आज शरद पूर्णिमा है. इस दिन लोग खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखते. फिर चंद्रमा की किरणें खीर में अमृत के समान पड़ती हैं. मान्यता है कि खीर खाने वाले लोगों को धन्यधान्य, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान बताया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और भजन-कीर्तन व जागरण करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं.
कोजागरी शब्द का संबंध ‘कौन जाग रहा है’ की मान्यता से जोड़ा जाता है. इसी कारण कई परिवारों में रात में दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी की पूजा, मंत्र-जाप और भजन किए जाते हैं. श्रद्धालु घरों में साफ-सफाई कर पूजा स्थल सजाते हैं. मां लक्ष्मी और चंद्र देव को पुष्प, अक्षत, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है.
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्याय परिषद अध्यक्ष आचार्य अशोक कुमार द्विवेदी शरद पूर्णिमा पर पिछले 44 सालों से मां लक्ष्मी की विशेष पूजा कर रहे है. इसे लेकर शनिवार से ही महायज्ञ के मुख्य अनुष्ठान कराए जा रहे हैं. 21 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पूजन किया जा रहा है. इस दौरान श्री यंत्र की स्थापना, विधिवत पूजन, श्री मंत्र का जप, सहस्रार्चन और हवन होगा. इन अनुष्ठानों के माध्यम से मां महालक्ष्मी की आराधना की जा रही है.
चंद्रमा की 16 कलाओं से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. हिंदू धर्म में सोलह कलाओं को पूर्णता, समृद्धि और आदर्श व्यक्तित्व का प्रतीक माना गया है. यही कारण है कि इस रात चंद्रदेव की पूजा और चांदनी के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में अमृत तुल्य गुण होते हैं. इसी आस्था के आधार पर लोग खीर बनाकर खुले आकाश के नीचे रखते हैं और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.
खीर रखने की परंपरा का विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा पर दूध, चावल और चीनी से खीर बनाने की परंपरा प्रचलित है. इसे भगवान को अर्पित करने के बाद चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है. मान्यता के अनुसार, चंद्र किरणों के संपर्क में आने से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं. सुबह इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और परिचितों में बांटा जाता है. हालांकि, खीर को खुले में रखने के बजाए स्वच्छ, सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखना उचित है. ताकि उसमें धूल, कीड़े या अन्य अशुद्धियां न पड़ें.