केरल विधानससभा चुनाव 2026 में कांग्रेस ने बंपर जीत हासिल की. बता दें कि चुनाव आयोग ने यहां 1 चरण में मतदान करवाने का फैसला किया था. मतदान 9 अप्रैल 2026 को संपन्न हुआ था और 4 मई 2026 को परिणाम की घोषणा की गई (Kerala Assembly Election 2026).
असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कुल मिलाकर लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हैं और यहां 824 विधानसभा क्षेत्र हैं. चुनाव के लिए करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए और पूरे चुनाव को संपन्न कराने के लिए लगभग 25 लाख चुनाव कर्मी तैनात किए गए.
इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल का 23 मई को, पुडुचेरी का 15 जून को, तमिलनाडु का 10 मई को और पश्चिम बंगाल का 7 मई को समाप्त हो रहा है. इसलिए इन सभी जगहों पर समय पर नई सरकार चुनने के लिए विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए.
बात करें केरल की तो यहां राजनीति पारंपरिक रूप से दो मुख्य गठबंधनों के बीच घूमती रही है-
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF)- जिसका नेतृत्व CPI(M) करती है. वर्तमान में यह सत्ता में है. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में LDF ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में कई योजनाएं लागू की हैं. हालांकि सरकार को आर्थिक चुनौतियों और कुछ घोटालों को लेकर आलोचना भी झेलनी पड़ी है.
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) - कांग्रेस के नेतृत्व वाला यह गठबंधन हर बार एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आता है. 2026 के लिए कांग्रेस और सहयोगी दल राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) - हालांकि केरल में अब तक BJP को बड़ी सफलता नहीं मिली है, परंतु पार्टी राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए आक्रामक प्रचार में जुटी है. केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को राज्य में प्रचारित किया जा रहा है.
केरलम के चुनाव नतीजे 4 मई को आए थे. लेकिन तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस में मैराथन बैठकों के बावजूद पार्टी केरलम के सीएम को लेकर फैसला नहीं ले सकी है. माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी कुछ घंटों में केरलम के अगले सीएम के नाम का ऐलान कर सकती है.
केरल में दस साल के बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है, लेकिन मुख्यमंत्री का फैसला करने में उसे पसीने छूट गए हैं. सीएम की रेस में कई नेताओं के नाम चल रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी के राइट हैंड माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल के नाम पर मोहर लगती है तो दिल्ली से लेकर केरल तक के समीकरण साधे जा सकते हैं.
केरलम में कांग्रेस सरकार बनाने की तैयारियों में जुटी है. मुख्यमंत्री पद के तीन दावेदार हैं. एक सीनियर, एक जमीन से जुड़ा और एक गांधी परिवार का करीबी. एक चैलेंज यह भी है कि मुख्यमंत्री पद के तीनों ही दावेदार सवर्ण समाज से आते हैं - और यही बात राहुल गांधी की ओबीसी मुहिम के रास्ते में रोड़ा है.
केरलम में कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है. दिल्ली में लगातार बैठकों और नेताओं को तलब किए जाने के बीच सस्पेंस और गहरा गया है. पार्टी के भीतर अलग-अलग दावे, सहयोगी दलों की बेचैनी और समय का दबाव हाईकमान के सामने नई चुनौती है.
कांग्रेस महासचिव दीपा दासमुंशी ने कहा है कि केरलम के नए मुख्यमंत्री पर अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी करेंगे. दिल्ली में हुई लंबी बैठक के बाद उन्होंने बताया कि सभी कांग्रेस विधायकों ने हाई-कमान को फैसला लेने का अधिकार दे दिया है और जल्द नाम की घोषणा होगी.
केरल में कांग्रेस गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर तीन प्रमुख नेताओं के बीच गुटबाजी और मतभेद जारी हैं. केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ा है, जिससे पार्टी के अंदरूनी हलचल तेज हो गई है.
केरल के कोट्टायम में कांग्रेस कार्यकर्ता ने वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करते हुए आत्महत्या की कोशिश की. उसने सार्वजनिक रूप से खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसका लाइटर छीनकर बड़ा हादसा टाल दिया. घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया.
केरल के अलाप्पुझा में यूडीएफ की जीत से कांग्रेस में उत्साह है. एडी थॉमस ने सीपीआई(एम) के पीपी चिथरंजन को 21,015 वोटों से हराया. मछुआरे परिवार से आए थॉमस की कहानी संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल है. के सी वेणुगोपाल ने उनकी जीत को खास बताया. राज्य में कांग्रेस 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि यूडीएफ को स्पष्ट बहुमत मिला और एलडीएफ को हार का सामना करना पड़ा.
केरलम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने बड़ी जीत दर्ज की है और 140 में से 102 सीटें हासिल कर सत्ता में वापसी की है. हालांकि इस जीत के बाद अब पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है.
हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के जीतने वाले उम्मीदवारों में मुस्लिम नेताओं की बड़ी हिस्सेदारी दिखी. असम में 19 में से 18 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार जीते, जबकि केरल में 35 मुस्लिम विधायक चुने गए, जिनमें ज्यादातर यूडीएफ से हैं. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की दोनों सीटें मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीतीं और तमिलनाडु में भी एक मुस्लिम उम्मीदवार विजयी रहा. कुल मिलाकर, असम और केरल में मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत दर करीब 80 फीसदी रही.
इस चुनाव के नतीजों ने कई संदेश दिए हैं, पश्चिम बंगाल से लेकर असम और पुंडुचेरी तक नतीजे बीजेपी के पक्ष में रहे तो वहीं तमिलनाडु में विजय की ब्लॉकबस्टर जीत ने बड़े-बड़े दिग्गजों को हिलाकर रख दिया.
देश के पांच राज्यों के चुनाव नतीजे में भले ही बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा मुफीद दिख रहे हों, लेकिन इस हार में भी कांग्रेस के लिए जीत छुपी हुई है. 2026 के चुनावी रण का सबसे दिलचस्प पहलू 'साइलेंट शिफ्ट' है, जो कांग्रेस को आने वाले समय में एक बार फिर राजनीति की धुरी बना सकती है.
केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने वामपंथी गढ़ को तोड़ते हुए बड़ी जीत हासिल की है. इस चुनाव में कांग्रेस ने एकजुट होकर काम किया और जीत हासिल की.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आ गए हैं, जिसमें कई सियासी संदेश छिपे हैं. बंगाल से लेकर तमिलनाडु और केरल तक सिर्फ सत्ता परिवर्तन ही नहीं बल्कि भविष्य की सियासत को भी पलटकर रख दिया है. बीजेपी बंगाल में जीतकर अपना दबदबा बनाए रखा है तो क्षेत्रीय दलों की जमीन सिकुड़ने लगी है.
5 राज्यों के चुनाव नतीजों में भले कांग्रेस बड़ी जीत न दर्ज कर सकी, लेकिन वोट शेयर, संगठन और कई सीटों पर मजबूत मौजूदगी ने भविष्य की राजनीति के लिए अहम संकेत दिए.
केरलम में कांग्रेस की यह जीत राहुल की संगठनात्मक पकड़ और प्रियंका की जन-संवाद शैली का एक सफल प्रयोग है. राहुल गांधी ने जहां पार्टी के भीतर की राजनीति को संभाला और नैरेटिव सेट किया, वहीं प्रियंका गांधी ने जमीनी स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित कर UDF के लिए निर्णायक बढ़त सुनिश्चित की.
शशि थरूर के तिरुवनंतपुरम क्षेत्र में 7 में से 4 सीटें यूडीएफ को मिलीं, जबकि 3 सीटें अन्य दलों के खाते में गईं. कांग्रेस ने नैय्याट्टिनकारा, वट्टियूरकावु और कोवलम जीतीं, जबकि बीजेपी और सीपीआई(एम) को भी सफलता मिली. 2021 के मुकाबले यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है. थरूर ने स्टार प्रचारक के रूप में अहम भूमिका निभाई. हालांकि बीजेपी का बढ़ता जनाधार और संगठनात्मक चुनौतियां कांग्रेस के लिए आगे भी चिंता का विषय बनी रहेंगी.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Rajeev Chandrasekhar Vidhan Sabha Chunav Result Updates: निमोम विधानसभा सीट पर 25 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर ने शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने CPI के सिवनकुट्टी को 4,978 वोटों से हराया. सिवनकुट्टी को कुल 52,214 वोट मिले, जबकि चंद्रशेखर को 57,192 वोट प्राप्त हुए. परिणाम के साथ ही इस सीट पर बीजेपी ने बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की.
केरल में UDF की जीत के बाद कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है. वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच मुकाबला है, जबकि अंतिम फैसला हाई कमान और CLP बैठक के बाद होगा.
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव घट रहा है. राष्ट्रीय दलों की बढ़ती ताकत के बीच द्विदलीय व्यवस्था की ओर बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है, जिससे संघीय ढांचे और विविधता पर असर को लेकर चिंता जताई जा रही है.