पितृ पक्ष (Pitru Paksha) हिंदू कैलेंडर में 16-चंद्र दिनों की अवधि होती है. इस अवधि में हिंदू अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं (Pay Homage to Ancestors in Pitru Paksha). भारत में इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे पितृ पोक्खो, सोरा श्राद्ध, कनागत, महालय, अपरा पक्ष और अखाडपाक, पितृ पांधारवड़ा.
पितृ पक्ष के दैरान हिंदुओं में शुभ कार्य नहीं किया जाता है. इस समय के दौरान किए गए मृत्यु संस्कार को श्राद्ध या तर्पण के रूप में जाना जाता है. दक्षिणी और पश्चिमी भारत में भाद्रपद, सितंबर महीने के हिंदू चंद्र महीने के दूसरे पक्ष में पड़ता है और गणेश उत्सव के तुरंत बाद पखवाड़े के बाद आता है. यह प्रतिपदा से शुरू होता है. यह अमावस्या के दिन समाप्त होता है जिसे सर्वपितृ अमावस्या, पितृ अमावस्या, पेड्डला अमावस्या, महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. पितृ पक्ष की समाप्ति और मातृ पक्ष की शुरुआत को महालय कहा जाता है (Pitru Paksha for 16 Lunar Days).
अधिकांश वर्षों में, इस अवधि के दौरान सूर्य उत्तरी से दक्षिणी गोलार्ध की ओर दिशा बदलता है.
पितृ पक्ष में लोग पितरों की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराते है और कुछ परिवार भागवत पुराण और भगवद गीता धर्मग्रंथों का अनुष्ठान भी कराते हैं. कई स्थानों पर साथ ही, पूर्वजों की भलाई के लिए प्रार्थना करने के लिए पुजारियों को उपहार भेंट करने की भी परंपरा है (Pitru Paksha, Conduct Ritual Recitals).
अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त को विशेष माना गया है. 3 अक्टूबर को कुतुप वेला सुबह 11 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहने वाला है.
चाणक्य नीति में पूर्वज और पितृ संस्कार को लेकर भी एक बड़ी महत्वपूर्ण बात कही है. चाणक्य का मानना था कि सामान्यत: लोग सिर्फ जन्म देने वाले या पिछली पीढ़ियों को ही पितृ का दर्जा देते हैं. जबकि पितृ शब्द का वास्तविक पैमाना इससे कहीं ज्यादा बड़ा है.
पितृपक्ष में नवमी तिथि पर घर की दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध करने की परंपरा है. इस दिन परिवार की दिवंगत माता, दादी, नानी और अन्य पूर्वज महिलाओं के निमित्त श्राद्ध किया जा सकता है. उनका पिंडदान व तर्पण कर आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है.
बिहार के गया में पितृपक्ष मेले के दौरान विदेशी श्रद्धालु भी अपने पितरों के मोक्ष की कामना लेकर पहुंचे हैं. रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी समेत कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी तट स्थित देवघाट पर सनातन परंपरा के अनुसार पिंडदान और तर्पण किया. यूक्रेन से आई एलिस जंडरा ने बताया कि वह सनातन धर्म से प्रभावित हैं और अपने पितरों की मोक्ष की कामना को लेकर गया पहुंची हैं.
बिहार के गया में पितृपक्ष मेले के दौरान रूस, यूक्रेन, इटली और जर्मनी समेत कई देशों से विदेशी श्रद्धालु पहुंचे. फल्गु नदी के देवघाट पर उन्होंने स्थानीय पुरोहितों के मार्गदर्शन में अपने पितरों की मोक्ष और आत्मशांति की कामना के लिए पिंडदान और तर्पण किया. वीडियो में जानें विदेशी श्रद्धालु क्या बोले.
श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध के दिन घर का भोजन खाने को लेकर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि पहले ब्राह्मण को विधि-विधान से भोजन कराना चाहिए।
Pitru Paksha 2026: श्राद्ध के दिन घर में बना भोजन खाना चाहिए या नहीं? प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए बताया श्राद्ध के दिन भोजन से जुड़ा सही नियम और तरीका.
Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का पृथ्वी लोक पर आना माना जाता है. ऐसे में यदि सपने में अचानक आपके पूर्वज नजर आ जाएं, तो यह महज इत्तेफाक नहीं होता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार पूर्वजों की स्थिति, उनका हंसना या रोना हमारे जीवन पर गहरा असर डालता है. तो आइए जानते हैं इन सभी सपनों का अर्थ.
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, श्राद्ध के लिए बना भोजन अपात्र लोगों को कभी नहीं देना चाहिए. यानी छल-कपट करने वाले, चोरी करने वाले और अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को ठेस पहुंचाने वालों को कभी श्राद्ध का भोजन नहीं देना चाहिए.
शास्त्रों के जानकार विद्वानों का कहना है कि पितृपक्ष में मकान की छत या लेंटर डालने पर कोई दोष नहीं लगता है. जो लोग मानते हैं कि ऐसा करने से पितृ दोष लग जाता है, वो सिर्फ एक भ्रम में जी रहे हैं. छत या लेंटर सिर्फ पंचक में डलवाने से बचना चाहिए. अगर किसी का मकान बन रहा है तो श्राद्धों में पितृ दोष के डर से इसे नहीं रोकना चाहिए.
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष का पावन समय चल रहा है और श्राद्ध संपन्न करने के लिए अब गिने-चुने दिन ही बाकी हैं. हिंदू धर्म में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म से जुड़े कुछ बेहद कड़े नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना हर वंशज के लिए अनिवार्य माना जाता है.
Pitra Paksha 2026 Special: पितृ पक्ष में श्राद्ध की थाली के लिए आप बिना प्याज-लहसुन की स्वादिष्ट सात्विक आलू-टमाटर की सब्जी बना सकते हैं. साबुत मसालों के तड़के और देसी घी के स्पेशल तड़के के साथ ये बहुत ही स्वादिष्ट और चटपटी लगती है. इसे बनाना बहुत ही आसान है.
पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ खान-पान के नियमों का भी विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक परंपराओं में श्राद्धकर्ता के लिए सात्विक, ताजा और घर का बना भोजन प्राथमिकता में रखा जाता है. हालांकि, यह कहना सही नहीं कि पितृ पक्ष के पूरे 16 दिनों में हर व्यक्ति के लिए दूसरे के घर का भोजन करना अनिवार्य रूप से वर्जित है. अलग-अलग ग्रंथों और पारिवारिक परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं.
रूस से भारत आए सात रूसी तीर्थयात्रियों ने ब्रह्मकपाल में विधि-विधान से अपने पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया. इस दौरान उन्होंने पितरों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना की. विदेश से बदरीनाथ पहुंचे इन तीर्थयात्रियों ने ब्रह्मकपाल में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर यहां की परंपराओं और मान्यताओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की.
पितृपक्ष से महाभारत के दानवीर कर्ण की एक कथा भी बहुत प्रचलित है. कथा के अनुसार, जब राजा कर्ण संसार छोड़कर परलोक गए थे, तब उन्हें स्वर्ग में जाकर खाने के लिए सोना दिया गया था. कर्ण से कहा गया कि आपने पृथ्वी पर सिर्फ सोने का दान किया है. इसलिए आपको खाने में सोना ही दिया जाएगा.
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष के दौरान खान-पान और शुद्धता को लेकर कई मान्यताएं जुड़ी हैं. अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इन 16 दिनों में दूसरे के घर का भोजन करना वर्जित है? जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण.
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष का समय पूर्णतः संयम, सादगी और पूर्वजों के प्रति सम्मान का होता है. मान्यताओं के अनुसार इन 16 दिनों के दौरान नई वस्तुओं की खरीदारी करना अशुभ माना जाता है, जिससे घर में आर्थिक तंगी आ सकती है. तो आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में.
Pitra Paksha 2026 Special: पितृपक्ष में श्राद्ध की थाली के लिए बिना प्याज-लहसुन की स्वादिष्ट और सात्विक आलू-गोभी बनाना बहुत ही आसान है. स्पेशल भुने मसाले और देसी घी के तड़के वाली इस आसान रेसिपी से सब्जी में आएगा ढाबा स्टाइल स्वाद.
इस बार चतुर्थी तिथि 29 सितंबर की शाम 05.09 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर को दोपहर 02.55 बजे तक रहेगी. इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी. पंचमी तिथि 1 अक्टूबर को दोपहर 12.35 बजे तक रहेगी. शास्त्रों की जानकारों की मानें तो चूंकि श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का अपराह्न काल महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए दोनों तिथियों का श्राद्ध 30 सितंबर दिन बुधवार को ही मान्य है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मकपाल में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी धार्मिक मान्यता के चलते बद्रीनाथ को मोक्ष धाम भी कहा जाता है. ब्रह्मकपाल को कपाल मोचन तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है.
Pitra Paksha 2026 Special Kaddu Sabzi: पितृ पक्ष में श्राद्ध की थाली के लिए बनाएं बिना प्याज-लहसुन वाली हलवाई स्टाइल कद्दू की सब्जी. पंचफोरन, गुड़ और खास मसालों से तैयार ये रेसिपी स्वाद में बेहद खास लगेगी.