scorecardresearch
 

LPU, चितकारा और चस्का अफवाहों का

पंजाब की चितकारा यूनिवर्सिटी और LPU में फैली हिंसा की वजह व्हाट्सएप पर शेयर होने वाली अफवाहें थीं. इसके अलावा छात्रों ने CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शनों से माफी पाने का जो तरीका सीखा है, वह भी सामने आया है.

Advertisement
X
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद LPU में मिड-टर्म परीक्षाएं अगले आदेश तक टाली गई (Photo: ITG)
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद LPU में मिड-टर्म परीक्षाएं अगले आदेश तक टाली गई (Photo: ITG)

पंजाब में दो कैंपस जल रहे हैं. रोष है अन्याय के खिलाफ. पीड़ित मिला नहीं. न परिवार सामने आए इंसाफ मांगने. कोई रूममेट कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं. बस व्हाट्सऐप फॉरवर्ड और इंस्टाग्राम रील्स. रेप, आत्महत्या, और ऊपर से एक भूत. छात्रों में गुस्सा है, ये सच है. गुस्सा किस बात पर है, यह दूसरी बात है. और इन दिनों ये जानना भी किसे है?

छात्र सही हैं, बेशक. वे युवा हैं, राष्ट्र का भविष्य हैं, और भविष्य गलत नहीं हो सकता क्योंकि वह अभी आया ही नहीं. तथ्यों की किसको पड़ी है. कुछ जलाने से पहले एफआईआर का इंतजार कौन करे. अगर रील्स कहें कि एक लड़की मर गई, तो लड़की मर गई. पुलिस कहे कि नहीं मरी, तो पुलिस मिली हुई है जी. प्रशासन कहे कि ऐसी कोई बात हुई ही नहीं, तो वह सत्ता से डर रहा है. सिर्फ युवा ही निडर हैं. अगर लड़की अगली सुबह क्लास में आ जाए, तो वह भूत है.

चितकारा यूनिवर्सिटी पटियाला जिले के राजपुरा के पास है, जिसे ब्रोशर में ‘चंडीगढ़ के पास’ कहा जाता है. दहशत 25 तारीख की रात शुरू नहीं हुई. दो दिन पहले शुरू हुई, जब हॉस्टल की कुछ लड़कियों ने स्पीकर से हॉरर साउंड चलाकर एक मजाक किया. 23-24 सितंबर की रात एक एंबुलेंस आई. यूनिवर्सिटी ने बाद में कहा कि वह करीब 2.50 बजे अस्पताल से एक छात्रा को वापस लाई थी. 25 की दोपहर लड़कियों के हॉस्टल में एक प्रीस्ट आया. वह अपनी बेटी से मिलने आया था. रात तक ये दोनों फैक्ट मिलकर दो मृत लड़कियां बन गए, फिर दो लापता लड़कियां, फिर उनमें से एक गलियारों में घूमता भूत, दावा किया गया कि इसका वीडियो भी है. खिड़कियों के शीशे तोड़े गए. पुलिस की दो गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं. चौबीस घंटे से कम में अफवाह एक पैरानॉर्मल स्पेशल बन गई.

Advertisement

फैक्ट्स जब आए, तो उनकी सुस्ती देखने लायक थी. राजपुरा सिविल अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ शरणप्रीत गोराया ने कहा कि किसी यूनिवर्सिटी छात्रा का पोस्टमार्टम नहीं हुआ. डीएसपी सुखदेव सिंह से, जिन्हें एक भूत का बयान लेने की जिम्मेदारी मिली, उन्होंने कहा कि कोई बता ही नहीं पा रहा कि आखिर लापता कौन है. ये कैसी बात हुई. अगर पीड़िता लापता है, तो नाम कैसे देगी? यूनिवर्सिटी ने 5 अक्टूबर तक छुट्टी घोषित कर दी. पुलिस ने कहा कि छात्रों पर केस करने के बजाय उन्हें काउंसलिंग देगी.

एक दिन बाद लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, फगवाड़ा की बारी आई. इस बार दावा यह था कि गर्ल्स हॉस्टल 3, कमरा नंबर 504 की एक लड़की के साथ 23-24 सितंबर के आसपास किसी बाहरी व्यक्ति (प्लंबर, पेंटर, इलेक्ट्रिशियन या मजदूर या ये सभी) ने गैंगरेप किया, वार्डन ने उसे घर भेज दिया, और बाद में उसने आत्महत्या कर ली. लड़कियों के हॉस्टल से ये मैसेज लड़कों तक पहुंचे. शनिवार रात बॉयज़ हॉस्टल से कार्रवाई शुरू हुई. रविवार सुबह से नेशनल हाईवे-44 जाम कर दिया गया. सेना द्वारा डोनेशन में मिले मिग-23 और बैटल टैंक पर छात्र चढ़े, और कई गाड़ियां जला दीं.

तीन दिन बाद हमें नहीं पता कि कोई रेप या कोई मौत हुई या नहीं. कोई परिजन या दोस्त इंसाफ मांगने आगे नहीं आया. यूनिवर्सिटी ने दावों को झूठा, आधारहीन बताया. कमरा नंबर 504 की तीन लड़कियों का वीडियो जारी किया गया, जिसमें वे कहती पाई गईं कि ऐसी कोई बात नहीं हुई. वीडियो बाद में स्क्रिप्टेड कह दिया गया.

Advertisement

पुलिस ने कहा कि पीड़िता की कोई शिकायत नहीं मिली और कोई सबूत नहीं मिला. बाद में उन्होंने उन छात्रों के बयान पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जो खुद पीड़िता को नहीं जानते थे, और एक विशेष जांच टीम बनाई जिसमें छात्र प्रतिनिधि भी हैं. यह जांच कि जांच करने लायक कुछ है भी या नहीं. काफ्का कपूरथला से अपना तबादला मांग लेते, अगर आदमी इतनी तेजी से तिलचट्टे बन रहे होते.

अफवाह दर अफवाह, और फिर राजनीति उसे और बदतर कर रही है. असत्यापित त्रासदी, सत्यापित तमाशा. LPU के फाउंडर-वाइस चांसलर अशोक मित्तल AAP के राज्यसभा सांसद थे, जिन्होंने ED की विजिट के बाद अपना भविष्य भाजपा में देखा. तो अब AAP से भाजपा में गए सांसद के कैंपस में AAP-शासित राज्य में आग लगी हुई है. भाजपा के रवनीत बिट्टू कहते हैं कि यह 30 सितंबर को जालंधर में अमित शाह की नशा-विरोधी रैली को बिगाड़ने की AAP की साजिश है. कांग्रेस के राजा वड़िंग कहते हैं कि यह AAP की कानून-व्यवस्था की नाकामी है. AAP कहती है कि यह कांग्रेस की साजिश है. सब किसी न किसी की बी टीम या सी टीम है. और ए टीम, पंजाब पुलिस, कहती है कि हाईवे खाली करने के लिए उसने मामूली बल प्रयोग ही किया. मेरी याददाश्त में ये पहली बार है, जब उन्होंने कुछ न करने का क्रेडिट लिया.

Advertisement

हर पार्टी ने दूसरी पार्टी में दोषी खोज लिया. किसी पार्टी ने दोनों मामलों में पीड़ित नहीं खोजा. अफवाहों को हालांकि त्रिपक्षीय समर्थन मिला है. कोई छात्रों से यह कहने की हिम्मत नहीं करता कि शायद वे गलत हों. समझ लीजिये छात्र सही हैं, समझिए, तब भी जब वे बता न सकें कि किस मामले में.

अफवाह आसमान से नहीं गिरती. LPU ने असली घटनाओं को दफनाया है. तेलंगाना की बी.टेक एग्रीकल्चर की 21 वर्षीय छात्रा लक्ष्मी चंद्रा 10 सितंबर को कैंपस में गर्ल्स हॉस्टल की सातवीं मंजिल से गिरकर मरीं. 2022 और 2024 में भी मौतें हुईं. हर बार विरोध हुआ. हर बार रफा-दफा किया गया. इन मामलों की जांच के परिणाम या मौत की वजह छात्रों से साझा नहीं की गई. इन सदमों के बाद विशेष काउंसलिंग सत्र होने चाहिए थे, लेकिन सब चंगा सी का चोंगा ओढ़े रहा विश्वविद्यालय प्रशासन.

1947 में गॉर्डन ऑलपोर्ट और लियो पोस्टमैन ने एक फॉर्मूला दिया था- किसी अफवाह में कितनी ताकत है, यह जानने के लिए उसके प्रति कौतूहल की तीव्रता में उसकी अस्पष्टता का गुणा करके देख लीजिये. कैंपस में सेफ्टी महत्वपूर्ण है. जब विश्वविद्यालय प्रशासन हर मौत को पब्लिक रिलेशन की समस्या मानता है, तो हर कम्युनिकेशन से अस्पष्टता बढ़ाती है. जो विश्वविद्यालय असली त्रासदियों का जवाब चुप्पी से देते हैं, उन्हें हैरान नहीं होना चाहिए जब चुप्पी का जवाब काल्पनिक कथाओं से मिले. चुप रहोगे, तो रिक्त स्थान को अफवाहें भर देंगी.

Advertisement

बाकी जवाब साइंस के पास है. 2018 में MIT के सोरूश वसूघी, देब रॉय और सिनान अरल ने साइंस में अपनी तरह की सबसे बड़ी स्टडी पब्लिश की. उन्होंने 11 वर्षों तक ट्विटर पर करीब 30 लाख लोगों द्वारा साझा की गई करीब 1,26,000 स्टोरीज़ को ट्रैक किया. सत्य के मुकाबले झूठ के रीट्वीट होने की संभावना 70 प्रतिशत अधिक पाई गई. और 1,500 लोगों तक लगभग छह गुना तेजी से पहुंचा. दोषी कोई बॉट नहीं थे. हम थे. झूठी खबर इसलिए फैलती है क्योंकि वह नई होती है, और नवीनता में एक अलग ही आनंद होता है. हॉस्टल में लड़की की मौत खबर है. एम्बुलेंस में स्वस्थ लड़की का होना खबर नहीं है. चितकारा में सच सबसे साधारण कारण से हारा. सच उबाऊ था, और कोई उबाऊ चीज फॉरवर्ड नहीं होती.

भारत को यह सिखाने के लिए MIT की जरूरत नहीं थी. 21 सितंबर 1995 को देश भर में भगवान गणेश दूध पीने लगे. वह कैपलरी एक्शन और सरफेस टेंशन था, वही फिजिक्स जिससे कुल्हड़ आपकी थोड़ी-सी चाय पी जाता है. मार्च 2012 में विले पार्ले के एक चर्च में सूली पर लटके यीशु रोने लगे. तर्कवादी सनल एडमरुकु ने आंसुओं का स्रोत जाम पड़ी नाली और केपिलरी एक्शन में खोजा. चमत्कार सुलझाने के लिए उन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस चला. एडमरुकु अब फिनलैंड में रहते हैं क्योंकि भारत में कानूनी प्रक्रिया ही सजा है. दिल्ली का 2001 का मंकी मैन, पूर्वी यूपी का 2002 का मुंहनोचवा, और 2017 में हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली की महिलाओं की चोटी काटने वाला चोटी-कटवा जिसे कभी पकड़ा नहीं गया.

Advertisement

2018 में किडनी के लिए बच्चों का अपहरण करने वाले गिरोहों की व्हाट्सऐप अफवाहें देश में दौड़ीं. उस साल 1 जुलाई को महाराष्ट्र के धुले में भीड़ ने पांच लोगों की हत्या कर दी. जून में नीलोत्पल दास और अभिजीत नाथ, एक ऑडियो इंजीनियर और एक डिजिटल आर्टिस्ट, असम के कार्बी आंगलोंग के एक गांव में रास्ता पूछने रुके और बच्चे चुराने वाले समझकर पीट-पीटकर मार दिए गए. त्रिपुरा में प्रशासन द्वारा इन्हीं अफवाहों के खिलाफ लाउडस्पीकर से चेतावनी देने भेजे गए व्यक्ति को उसी अफवाह पर यकीन करने वाली भीड़ ने मार दिया.

2020 के कोविड लॉकडाउन में दो साधु महाराष्ट्र के पालघर के पास उस इलाके में भटक गए जहां बच्चे चुराने वाले गिरोहों की अफवाहें फैली थीं. दोनों पकड़े गए, पुलिस के हवाले किए गए, लेकिन भीड़ उन्हें थाने से निकालकर लिंच कर बैठी.

मैं झारखंड से आता हूं, जहां मॉब-लिंचिंग को सेंदरा कहते हैं. बच्चों के अपहरण की अफवाहों ने एक बार मुझे भी रास्ता बदलने पर मजबूर किया क्योंकि मैं एसयूवी चला रहा था और अफवाह यह थी कि गिरोह एसयूवी में बच्चों को उठाते हैं. अगले वर्ष लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के लिए शकुंतला बनाजी और राम भट्ट के अध्ययन में पाया गया कि फॉरवर्डेड मैसेज शायद ही किसी का चरित्र बदल सकता है. बल्कि वह कन्फर्म ही करता है. अफवाह आपके दबे हुए पूर्वाग्रह को हथियार दे देती है. और कानून शायद ही हथियार पकड़ने वालों को सजा देता है, ख़ास कर तब जब वह समूह हो.

Advertisement

यही बारूद का ढेर है. 2026 को जो बात अलग बनाती है वह यह कि उसके पास कितना बारूद जमा है. कॉकरोच जनता पार्टी 16 मई को ऑनलाइन मजाक के रूप में शुरू हुई, जब मुख्य न्यायाधीश ने कुछ याचिका-प्रेमी युवा वकीलों को ‘कॉकरोच’ कहा. 25 जुलाई तक वह संसद पर मार्च कर चुकी थी और एक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले चुकी थी. यह असली उपलब्धि है और इसका सम्मान है. लेकिन आंदोलन सबक छोड़ जाते हैं. कुछ अच्छे और कुछ बुरे.

जब जंतर मंतर पर एक 15 वर्षीया ने प्रधानमंत्री को गालियां दी, तो प्रधानमंत्री ने खुद सजा नहीं, उसके लिए मार्गदर्शन मांगा. उदारता. सरकार ने फिर सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि संसद मार्च की एफआईआर पर वह आगे कार्रवाई नहीं करेगी, और अदालत ने कई राज्यों में उन्हें रद्द कर दिया. महा उदारता. ये बातें हर कैंपस पर मिसाल के तौर पर नोट की गईं.

LPU में डिमांड लिस्ट में में यह आश्वासन भी मांगा गया कि प्रोटेस्ट के लिए किसी पर कार्रवाई नहीं होगी. मांग स्वीकार भी कर ली गई. पहले से तय माफी के साथ आगजनी हुई. हमारे छात्र संघ ट्रेड यूनियन कब बन गए? और राष्ट्र के भविष्य को एक छोटी सी जुनूनी होली से हम कौन हैं जो वंचित रखें? हम भी तो जवान थे. अब युवाओं ने सीख लिया कि गुस्से का सम्मान है, और कानूनी पचड़े से छूट भी मिलेगी. दंड का डर नहीं. पार्टियों ने सीख लिया कि छात्रों की भीड़ एक रैली है जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती. छात्र हमेशा से राजनीति का सस्ता चारा रहे हैं. रील्स देख खुद को कट्टर बना चुके छात्र तो और भी सस्ते पड़ते हैं.

हमारे कैंपस अब फ्रैंचाइजी मैदान बन सकते हैं. कल कोलकाता के सत्यजित रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट में छात्रों का आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत से ऑडिटोरियम में बुक किए गए एक वर्कशॉप पर टकराव हुआ. पथराव हुआ, बैनर फटे, करीब 30 छात्र और दो शिक्षक घायल हुए. तीन एफआईआर हुईं और हर पक्ष पहले से निश्चित कि दूसरा गणतंत्र का दुश्मन है. रे, जो ज्यादातर चीजें पहले देख लेते थे, ने 1989 में गणशत्रु बनाई थी. एक डॉक्टर जो पाता है कि शहर के मंदिर का पवित्र जल लोगों को जहर दे रहा है, और यह कहने पर जनता का दुश्मन घोषित हो जाता है. सनल एडमरुकु मुख्य भूमिका निभा सकते थे.

IIT बॉम्बे में दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े 18 सितंबर को परीक्षा में फोन इस्तेमाल करते पकड़े जाने के कुछ घंटे बाद हॉस्टल में मृत पाए गए. उनके माता-पिता जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हैं और आजाद मैदान पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. एक खेमा इसे पहले ही संस्थागत हत्या का फैसला सुना चुका है. दूसरा उसका उल्टा फैसला. दोनों ने जांच से पहले फैसला कर लिया. मुंबई का इकलौता पक्ष है मुंबई क्राइम ब्रांच, जिसके पास निष्कर्ष नहीं है. शोक में डूबे परिवार को धैर्य और जवाब चाहिए. उसे पक्षपात और उकसावा दिया जा रहा है.

सब जोड़िए. एक पीढ़ी जिसने अभी सीखा है कि उसका गुस्सा एक ताकतवर मंत्री को ढेर कर सकता है. तोड़फोड़ करने वालों ने सीख लिया है कि एफआईआर रद्द हो जाएंगी. पार्टियां जिन्होंने सीख लिया कि गुस्सा घंटे के हिसाब से किराए पर लिया जा सकता है. और हर जेब में एक फोन जो थ्रिलर को सच्चाई के मुकाबले छह गुना ज्यादा तेजी से बढ़ावा देता है. सब मिलकर एक बारूद का ढेर बनाते हैं. इसके लिए किसी साजिश की जरूरत नहीं है. एक माचिस चाहिए, और भारत में माचिस की कभी कमी नहीं रही. लेकिन आपको और हमें चिंता क्यों? छात्र सही हैं. तथ्य और सत्य उनसे कदम मिलाकर चल नहीं पा रहे हैं.

अफवाहें गरम हैं. अफवाह हम हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement