देवभूमि उत्तराखंड में सावन माह भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है. इसी क्रम में टिहरी जिले के प्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव मंदिर में सावन के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला. दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन, जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे. सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें दिखाई दी और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा.
कोटेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं के कारण शिव भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव का शिवलिंग विश्राम मुद्रा में लेटा हुआ है, जो देश के अन्य शिव मंदिरों से इसे अलग पहचान देता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह शिवलिंग हर वर्ष एक अन्न के दाने (जौ) के बराबर बढ़ता है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक मानते हैं.
सावन के पवित्र महीने में मंदिर में विशेष पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है. श्रद्धालु भगवान शिव को बेलपत्र, दूध, गंगाजल, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं. सावन के पावन महीने में कोटेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ रही श्रद्धा यह दर्शाती है कि देवभूमि उत्तराखंड में भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास आज भी अटूट है.
प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध
कोटेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है. भागीरथी नदी के किनारे स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है. सावन के दौरान यहां भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं के इंतजाम किए गए हैं. ताकि भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि कोटेश्वर का मतलब एक करोड़ देवताओं का वास है. यहां पर शिव कुंड है. पार्वती कुंड. सूर्य कुंड और अंदर जो मुख्य विशाल शिवलिंग है, वो जौ के दाने के बराबर हर साल बढ़ता है. जो भी यहां दर्शन कनरे आता है, भगवान भोलेनाथ सबकी मनोकामना पूर्ण करते हैं. इनका नाम आशुतोष भगवान भी है. जो भी व्यक्ति यहां जलाभिषेक या रुद्री का पाठ करता है वो निश्चित ही सफलता प्राप्त करता है, निःसंतान लोगों को संतान की प्राप्ति होती है.