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शुक्र देव की आरती (Shukra Dev Ki Aarti)

शुक्र देव की आरती

शुक्र देव की आरती और पूजा श्रद्धापूर्वक करने से जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव आने की धार्मिक मान्यता है. इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने, भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ने और वैवाहिक जीवन में प्रेम व मधुरता आने की कामना की जाती है. कुंडली में कमजोर शुक्र के अशुभ प्रभाव भी कम होने की मान्यता है.

शुक्र देव की आरती
शुक्र देव की आरती

आरती लक्ष्मण बालजती की
असुर संहारन प्राणपति की।

 

जगमग ज्योति अवधपुर राजे
शेषाचल पै आप विराजे।

 

घंटा ताल पखावज बाजे
कोटि देव मुनि आरती साजे।

 

किरीट मुकुट कर धनुष विराजे
तीन लोक जाकी शोभा राजे।

 

कंचन थार कपूर सुहाई
आरती करत सुमित्रा माई।

 

आरती कीजे हरी की तैसी
ध्रुव प्रहलाद विभीषण जैसी।

 

प्रेम मगन होय आरती गावै
बसि वैकुण्ठ बहुरि नहीं आवै।

 

भक्ति हेतु हरि ध्यान लगावै
जन घनश्याम परमपद पावै।

 

आरती लक्ष्मण बालजती की
असुर संहारन प्राणपति की।
 

-----समाप्त-----

समाप्त

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