisement
Glacier Disaster
  • 4/8

1962: कुछ ही मिनट में दब गया गांव... 1962 में पेरू के माउंट हुआस्करान से बर्फ और पत्थरों का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया. करीब 1 करोड़ क्यूबिक मीटर बर्फ, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे आया. इसकी चपेट में रनराहिरका और आसपास के गांव आ गए. इस हादसे में करीब 4,000 लोगों की मौत हुई. Photo: Getty 

Glacier Disasters
  • 5/8

1970: भूकंप के बाद आई बड़ी तबाही... 31 मई 1970 को पेरू में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया. भूकंप के झटके से माउंट हुआस्करान का एक बड़ा हिस्सा टूट गया. बर्फ और पत्थरों का मलबा तेज रफ्तार से नीचे आया और युंगाय समेत कई इलाकों को ढक दिया. इस हादसे में करीब 25,000 लोगों की मौत का अनुमान है. इसे इतिहास की सबसे घातक ग्लेशियर आपदाओं में गिना जाता है. Photo: Getty
 

Glacier Disaster
  • 6/8

1981: तिब्बत से नेपाल तक पहुंचा पानी... 1981 में तिब्बत की सिरेनमा को झील में बर्फ का बड़ा हिस्सा गिर गया. इससे झील का पानी बाहर निकल गया और करीब 2 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी, बर्फ और मलबा नेपाल की तरफ बह गया. इस घटना में करीब 200 लोगों की मौत हुई. सड़क, पुल और बिजली के प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा. Photo: Representative/Getty

Glacier Disaster
  • 7/8

2021: चमोली में भी टूटा था ग्लेशियर... फरवरी 2021 में उत्तराखंड के चमोली में रोंटी पीक के पास बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आया. इसके बाद पानी, बर्फ और पत्थरों का तेज बहाव घाटी में पहुंचा. इस हादसे में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. दो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी बुरी तरह प्रभावित हुए. Photo: Getty

Glacier Disaster
  • 8/8

2026: नेपाल-तिब्बत में फिर ग्लेशियर का कहर... अब 2026 में नेपाल-तिब्बत सीमा पर ऐसा ही हादसा हुआ है. ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद बर्फ और पत्थरों का मलबा ल्हेंदे खोला नदी में जा गिरा. इससे तेज बाढ़ आई और तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके से लेकर नेपाल तक कई जगहों पर नुकसान हुआ. बड़ी संख्या में लोग अभी लापता हैं और राहत-बचाव का काम जारी है. इन घटनाओं से साफ है कि ग्लेशियर टूटने या ग्लेशियर की झील का पानी अचानक निकलने पर कुछ ही समय में बड़ी तबाही हो सकती है. खासकर हिमालय जैसे पहाड़ी इलाकों में ऐसे खतरे पर नजर रखना बेहद जरूरी है. Photo: AFP

Advertisement
Advertisement