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वामपंथ का अंतिम किला भी ढहा? केरलम में लेफ्ट की हार क्या कह रही है

केरलम विधानसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल में सत्ता परिवर्तन के संकेत सामने आए हैं. एग्जिट पोल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन UDF को सत्ता की तरफ बढ़ते देखा जा रहा है - केरलम में पी. विजयन लेफ्ट का किला बचाए हुए हैं, लेकिन अब हाथ से फिसलता लग रहा है.

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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन. (Photo: PTI)
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन. (Photo: PTI)

केरलम को लेकर Exit Poll में जो संकेत मिल रहा है, आशंका भी करीब करीब वैसी ही जताई जा रही थी. पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में सिर्फ पिनाराई विजयन ही ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनकी सत्ता में वापसी को लेकर लोगों को पक्का यकीन नहीं हो रहा था. 

एग्जिट पोल में अच्छे संकेत तो ममता बनर्जी के लिए भी नहीं मिल रहे हैं, लेकिन बात यह भी है कि एग्जिट पोल गलत भी तो साबित हो सकते हैं. ये सब मालूम तो तभी होगा जब 4 मई को वोटों की गिनती के बाद नतीजे सामने आएंगे. 

असम में हिमंता बिस्वा सरमा और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के लिए तो दूसरी पारी अब होगी, अगर एग्जिट पोल के नतीजे सही साबित हुए, लेकिन पिनाराई विजयन तो परंपरा को तोड़ते हुए 2021 में ही सत्ता में वापसी कर ली थी - नई जंग तो तीसरी पारी के लिए लड़ रहे हैं. 

एग्जिट पोल में क्या है?

Axis My India के एग्जिट पोल में विपक्षी गठबंधन UDF की सत्ता में वापसी का अनुमान लगाया गया है. LDF को बहुमत के आंकड़े से पीछे माना जा रहा है. पहले ऐसा हर पांचवें साल हो जाता था, लेकिन इस बार सत्ता में बदलाव 10 साल बाद होने का इशारा हुआ है. 

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LDF, असल में, कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन है. राहुल गांधी 2021 के विधानसभा चुनाव में भी केरलम में खासे एक्टिव थे, और इस बार भी. कांग्रेस के लिहाज से तो लगा जैसे पांच राज्य नहीं बल्कि सिर्फ केरलम में ही विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं. 

कहने को तो राहुल गांधी तमिलनाडु में भी समय दे रहे थे, लेकिन पूरा जोर केरलम पर ही देखने को मिला. 2019 में अमेठी की हार का दर्द वायनाड ने ही कम किया था, और तभी से राहुल गांधी केरलम पर फोकस हो गए थे. राहुल गांधी के वायनाड छोड़ देने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा उपचुनाव जीतकर संसद पहुंची हैं, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने उनकी इलेक्शन ड्यूटी असम में लगा दी - वरना, केरलम में LDF के आने वाले अच्छे दिनों का थोड़ा श्रेय उनको भी मिलता ही. 

Axis My India के एग्जिट पोल के मुताबिक, केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन UDF को 78 से 90 विधानसभा सीटें मिलने का अनुमान है. एग्जिट पोल में LDF के हिस्से में 49 से 62 विधानसभा सीटें ही आने का अंदाजा है. NDA को भी केरल में 0-3 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. 

2021 में Axis My India के एग्जिट पोल में एलडीएफ को 104 से 120 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी, जबकि UDF के लिए 20 से 36 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था. नतीजे आए तो एलडीएफ को 99 और यूडीएफ को 41 सीटें मिली थीं.  

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अगर पिछले एग्जिट पोल के हिसाब से देखा जाए, तो 4 मई को आने वाले रिजल्ट में कोई खास फर्क नहीं होना चाहिए. लेकिन, इस बात की गारंटी भी तो नहीं है. नतीजे अलग भी हो सकते हैं. 

LDF या विजयन, लोगों ने किसे चुना?

यह भी विडंबना ही है कि मुख्यमंत्री के रूप में पिनाराई विजयन ही अब भी सबसे पसंदीदा चेहरा बने हुए हैं. केरलम के 33 फीसदी लोगों को पिनाराई विजयन ही ज्यादा पसंद आ रहे हैं. यूडीएफ के सत्ता में लौटने का संकेत जरूर मिल रहा है, लेकिन गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा कांग्रेस नेता वीडी सतीशन को पसंद करने वाले 21 फीसदी ही पाए गए हैं. 

इस लिहाज से देखें तो गठबंधन के रूप में LDF भले ही पिछड़ता नजर आ रहा हो, लेकिन व्यक्तिगत लोकप्रियता के मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन आज की तारीख में भी केरलम में सबसे बड़े नेता बने हुए हैं. सर्वे में पिनाराई विजयन का वीडी सतीशन से आगे होना तो एग्जिट पोल में विरोधाभास का ही संकेत दे रहा है.

क्या केरलम के लोगों को 80 साल के पिनाराई विजयन से नहीं, बल्कि लोगों को लेफ्ट सरकार के कामकाज से कोई दिक्कत है? या फिर, पिनाराई विजयन को खुद से ज्यादा विधायकों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है?

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सर्वे से मालूम हुआ है कि केरलम के 26 फीसदी लोग बदलाव चाहते हैं, और इसी के चलते पिनाराई विजयन को कोई कीमत चुकानी पड़ रही है. 

सत्ता की राजनीति में लेफ्ट कहां जा रहा है

1. पश्चिम बंगाल में अगर ममता बनर्जी सत्ता में वापसी नहीं कर पातीं, तो भी लेफ्ट के लिए किसी तरह की संभावना नहीं बन रही है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अगर चूक जाती हैं, तो भारतीय जनता पार्टी सत्ता संभालने के लिए तैयार है. आने वाले दिनों में भी कोई संभावना लगे, ऐसा आधार नजर नहीं आ रहा है. 

2. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने 2011 में भी लेफ्ट को सत्ता से बेदखल कर दिया था, और 2018 में बीजेपी ने त्रिपुरा से - ऐसे में केरल ही एक छोर से सत्ता की राजनीति में लेफ्ट का वजूद बनाए हुए था. अब अगर 2026 में केरल में भी लेफ्ट के हाथ से सत्ता फिसल जाती है, तो पांच साल बाद क्या हाल होगा, अभी समझ पाना मुश्किल है. 

3. पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में तो काडर भी लेफ्ट का साथ छोड़ कर चला गया है. पश्चिम बंगाल में तो तृणमूल कांग्रेस का काडर लेफ्ट से ही ज्यादा आया है, कांग्रेस से भी मिला है, लेकिन उसके मुकाबले कम ही लगता है. 

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4. केरलम में बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद नंबर 1 और 2 की लड़ाई कांग्रेस और लेफ्ट के बीच ही है, जबकि बंगाल और त्रिपुरा में लेफ्ट पहले ही सीन से बाहर हो गया है. 

5. लेफ्ट की विरासत के नाम पर तो अब आइडियोलॉजी ही बची लग रही है. आइडियोलॉजी भले कायम रहे, लेकिन चुनावी प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए लेफ्ट के पास केरलम ही है, उसके लिए आगे का एजेंडा अहम होगा. वरना, बीजेपी उसकी जगह लेने के लिए नजरें गड़ाए बैठी है.

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