Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को रक्षाबंधन है. इस बार राखी का त्योहार ग्रहों की एक विशेष स्थिति के बीच आ रहा है. सिंह राशि में सूर्य, केतु और अस्त बुध की युति बन रही है. बुध को बुद्धि, वाणी, संवाद और बहन व बुआ का कारक ग्रह माना जाता है. जबकि केतु को अलगाव का ग्रह माना जाता है. ऐसे में इन तीन ग्रहों का मेल कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील रहेगा. ज्योतिषीय दृष्टि से यह युति केवल रिश्तों को ही प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि व्यवहार, निर्णय क्षमता, पारिवारिक संवाद पर भी असर डालेगी. आइए जानते हैं कि इससे किन राशियों के सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए सिंह राशि पंचम भाव में आती है. पंचम भाव बुद्धि, विवेक, निर्णय क्षमता, संतान और रचनात्मक सोच से जुड़ा माना जाता है. यहां सूर्य, अस्त बुध और केतु की युति होने से विचारों में अस्थिरता और निर्णय लेने में उलझन की स्थिति बन सकती है. मेष राशि में बुध तीसरे और छठे भाव का स्वामी होता है. तीसरा भाव छोटे भाई-बहन और संवाद से संबंधित है. इसलिए बुध के अस्त होने का असर भाई-बहन से जुड़े मामलों में भी दिखाई दे सकता है. व्यक्ति किसी बात को लेकर जरूरत से ज्यादा सोच सकता है या सामने वाले की बात का अर्थ अलग निकाल सकता है.
मिथुन राशि
मिथुन राशि के लिए सिंह राशि तीसरे भाव में आती है. यह भाव छोटे भाई-बहन, साहस, संवाद, प्रयास और निकट संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है. इसी भाव में सूर्य, बुध और केतु की युति बनना विशेष महत्व रखता है. बुध मिथुन राशि का लग्नेश है और तीसरे भाव में ही स्थित होकर अस्त हो रहा है. लग्नेश के अस्त होने से व्यक्ति की सोच और आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है. केतु की मौजूदगी भाई-बहनों के साथ भावनात्मक दूरी या बातचीत में अचानक ठंडापन ला सकती है. रक्षाबंधन पर इस राशि के लोगों को अपनी बात रखने से अधिक सामने वाले की बात सुनने पर ध्यान देना चाहिए.
कर्क राशि
कर्क राशि से सिंह राशि दूसरे भाव में आती है. दूसरा भाव कुटुम्ब, वाणी, धन और पारिवारिक संस्कारों का भाव है. यहां सूर्य, बुध और केतु की युति होने से परिवार में बातचीत का तरीका महत्वपूर्ण हो जाएगा. बुध कर्क राशि में तीसरे और बारहवें भाव का स्वामी होता है. ऐसे में बुध के अस्त होने से भाई-बहन से जुड़ी बातचीत में दूरी, गलतफहमी अथवा मन की बात स्पष्ट न कर पाने की स्थिति बन सकती है. वाणी पर नियंत्रण रखना इस राशि के लिए विशेष आवश्यक रहेगा. सामान्य बात भी कठोर लग सकती है, इसलिए रक्षाबंधन पर शब्दों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए.
कन्या राशि
कन्या राशि के लिए सिंह राशि द्वादश भाव में आती है. द्वादश भाव खर्च, एकांत, दूरी, विदेश और मानसिक रूप से किसी चीज से अलग होने का संकेत देता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बुध कन्या राशि का लग्नेश होने के साथ-साथ कर्म भाव का स्वामी भी है और इसी समय सूर्य के निकट होने से अस्त अवस्था में रहेगा. लग्नेश का अस्त होना व्यक्ति की सोच, निर्णय और व्यक्तिगत ऊर्जा को प्रभावित करने वाला माना जाता है. केतु की उपस्थिति दूरी और भीतर ही भीतर किसी बात को लेकर उलझन बढ़ा सकती है. भाई-बहन से संबंधित कोई बात मन में रख लेने के बजाय उसे शांतिपूर्वक स्पष्ट करना बेहतर रहेगा.
क्या उपाय करें?
रक्षाबंधन के दिन इन चारों राशियों के जातक विशेष रूप से कटु वाणी, जल्दबाजी में निर्णय और पुरानी शिकायतों की चर्चा से बचें. बहन से कोई मतभेद हो तो उसे उसी दिन बहस का विषय न बनाएं. भगवान गणेश की पूजा करना, दूर्वा अर्पित करना और हरी मूंग का दान करना बुध से जुड़े पारंपरिक उपायों में माना जाता है. सूर्य के लिए सुबह जल अर्पित करें और केतु के प्रभाव को संतुलित करने के लिए गणेशजी का स्मरण करें.