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सांवलिया सेठ को धनतेरस पर 460 Kg लकड़ी और 23 Kg चांदी से बने रथ और पालकी भेंट, दो भक्तों ने गुप्त रखा अपना नाम

Sanwariya Seth Temple: दोनों भक्तों ने अपना नाम गुप्त रखा. दोनों ने ही यह रथ और पालकी सुमेरपुर के एक सुनार से बनवाया. सुनार यह रथ अपने साथ लेकर श्री सांवलियाजी मंदिर पहुंचा. 

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चांदी जड़े रथ और पालकी का गुप्ता दान.
चांदी जड़े रथ और पालकी का गुप्ता दान.

राजस्थान के मेवाड़ के प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित श्री सांवलिया सेठ को 2 अलग-अलग भक्तों ने मिलकर धनतेरस के दिन पालकी और रथ भेंट किए. इसमें चांदी का वर्क किया गया है. रथ और पालकी की तौल करने पर कुल वजन 460 किलो निकला. इसमें 23 किलो चांदी का वर्क भी शामिल है. 

जानकारी मिली कि दोनों ही भक्त गुजरात से आए थे. उन्होंने धनतेरस के शुभ अवसर पर ठाकुर जी को पालकी और रथ भेंट किए. चित्तौड़गढ़ में मंडफिया स्थित श्री सांवलियाजी में भक्तों की ओर से चढ़ावा चढ़ाया जाता है. 

गुजरात के दो भक्त श्री सांवलिया जी पहुंचे, जहां उन्होंने रथ और पालकी बनवाए जाने की जानकारी दी. दोनों भक्तों ने अपना नाम गुप्त रखा. दोनों ने ही यह रथ और पालकी सुमेरपुर के एक सुनार से बनवाया. सुनार यह रथ अपने साथ लेकर श्री सांवलियाजी मंदिर पहुंचा. 

यहां मंदिर मंडल के सदस्यों ने सुनार का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया. रथ लकड़ी की बनी हुई है, जिसमें चांदी का वर्क किया हुआ है. रथ का लकड़ी समेत वजन 380 किलो है, जिसमें 8 किलो चांदी शामिल है. वहीं, पालकी के 80 किलो में लकड़ी समेत 15 किलो चांदी लगी हुई है. 

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