Kanya Pujan Rules: नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के साथ कन्या पूजन भी किया जाता है. इसे कंजक पूजा भी कहा जाता है. इस दौरान छोटी बच्चियों को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है, उन्हें भोजन कराया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि आती है. ज्यादातर लोग नवरात्र की अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं. इस दिन छोटी बच्चियों को घर बुलाकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें हलवा, पूड़ी व चने का भोजन कराया जाता है. अगर आप भी इस बार कन्या पूजन करने वाले हैं, तो कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखें. आइए जानते हैं कि कन्या पूजन के दौरान किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए.
कन्या पूजन करते समय इन नियमों का रखें ध्यान
1. कन्या पूजन पर कितनी कन्याओं को बुलाएं?
कन्या पूजन में नौ बच्चियों को बुलाना शुभ माना जाता है. इन्हें मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है. अगर नौ कन्याएं न मिल पाएं, तो आप तीन, पांच या सात बच्चियों को भी भोजन करा सकते हैं.
2. एक छोटे बालक को भी बुलाएं
कन्या पूजन में एक छोटे बालक को शामिल करने की भी परंपरा है. उसे बटुक भैरव या लांगूरा कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं के साथ बालक को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है.
3. पैर धोकर करें स्वागत
कन्याओं के घर पहुंचने पर प्यार और सम्मान के साथ उनका स्वागत करें. उनके पैर साफ पानी से धोकर कपड़े से पोंछें. इसके बाद उन्हें साफ आसन पर बैठाएं.
4. तिलक लगाकर करें पूजा
कन्याओं के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं. इसके बाद अक्षत और फूल अर्पित करें. उनके पैरों में आलता लगाएं. उन्हें लाल चुनरी दें, पूजा के बाद मां दुर्गा की आरती करें.
5. साफ-सफाई और भोजन का रखें ध्यान
कन्या पूजन से पहले पूजा वाली जगह को अच्छी तरह साफ कर लें. बच्चियों के लिए बनाया जाने वाला भोजन भी साफ-सफाई के साथ तैयार करें. धार्मिक परंपरा में सात्विक भोजन का महत्व है, इसलिए खाने में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल न करें.
6. भोजन में रखें ये पकवान
कन्या पूजन के लिए हलवा, पूड़ी और काले चने पारंपरिक पकवान माने जाते हैं. इसके अलावा खीर या आलू की सब्जी भी बना सकते हैं.
7. पहले मां दुर्गा को लगाएं भोग
कन्याओं को भोजन कराने से पहले तैयार पकवानों का भोग मां दुर्गा को लगाएं. इसके बाद कन्याओं को भोजन परोसें. इसे पूजा की परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है.
8. भोजन के बाद दें उपहार और दक्षिणा
भोजन कराने के बाद कन्याओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, फल या कोई उपहार दे सकते हैं. इसके बाद उनका आशीर्वाद लेकर सम्मानपूर्वक विदा करें.