वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं. तभी तो उनके भक्त न सिर्फ वृंदावन या भारत में हैं, बल्कि दुनिया के कोने-कोने में मौजूद हैं. प्रेमानंद महाराज का ऐसा ही एक दिव्य प्रवचन इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़ा वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त श्री वल्लभाचार्य के शिष्य श्रीकृष्ण दास जी महाराज और एक वेश्या का बड़ा ही सुंदर प्रसंग सुनाया है, जिसमें भगवान की दृष्टि पड़ते ही वेश्या का उद्धार हो गया था.
प्रेमानंद महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण दास जी महाराज भगवान के लिए भोग और श्रृंगार की सामग्री लेने आश्रम से थोड़ा दूर जाते थे. एक बार इस काम के लिए उन्हें आगरा जाना पड़ा. रास्ते में उनकी नजर लोगों की भीड़ पर पड़ी. कौतूहल वो भी देखने चले गए कि वहां क्या हो रहा है. उन्होंने देखा कि एक वेश्या नृत्य कर रही है और लोग खड़े होकर उसका आनंद ले रहे हैं. उस वेश्या के हाव-भाव और नृत्य देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई.
हालांकि वेश्या का नृत्य देखकर श्रीकृष्ण दास जी महाराज गहरी सोच में डूब गए. वह सोचने लगे कि यह सांसारिक लोगों को रिझाने के लिए कितना प्रयास कर रही है. अगर ये भगवान को रिझा लेती तो इसका जन्म सार्थक हो जाता. उन्होंने वेश्या को 10 रुपए दिए और कहा कि मेरे आलाप के साथ ताल मिलाते हुए नृत्य करो. वेश्या बेहद प्रवीण थी. उसने गले से आलाप निकलते ही उसे पकड़ लिया और थिरकने लगी.
संत की चारों ओर बदनामी
प्रेमानंद महाराज ने आगे बताया कि श्रीकृष्ण दास जी महाराज ने वेश्या को एक हजारा मुद्राएं दीं और कहा कि हमारे बादशाह के सामने यदि ऐसा नृत्य कर दोगी तो जितना धन कहोगी, मिल जाएगा. धन की लोभी वेश्या महाराज जी के साथ चल पड़ी. वेश्या को लेकर जब वो बृजमंडल पहुंचे तो हर जगह उनकी बदनामी हो गई कि 60-70 वर्ष के इतने बड़े संत महात्मा कृष्णदास जी अपने साथ एक वेश्या को लाए हैं. संत समाज में उनकी खूब निंदा हुई.
कुई पवित्र कुंडों में कराया स्नान
बहरहाल, श्रीकृष्ण दास जी महाराज ने अपनी कुटिया के बगल में ही वेश्या के रहने की व्यवस्था कर दी. इसके बाद मानसी गंगा, राधा कुंड, श्याम कुंड, ललिता कुंड, अप्सरा कुंड सब जगह बारी-बारी स्नान करवाया. इसके बाद वेश्या को ठाकुरजी का पद यात्रा करवाया. और फिर बोले कि आज मैं तुम्हें अपने बादशाह के सामने लेकर चल रहा हूं. अगर तुम वहां सफल हो गई तो निश्चित ही तुम्हारा बेड़ा पार हो जाएगा. तुम जितना धन, जितनी संपत्ति मांगोगी, मिल जाएगी.
इसके बाद श्रीकृष्ण दास जी महाराज वेश्या को पूरे साज-सामान के साथ श्रीनाथ जी के समक्ष आ गए. महाराज के कहने पर वेश्या ने नृत्य करना शुरू कर दिया. नृत्य समाप्त होते ही जैसे ही वेश्या ने अपनी आंखें उठाई तो देखा कोटि-कोटि काम को मूर्छित करने वाले ललित त्रिभंगी साक्षात सामने हैं. कृष्णदास जी की प्रार्थना से भगवान ने उसे प्रकाश स्वरूपी दर्शन दे दिए. यह देखते ही वेश्या मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ी. उसके प्राण छूट गए. ईश्वर की कृपा से उसका उद्धार हो गया.