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पद से परे दिखा भाई-बहन का रिश्ता, रक्षाबंधन पर ओम बिरला की कलाई पर सजी राखियां

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कोटा में भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता देखने को मिली. कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र की बड़ी संख्या में ‘लाड़ली बहनें’ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय पहुंचीं और उनकी कलाई पर राखी बांधी. वीरांगना मधुबाला समेत कई महिलाओं ने बिरला को रक्षा-सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की.

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राखी बंधवाते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला. (Photo: ITG)
राखी बंधवाते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला. (Photo: ITG)

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कोटा में भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता, स्नेह और अपनापन एक खास अंदाज में देखने को मिला. कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र की बड़ी संख्या में ‘लाड़ली बहनें’ अपने भाई और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय पहुंचीं. किसी के हाथ में राखी थी तो किसी के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी. बहनों ने बिरला की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मनाया और भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को और मजबूत किया.

दिनभर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यालय में रक्षाबंधन की रौनक बनी रही. कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से महिलाएं और ‘लाड़ली बहनें’ अपने भाई से मिलने पहुंचीं. बहनों ने पारंपरिक भावनाओं के साथ बिरला की कलाई पर राखी बांधी और उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की. इस दौरान कार्यालय का माहौल किसी परिवार के घर जैसा नजर आया, जहां बहनों का स्नेह और भाई के प्रति उनका विश्वास साफ दिखाई दे रहा था.

राखी बांधने के बाद बहनों ने ओम बिरला के लिए मांगी दुआएं. (Photo: ITG)

रक्षाबंधन के इस विशेष अवसर पर वीरांगना मधुबाला ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को रक्षा-सूत्र बांधा. इसके अलावा शहर की अनेक महिलाओं और पारिवारिक सदस्यों ने भी बिरला की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं. हर राखी के साथ स्नेह की एक अलग कहानी थी और हर बहन के चेहरे पर अपने भाई के प्रति विश्वास और आत्मीयता नजर आई.

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राखी बंधवाने के बाद ओम बिरला ने कही ये बात
इस मौके पर ओम बिरला ने कहा कि उनकी कलाई पर बंधी प्रत्येक राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का बंधन है. बहनों का यह प्रेम उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि बहनों के सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहना और उनके सम्मान, स्वाभिमान तथा सुरक्षित भविष्य के लिए निरंतर प्रयास करना उनका दायित्व है.

बिरला ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन का रिश्ता केवल एक पारिवारिक संबंध नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी की मजबूत डोर से जुड़ा रिश्ता है. रक्षाबंधन इसी भावना को और गहरा करता है. बहन जब भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधती है तो उसके पीछे केवल रक्षा की कामना नहीं होती, बल्कि जीवनभर एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का भाव भी जुड़ा होता है.

उन्होंने कहा कि हमारी बहनें परिवार की आधारशिला होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य का परिचय दे रही हैं. ऐसे में समाज का दायित्व है कि हर बेटी और बहन को सम्मान, अवसर और सुरक्षित वातावरण मिले, ताकि वह अपने सपनों को पूरा कर सके और आत्मनिर्भर बनकर आगे बढ़े. 

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ओम बिरला को राखी बांधने आईं थीं कोटा-बूंदी क्षेत्र की महिलाएं. (Photo: ITG)

कोटा में रक्षाबंधन का यह दृश्य रिश्तों की उस खूबसूरती को भी सामने लाया, जहां पद और राजनीतिक पहचान से कहीं ऊपर भाई-बहन का रिश्ता दिखाई दिया. लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में पहुंची बहनों ने उन्हें राखी बांधी तो बिरला ने भी हर बहन के स्नेह को आत्मीयता से स्वीकार किया. इस दौरान कई बहनों के लिए यह केवल राखी बांधने का अवसर नहीं, बल्कि अपने भाई से मिलने, अपनी बात साझा करने और रिश्ते की डोर को महसूस करने का खास पल था.

रक्षाबंधन के मौके पर कोटा-बूंदी की इन ‘लाड़ली बहनों’ और ओम बिरला के बीच दिखाई दिया यह अपनापन पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा. राखियों से सजी कलाई और बहनों के चेहरे की मुस्कान ने पर्व की खुशियों को और बढ़ा दिया. माहौल में भाई के प्रति बहनों का स्नेह था तो बहनों के प्रति भाई का सम्मान और जिम्मेदारी का भाव भी साफ नजर आया.

ओम बिरला ने भी सभी बहनों को दी शुभकामनाएं
ओम बिरला ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर से कामना की कि हर बहन का जीवन खुशियों, सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से भरा रहे. उनकी आंखों में सजे हर सपने को उड़ान मिले और जीवन में सफलता की नई राहें खुलें. उन्होंने कहा कि बहनों का प्रेम और विश्वास उनके लिए हमेशा प्रेरणा और आशीर्वाद रहेगा.

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रक्षाबंधन के इस अवसर पर कोटा में देखने को मिला यह दृश्य इस बात की खूबसूरत मिसाल रहा कि रिश्ते पद या पहचान से नहीं, बल्कि विश्वास और अपनत्व से मजबूत होते हैं. एक साधारण-सी राखी की डोर ने भाई-बहन के बीच स्नेह, सम्मान और जिम्मेदारी के उस रिश्ते को फिर से जीवंत कर दिया, जिसकी मिठास भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है.

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