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ऋषि पंचमी आरती (Rishi Panchami Aarti)

ऋषि पंचमी आरती

ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों की पूजा और आरती करने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से अनजाने में हुए पापों और दोषों से मुक्ति मिलती है. साथ ही मन को शांति मिलती है और घर-परिवार में सुख, समृद्धि व खुशहाली बनी रहती है.

ऋषि पंचमी आरती
ऋषि पंचमी आरती

श्री हरि हर गुरु गणपति , सबहु धरि ध्यान।
मुनि मंडल श्रृंगार युक्त, श्री गौतम करहुं बखान।। ॐ जय

 

गौतम त्राता , स्वामी जी गौतम त्राता ।
ऋषिवर पूज्य हमारे ,मुद मंगल दाता।। ॐ जय।।

 

द्विज कुल कमल दिवाकर , परम् न्याय कारी।
जग कल्याण करन हित, न्याय रच्यौ भारी।। ॐ जय।।

 

पिप्लाद सूत शिष्य आपके, सब आदर्श भये।
वेद शास्त्र दर्शन में, पूर्ण कुशल हुए।।ॐ जय।।

 

गुर्जर करण नरेश विनय पर तुम पुष्कर आये ।
सभी शिष्य सुतगण को, अपने संग लाये।।ॐ जय।।

 

अनावृष्टि के कारण संकट आन पड्यो ।
भगवान आप दया करी, सबको कष्ट हरयो।।ॐ जय।।

 

पुत्र प्राप्ति हेतु , भूप के यज्ञ कियो।
यज्ञ देव के आशीष से , सुत को जन्म भयो।।ॐ जय।।

 

भूप मनोरथ पूर्ण करके , चिंता दूर करी।
प्रेतराज पामर की , निर्मल देह करी।।ॐ जय।।

 

ऋषिवर अक्षपाद की आरती ,जो कोई नर गावे।
ऋषि की पूर्ण कृपा से , मनोवांछित फल पावे ।।ॐ जय।।

 

-----समाप्त-----

समाप्त

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