Sawan 2026 Upay: आज से सावन का महीना शुरू हो चुका है. चूंकि, यह महीना बहुत ही चमत्कारी होता है. इसलिए, इसमें हर दिन महादेव की पूजा और उनसे जुड़े उपाय करने चाहिए. लेकिन, क्या आपको पता है कि सावन की रात में भी किया गया शिव पूजन और मंत्र जाप अत्यंत फलदायी और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है. यदि आप आज रात सावन के इस पावन अवसर पर कुछ विशेष और सरल उपाय करते हैं, तो इससे आपको महादेव का आशीर्वाद मिल सकता है.
भगवान शिव के मंत्रों का जाप
सावन पर आज रात शिवलिंग के समक्ष या घर के पूजा स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें. उसके बाद विधिपूर्वक घी का एक दीपक जलाएं और ऊं नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें. दरअसल, सावन की रात में मंत्र जाप करने से मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है.
चंद्र देव और शिव जी को अर्घ्य
रात के समय एक लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाएं. इस जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और ऊं सोमाय नमः का जाप करें. इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करें. ज्योतिष में चंद्रमा को शिव जी के मस्तक का आभूषण माना गया है. सावन की रात यह उपाय करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक तनाव दूर होता है.
मुख्य द्वार पर दीपक और कपूर
रात को सोने से पहले घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. साथ ही एक पीतल के दीये में 2 कपूर और 2 लौंग जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं. इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है, नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि एवं माता लक्ष्मी का वास होता है.
शिवलिंग पर जल और बेलपत्र
यदि आपके घर में छोटे शिवलिंग हैं, तो रात के समय उन्हें गंगाजल और दूध से अभिषेक कराएं. 11 या 21 बेलपत्रों पर चंदन से राम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें. बेलपत्र पर राम नाम लिखकर चढ़ाने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और आपकी आर्थिक या व्यक्तिगत मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं.
विशेष मंत्र और क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में हाथ जोड़कर भगवान शिव से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और इस मंत्र का जाप करें.
"करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधिकम्।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥"
सावन की रात में किसी भी उपाय को पूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और शांत मन से करें. भक्ति में भाव ही सबसे मुख्य होता है.