scorecardresearch
 

Garud Puran: मृत्यु के बाद शव को जमीन पर क्यों लिटाया जाता है? गरुड़ पुराण से जानें मान्यता

Garud Puran: हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति के निधन के तुरंत बाद उसके पार्थिव शरीर को बिस्तर से उतारकर जमीन पर लिटाने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है. लेकिन क्या यह केवल एक पुरानी रस्म है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक रहस्य है. आइए जानते हैं.

Advertisement
X
गरुड़ पुराण (Photo: ITG)
गरुड़ पुराण (Photo: ITG)

Garud Puran: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव को अक्सर बिस्तर से उतारकर जमीन पर लिटा दिया जाता है? हिंदू परिवारों में यह परंपरा लंबे समय से निभाई जाती रही है. लेकिन आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? क्या यह केवल एक पुरानी परंपरा है या इसके पीछे कोई धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक अर्थ भी छिपा है?

अधिकांश लोग इस परंपरा का पालन तो करते हैं, लेकिन इसके पीछे की मान्यताओं के बारे में विस्तार से नहीं जानते. आखिर मृत्यु के बाद शव को जमीन पर ही क्यों रखा जाता है? इसका पंचमहाभूतों से क्या संबंध माना जाता है? और क्यों अंतिम संस्कार से पहले बिस्तर की बजाय धरती को चुना जाता है? आज हम इसी परंपरा के पीछे छिपी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को समझने की कोशिश करेंगे.

मृत्यु के बाद शव को जमीन पर रखने की परंपरा

मृत्यु जीवन का वह सत्य है, जिसे कोई भी व्यक्ति टाल नहीं सकता है. जब किसी व्यक्ति की अंतिम सांस समाप्त होती है, तो परिवार में अंतिम संस्कार से जुड़ी कई परंपराओं का पालन किया जाता है. इन्हीं में से एक परंपरा मृतक के शरीर को बिस्तर से उतारकर जमीन पर लिटाने की भी है.

Advertisement

हालांकि भारत के अलग-अलग राज्यों, समुदायों और परिवारों में अंतिम संस्कार की परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन कई हिंदू परिवारों में मृत्यु के बाद शव को जमीन पर रखने की परंपरा देखने को मिलती है. इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता और प्रकृति से मनुष्य के संबंध का प्रतीकात्मक संदेश भी माना जाता है.

पंचमहाभूतों से जुड़ी है मान्यता

हिंदू दर्शन में मानव शरीर को पंचमहाभूतों से निर्मित माना गया है. ये पांच तत्व हैं- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश. धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्म लेने वाला शरीर अंततः इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है. मृत्यु के बाद होने वाले अंतिम संस्कार को भी इसी प्राकृतिक चक्र का हिस्सा माना जाता है.

ऐसे में शव को धरती पर रखने की परंपरा को भी पृथ्वी तत्व से जोड़कर देखा जाता है. यह प्रतीकात्मक रूप से इस बात का संकेत माना जाता है कि शरीर अब अपनी अंतिम यात्रा की ओर बढ़ चुका है और अंततः उसे प्रकृति में विलीन होना है.

धरती पर लिटाने का प्रतीकात्मक अर्थ

प्राचीन समय में अधिकांश घरों की जमीन मिट्टी की होती थी. ऐसे में मृतक को धरती पर रखने का एक सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक अर्थ भी माना जाता था. यह परंपरा मनुष्य को जीवन के अंतिम सत्य की याद दिलाती है कि व्यक्ति चाहे जीवन में कितना भी धन, पद, प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त कर ले, शरीर नश्वर है. मृत्यु के बाद सांसारिक उपलब्धियां यहीं रह जाती हैं.

Advertisement

धरती पर शव को रखना विनम्रता और जीवन की अस्थिरता का भी प्रतीक माना जाता है. यह जीवित लोगों को याद दिलाता है कि जीवन स्थायी नहीं है और अंततः हर व्यक्ति को प्रकृति के नियमों का पालन करना होता है.

शव को बिस्तर पर ही क्यों नहीं रखा जाता?

कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि यदि व्यक्ति की मृत्यु बिस्तर पर हुई है, तो शव को वहीं क्यों नहीं रहने दिया जाता? पारंपरिक मान्यताओं में बिस्तर को दैनिक जीवन और सांसारिक गतिविधियों से जुड़ा माना जाता है. वहीं मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इसलिए शव को जमीन पर लिटाना जीवन के एक अध्याय के समाप्त होने और अंतिम विदाई की तैयारी शुरू होने का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, इसे लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की अपनी परंपराएं और मान्यताएं हो सकती हैं.

शव के नीचे क्यों बिछाई जाती है चटाई या सफेद कपड़ा?

कई परिवारों में शव को सीधे जमीन पर रखने के बजाय नीचे चटाई, कुश, दरी या सफेद कपड़ा बिछाया जाता है. इसे सम्मान और शुद्धता से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं का हिस्सा माना जाता है. इसके बाद परिवार के सदस्य मृतक के पास बैठकर प्रार्थना करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं. इस दौरान घर का वातावरण शोक, श्रद्धा और स्मरण से भरा होता है.

Advertisement

धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में मृत्यु संस्कार

हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं में मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों का वर्णन मिलता है. हालांकि अलग-अलग ग्रंथों, क्षेत्रों और समुदायों में इन रीति-रिवाजों के स्वरूप में अंतर हो सकता है. इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि शव को जमीन पर रखने के पीछे केवल एक ही निश्चित कारण है. बल्कि यह परंपरा धार्मिक विश्वासों, स्थानीय रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मान्यताओं का मिश्रण है.

क्या है इस परंपरा का असली संदेश?

मृत्यु के बाद शव को जमीन पर लिटाने की परंपरा को केवल एक रस्म के रूप में नहीं देखा जाता है. इसके पीछे जीवन की नश्वरता, प्रकृति से जुड़ाव और विनम्रता का संदेश भी छिपा माना जाता है. यह परंपरा जीवित लोगों को यह याद दिलाती है कि शरीर नश्वर है और जीवन का वास्तविक मूल्य हमारे कर्मों और व्यवहार में है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement