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'दुनिया पर भरोसा मत करना', क्यों मंच पर फफक-फफककर रोए बाबा बागेश्वर?

धीरेंद्र शास्त्र ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'लुधियाना वालों! हम तो आज जा रहे हैं. हम तुम्हें क्या देकर जाएं? आप लोग तो वैसे ही ज्ञानी हो. लेकिन आज एक बात हम हाथ जोड़कर कहना चाहते हैं. इस दुनिया पर भरोसा मत करना. यह जगत बड़ा अजीब है. यहां मुर्दों को उठाया जाता है और जिंदा को गिराया जाता है.'

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धीरेंद्र शास्त्री ने मंच पर सुनाई अपने गरीबी के दिनोंं की कहानी. (Photo: Instagram/iambageshwardhamsarkar)
धीरेंद्र शास्त्री ने मंच पर सुनाई अपने गरीबी के दिनोंं की कहानी. (Photo: Instagram/iambageshwardhamsarkar)

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री का एक नया वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में वह मंच पर श्रद्धालुओं के सामने फफक-फफक कर रोते हुए दिखाई दिए. कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भावुक होकर वहां मौजूद लोगों से कहा कि दुनिया पर कभी भरोसा मत करना. इतना कहते ही उनकी आंखों में आंसू भर आए और गला रुंध गया. यह वीडियो बागेश्वर धाम सरकार के ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर भी डाला गया है.

धीरेंद्र शास्त्र ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'लुधियाना वालों! हम तो आज जा रहे हैं. हम तुम्हें क्या देकर जाएं? आप लोग तो वैसे ही ज्ञानी हो. लेकिन आज एक बात हम हाथ जोड़कर कहना चाहते हैं. इस दुनिया पर भरोसा मत करना. यह जगत बड़ा अजीब है. यहां मुर्दों को उठाया जाता है और जिंदा को गिराया जाता है. यहां मरे हुए की पूजा होती है और जिंदा लोगों को कोई पूछता नहीं है.'

जिसके पास पैसा नहीं, उसे कोई नहीं पूछता
बाबा बागेश्वर ने आगे कहा, 'इस दुनिया में गरीब को कोई पूछता नहीं है. आपने देखा! जो बड़े-बड़े अमीर थे, सिर्फ वही मंच पर आ पाए. गरीब आदमी कहां आ पाया. गरीब का इस दुनिया में कौन है?' उन्होंने आगे कहा कि जिसके पास पैसा नहीं होता, उसका कोई नहीं होता. वो तो बस जी रहा है. यहां लुधियाना में अमीर मंच पर फोटो खिंचवाकर चले गए और गरीब भीड़ में ताली बजाता ही रह गया.

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आंखों में आंसू लिए धीरेंद्र शास्त्री आगे बोले, 'हमने अपने जीवन में गरीबी के जो दिन देखे, भगवान करे वो दिन किसी को न देखने पड़े. हमने 15 साल तक भीख मांगी. एक झोपड़ी में रहे. मैं, भाई-बहन और माता-पिता सब एक ही झोपड़ी में रहते थे. उजाले के लिए बल्ब भी नहीं था. कोई कैरोसीन दे देता था तो एक दीपक की एक डिबिया जल जाती थी. जो आदमी आज तुम्हें कथा सुना रहा है. कल गांव में उसकी कोई सुनता नहीं था.'

उन्होंने आगे कहा, 'आज दिन में कितने कुर्ते बदल लिए जाते हैं, लेकिन एक वक्त वो भी था जब एक कुर्ता ढाई-ढाई साल पहने रहते थे. रक्षाबंधन पर मेरी बहन जब राखी बांधती थी तो थाली में मिठाई नहीं होती थी. वो चीनी से हमारा मुंह मीठा कराती थी. गरीबी से बड़ा अभिषाप कुछ नहीं है. भगवान किसी को कुछ भी बना देना, पर गरीब मत बनाना. पर हमारी मां ने हमें एक ही बात सिखाई. इस दुनिया से कभी कुछ मत मांगना. मांगना तो सिर्फ उससे, जिसने ये दुनिया बनाई.'

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