25 जुलाई को दोपहर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा. इसके साथ ही उनका 5 साल और 18 दिन का ये कार्यकाल खत्म हो गया. लंबे समय से शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी नजर बनाए रखने वाले प्रधान को इस साल नीट-यूजी 2026 की परीक्षा और पेपर लीक को लेकर हो रहे विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा गया. लेकिन क्या इतने लंबे समय तक शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने कोई काम नहीं किया है? तो बता दें कि यह पूरी तरह से गलत है. उन्होंने अपने इस लंबी जर्नी में पढ़ाई, परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं. चलिए जानते हैं कि उनके कार्यकाल के बड़े काम.
डिजिटल शिक्षा
कोविड-19 के समय में ऑनलाइन शिक्षा को मजबूत करना बहुत बड़ी चुनौती थी क्योंकि लाखों छात्रों को एक साथ लेकर आना आसान नहीं था. लेकिन उस दौरान प्रधान के कार्यकाल मेंडिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कंटेंट, वर्चुअल लैब और तकनीक आधारित पढ़ाई को लगातार बढ़ावा दिया गया. कई ऐसे प्लेटफॉर्म का विस्तार किया गया जो छात्रों को अच्छी शिक्षा पहुंचा सके.
बोर्ड परीक्षाओं में बदलाव
बता दें कि नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं के लेकर चल रहे तनाव को कम करने के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के आधार पर नई किताबों और नई मूल्यांकन प्रणाली की तैयारी शुरू हुई.CBSE समेत अन्य बोर्ड में क्षमता के आधार पर प्रश्नों का दायरा बढ़ाया गया.
नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारा
प्रधान ने साल 2021 में शिक्षा मंत्री बने थे. हालांकि, नई शिक्षा नीति उस समय तक लागू हो चुकी थी लेकिन उसे जमीनी स्तर पर लागू करने का काम अभी भी बचा हुआ था. इस दौरान उन्होंने राज्यों के साथ मिलकर नई शिक्षा नीति को लागू करने का काम तेज कर दिया. स्कूलों में मातृभाषा आधारित पढ़ाई, स्किल एजुकेशन, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम और चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम जैसे कई बदलाव सामने आए.
NTA में भी कई बदलाव
उनके कार्यकाल में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी में शामिल हो गई. देश में बड़े-बड़े परीक्षाओं जैसे नीट, जेईई या CUET की परीक्षा की जिम्मेदारी इनके पास रही. हर साल करोड़ों छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हुए और इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ता चला गया.
पेपर लीक के लिए कानून
प्रधान के कार्यकाल में पहले से ही लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 लागू किया गया था. हालांकि, पेपर लीक के बाद से इसे और मजबूत बनाने की दिशा में सरकार काम कर रह रही है. प्रस्तावित संशोधन के जरिए पेपर लीक के संगठित मामलों में 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है.
CBT मोड में परीक्षा का आयोजन
इस्तीफा के बाद प्रधान ने कहा कि अगले साल से नीट परीक्षा का आयोजन कंप्यूटर मोड में किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए अपने इस्तीफे वाले पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने इसके बारे में जिक्र किया है.