scorecardresearch
 

AI से बनाया अश्लील वीडियो, कनाडाई NRI से मांगे 50 हजार डॉलर, 6.58 करोड़ की ठगी वाला गैंग पकड़ा

गाजियाबाद क्राइम ब्रांच ने इंटरनेशनल सेक्सटॉर्शन और साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल से लोगों को वीडियो कॉल करते और AI से फर्जी अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करते थे. कनाडा के एक NRI से 50 हजार डॉलर मांगे गए. जांच में 6.58 करोड़ की ठगी सामने आई है

Advertisement
X
इंटरनेशनल सेक्सटॉर्शन के आरोप में 4 गिरफ्तार. (Photo: Screengrab)
इंटरनेशनल सेक्सटॉर्शन के आरोप में 4 गिरफ्तार. (Photo: Screengrab)

गाजियाबाद में साइबर अपराधियों ने तकनीक को ठगी और ब्लैकमेलिंग का हथियार बना लिया. क्राइम ब्रांच ने इंटरनेशनल सेक्सटॉर्शन और साइबर फ्रॉड करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे. वीडियो कॉल के दौरान उनकी तस्वीर और वीडियो हासिल करने के बाद AI तकनीक से आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया जाता था. इसके बाद उसे वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगे जाते थे. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेवात, हरियाणा निवासी मो. फैसल और मुजफ्फरनगर के सरवट निवासी मो. अमान त्यागी, मो. हम्माद त्यागी और मो. फैजान मलिक के रूप में हुई है. पुलिस ने इनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, चार अकाउंट किट, पांच सिम कार्ड और 2600 रुपये बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक चारों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं मिला है.

इस पूरे नेटवर्क का खुलासा उस समय हुआ जब कनाडा के ब्रैम्पटन निवासी एक NRI ने गाजियाबाद पुलिस के CUG नंबर पर रात करीब ढाई बजे फोन किया. उसने अपने साथ हुए सेक्सटॉर्शन की शिकायत की. पीड़ित ने पुलिस को बताया कि सोशल मीडिया के जरिए उससे संपर्क किया गया था. इसके बाद वीडियो कॉल की गई. फिर उसकी तस्वीर और वीडियो के आधार पर आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा. आरोपी उससे करीब 50 हजार अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहे थे. रकम नहीं देने पर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी जा रही थी. आरोपियों ने जिस बैंक खाते में रकम भेजने का दबाव बनाया था, वह गाजियाबाद के RDC स्थित एक बैंक शाखा का था. यही बैंक खाता पुलिस के लिए गिरोह तक पहुंचने की पहली अहम कड़ी बना.

Advertisement

'नवप्रीत कौर' के नाम से बनाई फर्जी Facebook ID

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कनाडाई NRI को फंसाने के लिए 'नवप्रीत कौर' के नाम से फर्जी Facebook प्रोफाइल बनाई थी. इसी प्रोफाइल से Messenger के जरिए पीड़ित से संपर्क किया गया. बातचीत के बाद वीडियो कॉल की गई. पुलिस का कहना है कि उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल कर AI तकनीक से फर्जी आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया गया. इसके बाद आरोपी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़ित से बड़ी रकम मांगने लगे. पीड़ित ने जब इस मामले की जानकारी पुलिस को दी तो बैंक खाते की जांच शुरू हुई. इसके बाद पुलिस को इस गिरोह के साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का पता चला.

ACP अमित सक्सेना के मुताबिक बैंक खाते और उससे जुड़े मोबाइल नंबर की जांच के दौरान पुलिस को कई दूसरे खातों के बारे में जानकारी मिली. अब तक करीब 130 बैंक खातों की पहचान हुई है. पुलिस इन सभी खातों की भूमिका और उनमें हुए लेनदेन की जांच कर रही है. NCRP पोर्टल पर जांच के दौरान दिल्ली-NCR समेत देश के अलग-अलग राज्यों से गिरोह के खिलाफ करीब 40 शिकायतें भी सामने आई हैं. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गिरोह के सदस्य दूसरे लोगों से बैंक खाते खरीदते थे. खाता उपलब्ध कराने वालों को करीब 10 से 20 हजार रुपये दिए जाते थे. वीडियो KYC के जरिए खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जाता था. इन खातों की जानकारी एक WhatsApp ग्रुप में साझा की जाती थी. जिस खाते में शिकायतों की संख्या बढ़ने लगती थी, उसका इस्तेमाल बंद कर दिया जाता था. इसके बाद दूसरे बैंक खाते से रकम का लेनदेन शुरू कर दिया जाता था.

Advertisement

पुलिस के मुताबिक गिरोह सिर्फ देश के लोगों तक सीमित नहीं था. आरोपी विदेशों में रहने वाले लोगों को भी निशाना बनाते थे. कनाडाई NRI के मामले में ब्रिटिश कोलंबिया के वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है. फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर पहले सोशल मीडिया पर संपर्क किया जाता था. इसके बाद बातचीत और वीडियो कॉल के जरिए सामने वाले की तस्वीर या वीडियो हासिल किया जाता था. फिर AI तकनीक की मदद से आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर उसे ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था. पुलिस को इस मामले से जुड़े साक्ष्य आरोपियों के मोबाइल फोन से भी मिलने की बात सामने आई है.

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ सेक्सटॉर्शन तक सीमित नहीं था. पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन में शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर ठगी से जुड़े साक्ष्य भी मिले हैं. अब पुलिस यह पता लगा रही है कि आरोपियों ने खरीदे गए बैंक खातों का इस्तेमाल किन-किन तरह के साइबर अपराधों में किया. इन खातों में देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से कितनी रकम पहुंची, इसकी भी जांच की जा रही है. पुलिस के मुताबिक गिरोह वर्ष 2023 से सक्रिय था. अब तक अलग-अलग राज्यों के लोगों से करीब 6 करोड़ 58 लाख रुपये की साइबर ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है. पुलिस बैंक खातों में हुए लेनदेन और अलग-अलग शिकायतों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.

Advertisement

ACP अमित सक्सेना के मुताबिक गिरफ्तार चारों आरोपी पढ़े-लिखे हैं और तकनीक की जानकारी रखते हैं. इनमें कोई ग्रेजुएशन कर रहा है तो कोई ग्रेजुएट है. पुलिस के अनुसार आरोपी जानते थे कि वीडियो कॉल के दौरान किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो हासिल करने के बाद उसमें तकनीकी बदलाव किया जा सकता है. इसी तकनीक का इस्तेमाल कर वह फर्जी आपत्तिजनक वीडियो तैयार करते और फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर लोगों से पैसे मांगते थे.

130 बैंक खातों की जांच, आगे और खुलासे की उम्मीद

गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक अकाउंट और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. करीब 130 बैंक खातों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं और ठगी की रकम कहां-कहां पहुंची. पुलिस के मुताबिक जांच आगे बढ़ने पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है.

ACP अमित सक्सेना ने लोगों को साइबर अपराध से सावधान रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि अनजान व्यक्ति की वीडियो कॉल स्वीकार करने से बचना चाहिए. छोटी सी लापरवाही के बाद तस्वीर या वीडियो का गलत इस्तेमाल कर ब्लैकमेलिंग की जा सकती है. गाजियाबाद में सामने आया यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब केवल फर्जी लिंक या बैंक फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं. सोशल मीडिया, वीडियो कॉल और AI तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को डराने और उनसे पैसे वसूलने की कोशिश भी की जा रही है. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की डिजिटल और बैंकिंग कड़ियों को जोड़ने में जुटी है.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement