राधा अष्टमी के दिन श्री राधा रानी की आरती करने से भक्त को भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और भक्ति प्राप्त होने की मान्यता है. राधा जी की आरती से मन में कृष्ण प्रेम बढ़ता है. इसके साथ ही तनाव और चिंता कम होने तथा मन को शांति और सकारात्मकता मिलने की भी मान्यता है.
आरती राधा जी की कीजै,
कृष्ण संग जो करे निवासा,
कृष्ण करें जिन पर विश्वासा,
आरति वृषभानु लली की कीजै।
कृष्ण चन्द्र की करी सहाई,
मुंह में आनि रूप दिखाई,
उसी शक्ति की आरती कीजै।
नन्द पुत्र से प्रीति बढाई,
जमुना तट पर रास रचाई,
आरती रास रचाई की कीजै।
प्रेम राह जिसने बतलाई,
निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई,
आरती राधा जी की कीजै।
दुनिया की जो रक्षा करती,
भक्तजनों के दुख सब हरती,
आरती दु:ख हरणी की कीजै।
कृष्ण चन्द्र ने प्रेम बढाया,
विपिन बीच में रास रचाया,
आरती कृष्ण प्रिया की कीजै।
दुनिया की जो जननि कहावे,
निज पुत्रों की धीर बंधावे,
आरती जगत मात की कीजै।
निज पुत्रों के काज संवारे,
आरती गायक के कष्ट निवारे,
आरती विश्वमात की कीजै।
आरती राधा जी की कीजै
-----समाप्त-----