क्या आपको भी छोटी-छोटी बातों पर अचानक क्रोध आ जाता है? कोई सामान्य बात कह दे तो आप उत्तेजित हो जाते हैं, बात बढ़ जाती है और कई बार बिना किसी बड़े कारण के घर में विवाद की स्थिति बन जाती है. यदि ऐसा बार-बार हो रहा है तो केवल अपने स्वभाव को ही इसका कारण न मानें. घर की दिशाएं और उनमें मौजूद तत्व भी व्यक्ति के व्यवहार और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं. विशेष रूप से अग्नि तत्व से जुड़ी दिशाओं में अत्यधिक समय बिताना क्रोध और उत्तेजना बढ़ने का कारण हो सकती है.
क्रोध को बढ़ाती हैं अग्नि तत्व की दिशाएं
दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व तथा दक्षिण दिशा को अग्नि तत्व से संबंधित माना जाता है. अग्नि ऊर्जा व्यक्ति में उत्साह, सक्रियता, कार्यक्षमता और निर्णय लेने का साहस बढ़ाती है. लेकिन जब इस ऊर्जा का प्रभाव अधिक हो जाए तो बेचैनी, अधीरता, चिड़चिड़ापन और क्रोध जैसी प्रवृत्तियां भी बढ़ सकती हैं.
यदि किसी व्यक्ति का दिन का अधिकांश समय इन्हीं दिशाओं में बैठकर या काम करते हुए गुजरता है और साथ ही उसे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगा है तो घर में उसकी बैठने और सोने की दिशा पर ध्यान देना चाहिए. विशेषकर सोने की जगह का संबंध व्यक्ति की मानसिक शांति से जोड़ा जाता है. इसलिए अत्यधिक अग्नि ऊर्जा वाले स्थान पर बेडरूम बनाने से बचने की सलाह दी जाती है.
1. नवविवाहितों के कमरे में न रखें ये चीजें
नवविवाहित दंपत्ति के लिए बेडरूम का स्थान तय करते समय भी इन दिशाओं को लेकर सावधानी रखनी चाहिए. यदि पति-पत्नी का कमरा ऐसे स्थान पर है जहां अग्नि तत्व का प्रभाव अधिक माना जाता है तो छोटी-छोटी बातों पर नोंक-झोंक और मतभेद बढ़ने की स्थिति बन सकती है. लगातार तनाव रहने से रिश्ते में सहजता कम हो सकती है. इसलिए दंपति के कमरे के लिए ऐसी दिशा और स्थान का चयन करना बेहतर माना जाता है जहां वातावरण संतुलित और शांत हो. कमरे में बहुत अधिक गर्म रंग, अत्यधिक लाल सजावट या अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जमावड़ा भी कम रखना चाहिए.
2. बेडरूम के ऊपर या नीचे रसोई पर दें ध्यान
कई बार कमरे की दिशा सही होने के बावजूद वास्तु में एक दूसरी स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत होती है. यदि जिस कमरे में व्यक्ति सोता है, उसके ठीक ऊपर या नीचे रसोई बनी हुई है तो वहां अग्नि तत्व का प्रभाव अधिक माना जाता है. ऐसी स्थिति व्यक्ति के स्वभाव में गर्मी और बेचैनी बढ़ा सकती है. विशेषकर यदि घर के किसी सदस्य में पहले से ही चिड़चिड़ापन, जल्द उत्तेजित होने या हर बात पर प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति है तो इस व्यवस्था को भी जांचना चाहिए. संभव हो तो बेड की स्थिति बदलकर या कमरे के उपयोग में परिवर्तन करके अग्नि प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है.
3. दिनभर अग्नि दिशा में बैठकर न करें काम
यदि आपका ऑफिस, दुकान या घर में काम करने की जगह दक्षिण-पूर्व अथवा दक्षिण दिशा में है और वहां बैठने के बाद आपको लगातार तनाव या उत्तेजना महसूस होती है तो बैठने की व्यवस्था पर भी विचार करें. काम के दौरान सक्रियता जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक अत्यधिक अग्नि प्रभाव वाले स्थान पर रहना मानसिक रूप से असहजता पैदा कर सकता है. कमरे में पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन रखें. सोने के स्थान के आसपास गर्मी पैदा करने वाले उपकरणों की संख्या कम करें और शयनकक्ष को शांत वातावरण देने का प्रयास करें.