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श्री वामन देव जी की आरती (Shri Vaman Aarti)

श्री वामन जी की आरती

श्री वामन देव की आरती का नियमित पाठ और श्रवण करना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, जीवन के संकट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है. आरती से अहंकार कम होने, घर का वातावरण पवित्र रहने और सुख-समृद्धि आने की मान्यता है.

श्री वामन देव जी की आरती
श्री वामन देव जी की आरती

ॐ जय वामन देवा, हरि ॐ जय वामन देवा ।
बलि रजा कें द्वारे…2, सन्त करे सेवा ॥ ॐ जय वामन देवा..

 

वामन रूप अनुपम, छत्र दंड शोभा…2 ।
तिलक भालकी मनोहर भक्तन मन मोहा ॥ ॐ जय वामन देवा..

 

आगम निगम पुराण बतावे, मुख मंडल शोभा…2 ।
करनन कुंडल भूषण, पार पड़े सेवा ॥ ॐ जय वामन देवा..

 

परम कृपाला जाके, भूमी तीन पड़ा…2 ।
तीन पाव है कोई, बलि अभिमान खड़ा ॥ ॐ जय वामन देवा..

 

प्रथम पाद रखे ब्रह्मा, लोक में दुजो धार धरा…2 ।
तृतीय पाद मस्तक पे, बलि अभिमान खड़ा ॥

 

रूप त्रिविक्रम हरे, जो सुखमे गावे…2 ।
सुख सम्पती नाना विध, हरि जीसे पावे ॥ ॐ जय वामन देवा..

-----समाप्त-----

समाप्त

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