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श्री शिरडी साईं बाबा धूप आरती (Shri Shirdi Sai Baba Dhoop Aarti)

श्री शिरडी साईं बाबा धूप आरती

श्री शिरडी साईं बाबा की शाम की धूप आरती श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती करने से मन को शांति मिलती है और तनाव व अशांति दूर होती है. इससे घर का वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है. दिनभर की थकान के बाद आरती ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का माध्यम मानी जाती है.

श्री शिरडी साईं बाबा धूप आरती
श्री शिरडी साईं बाबा धूप आरती

आरती साईबाबा। सौख्यदातार जीवा। चरणरजातली ।
द्यावादासा विसावा, भक्तां विसावा ।। आरती साईबाबा ॥

 

जाळूनियां अनंग । स्वस्वरूपी राहे दंग ।
मुमुक्षुजनां दावी । निज डोळां श्रीरंग । डोळां श्रीरंग ।। आरती साईबाबा ॥१॥

 

जया मनी जैसा भाव । तया तैसा अनुभव ।
दाविसी दयाघना । ऐसी तुझी ही माव ।। आरती साईबाबा ।।२।।

 

तुमचे नाम ध्याता । हरे संसृती व्यथा ।
अगाध तव करणी मार्ग दाविसी अनाथा ।। आरती साईबाबा ॥३॥

 

कलियुगीं अवतार । सगुणब्रह्म साचार ।
अवतीर्ण झालासे ।स्वामी दत्त दिगंबर ।।द०॥आरती साईबाबा ।।४।।

 

आठां दिवसां गुरूवारीं । भक्त करिती वारी ।
प्रभुपद पहावया । भवभय निवारी ।। आरती साईबाबा ॥५॥

 

माझा निजद्रव्यठेवा । तव चरणरजसेवा
मागणें हेंचि आतां । तुम्हां देवाधिदेवा ॥आरती साईबाबा ।।६।।

 

इच्छित दीन चातक । निर्मल तोय निजसुख ।
पाजावें माधवा या । सांभाळ आपुली भाक ।। आरती साईबाबा ।।७।।

 

आरती साईबाबा । सौख्यदातार जीवा । चरणरजातली ।
द्यावादासा विसावा, भक्तां विसावा ।। आ० ।।आरती साईबाबा ॥

 

-------समाप्त-------

समाप्त

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