Dussehra 2026: दशहरे पर हर साल रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतना ज्ञानी और ताकतवर होने के बाद भी रावण का अंत क्यों हुआ? दरअसल, रावण के पास ज्ञान, धन और शक्ति सब कुछ था, लेकिन उसकी कुछ गलतियां उस पर भारी पड़ गईं. उसकी कहानी आज भी बताती है कि इंसान चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अहंकार और गलत फैसले उसे बर्बाद कर सकते हैं. ऐसे में दशहरे के मौके पर आइए जानते हैं रावण की उन 3 गलतियों के बारे में, जिनसे हर इंसान को सीख लेनी चाहिए.
अहंकार
रावण के पास ज्ञान की कमी नहीं थी. वह वेदों का जानकार था. उसके पास अपार शक्ति भी थी. लेकिन अपनी काबिलियत पर जरूरत से ज्यादा घमंड करने लगा था. उसे लगता था कि कोई भी उसका मुकाबला नहीं कर सकता. उसने भगवान श्रीराम को भी साधारण इंसान समझ लिया. यही सोच उसके अंत की वजह बनी.
गलत इरादे
रावण की दूसरी बड़ी भूल माता सीता का हरण करना था. वह छल से उन्हें लंका ले गया और अशोक वाटिका में रखा. माता सीता को वापस लाने के लिए भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध किया. इस युद्ध ने रावण के साथ-साथ उसकी लंका को भी भारी नुकसान पहुंचाया. अगर रावण माता सीता का हरण नहीं करता और अपनी गलती सुधार लेता, तो शायद उसे इस युद्ध का सामना नहीं करना पड़ता.
जिद
रावण की एक बड़ी गलती अपनी जिद पर अड़े रहना भी था. जब युद्ध शुरू होने वाला था, तब भी उसने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया. विभीषण के साथ कई लोगों ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन रावण ने किसी की सलाह नहीं मानी. जिसकी वजह से उसका लंका तबाह हो गया. साथ ही, रावण को अपना परिवार, सेना और राजपाट गंवाना पड़ा. अगर वह समय रहते अपनी जिद छोड़ देता, तो शायद इतना बड़ा नुकसान नहीं होता.
दशहरा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था. इसी खुशी में हर साल विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है. दशहरा हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, अंत में जीत सच्चाई की ही होती है.