कहते हैं कि सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती है. 63 साल की उम्र में सुशीला देवी ने 10वीं की परीक्षा पास कर अपने अधूरे सपने को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया. हरियाणा की सुशीला देवी अब गांव की सरपंच बनने का सपना देख रही हैं. उन्होंने 79.6 फीसदी अंकों के साथ 10वीं की परीक्षा पास की है. लेकिन क्या सरपंच बनने के लिए 10वीं पास होना जरूरी है? और क्या इस पद के लिए उम्र की कोई अधिकतम सीमा भी तय है?
दरअसल, सरपंच बनने के नियम पूरे देश में एक जैसे नहीं हैं. संविधान के मुताबिक, पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 21 साल होनी चाहिए, जबकि शैक्षणिक योग्यता और दूसरी पात्रता संबंधी शर्तें संबंधित राज्य के कानूनों पर निर्भर करती हैं. लेकिन चलिए जानते हैं कि आखिर सरपंच बनने के लिए क्या उम्र सीमा होती है?
सरपंच बनने के लिए न्यूनतम उम्र कितनी होनी चाहिए?
ग्राम पंचायत के सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र आमतौर पर 21 साल होती है. हालांकि, यह पंचायत चुनाव राज्य का विषय है, इसलिए उम्मीदवार की योग्यता और अयोग्यता से जुड़े नियम अलग-अलग राज्यों के कानूनों के अनुसार तय होते हैं. उस राज्य के नियम जो कहते हैं, उस हिसाब से काम करना चाहिए.
क्या-क्या योग्यताएं जरूरी हैं?
सवाल ये भी खड़ा होता है कि क्या सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार के पास कोई विशेष योग्यता भी होनी चाहिए? संबंधित राज्य के पंचायती राज कानून और चुनाव नियमों में तय शर्तें पूरी करना होता है-
उम्मीदवारों की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए.
उम्मीदवार का नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में होना जरूरी हो सकता है.
आरक्षण, अयोग्यता और दूसरी पात्रता संबंधी शर्तें राज्य के नियमों के अनुसार लागू होती हैं.
कुछ राज्यों में पद के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तें भी हो सकती हैं. इसलिए इसे पूरे देश में एक जैसा नहीं माना जा सकता.
क्या हर राज्य में नियम एक जैसे हैं?
नहीं. पंचायत चुनावों से जुड़े नियम राज्य के कानूनों के अनुसार तय होते हैं. उदाहरण के लिए, हरियाणा में सरपंच पद के चुनाव के लिए हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 और उससे जुड़े नियम लागू होते हैं. इसलिए चुनाव लड़ने से पहले अपने राज्य के निर्वाचन आयोग की अधिसूचना और संबंधित कानून को देखना जरूरी है.