पितृपक्ष शुरू होने वाला है. इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा. 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ ही श्राद्धों के दिन समाप्त हो जाएंगे. पितृपक्ष में पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने की परंपरा है. कहते हैं कि इन दिनों में हमारे पूर्वज हमें आशीर्वाद देने धरती पर उतरते हैं. जो भी लोग पूरी श्रद्धा से अपने पितरों का तर्पण करते हैं, उनके जीवन में कभी कोई समस्या नहीं आती है. ऐसी मान्यताएं हैं कि पितृपक्ष में कुछ खास चीजों की खरीदारी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. इन में झाड़ू, नमक और सरसों के तेल को सबसे प्रमुख माना गया है. कहते हैं कि पितृपक्ष में इन चीजों को खरीदने त्रिदोष लगता है. यह त्रिदोष इंसान को अर्श से फर्श तक पहुंचा सकता है.
1. झाड़ू
वैसे तो झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. लेकिन इसे किसी भी दिन या किसी भी अवसर पर खरीदना उचित नहीं होता है. मान्यता है कि पितृपक्ष में नई झाड़ू खरीदने से बचना चाहिए. इस अवधि झाड़ू खरीदने से घर की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है.
2. नमक
श्राद्ध पक्ष में नमक खरीदना भी शुभ नहीं होता है. लोक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में नमक की खरीदारी इंसान को मुश्किलों की ओर धकेल सकती है. इतना ही नहीं, इन दिनों में न तो किसी से नमक का उधार लेना चाहिए और न ही किसी को नमक उधार देना चाहिए.
3. सरसों का तेल
ज्योतिष में सरसों के तेल का संबंध शनि देव से माना जाता है. शनिदेव को तेल अर्पित करने की परंपरा भी है. लेकिन पितृपक्ष के दौरान सरसों का तेल खरीदकर घर लाने से बचने की मान्यता है. कहते हैं कि पितृपक्ष में सरसों का तेल खरीदकर लेना से हमारे पितृ और शनि देव दोनों रुष्ट हो सकते हैं. इसलिए ये गलती न करें.
क्या होता है त्रिदोष?
ज्योतिषीय मान्यताओं में त्रिदोष को जीवन में आने वाली परेशानियों से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि इसका प्रभाव आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और करियर पर पड़ सकता है. जिन लोगों कुंडली या भाव में त्रिदोष लगता है, उन्हें जीवन में और कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. मेहनत के बावजूद तरक्की नहीं मिलती है. कमाई के बावजूद हाथ में पैसा नहीं रुकता है. खूब कोशिश करने पर भी रिश्तों में सुधार नहीं होता है.
क्या उपाय करें?
पितृपक्ष में त्रिदोष लगाने वाली चीजों की खरीदारी से बचें. तिथिनुसार पितरों का श्राद्ध करें. श्राद्ध विधिसम्मत करेंगे तो उत्तम होगा. पितरों का श्राद्ध करने के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाने की चीज या धन का दान करें.