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1000 स्पैरो हाउस से AI से गणित सिखाने तक... जानिए MP के उन 6 शिक्षकों की कहानी, जिन्हें राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

National Teacher Award 2026 MP: शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मध्य प्रदेश के 6 उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया. CM मोहन यादव ने दी बधाई.

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शिक्षक दिवस 2026 पर नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह.(Photo:ITG)
शिक्षक दिवस 2026 पर नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह.(Photo:ITG)

शिक्षक दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश के लिए गौरव का पल आया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने National Teacher Award 2026 के तहत आयोजित समारोह में देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया. इस राष्ट्रीय सम्मान की सूची में मध्यप्रदेश के भी 6 शिक्षक और शिक्षाविद शामिल रहे. मध्यप्रदेश से सम्मानित होने वालों में डॉ. अर्चना शुक्ला, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, संगीता यादव, प्रो. सौरव दत्ता, रीना गुप्ता और ज्योतिबाला राठौर शामिल हैं. इन सभी ने शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और अनुसंधान के अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है.

डॉ. अर्चना शुक्ला: पढ़ाई के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर

डॉ. अर्चना शुक्ला विज्ञान और जीव विज्ञान की शिक्षिका हैं. वह पिछले 15 वर्षों से परियोजना आधारित शिक्षण, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के क्षेत्र में काम कर रही हैं.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप उन्होंने विद्यार्थियों के साथ कई अभिनव और कम लागत वाली परियोजनाएं संचालित कीं. उनके काम में एक हजार से अधिक स्पैरो हाउस लगाना, स्कूल परिसर के पेड़ों की QR कोड के जरिए डिजिटल मैपिंग और ‘प्लांट इमोशन’ जैसी परियोजनाएं शामिल हैं.

इन प्रयोगों के जरिए उन्होंने विद्यार्थियों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपने आसपास के पर्यावरण को समझने और उस पर काम करने से जोड़ा.

शैलेंद्र प्रताप सिंह: 69 से 202 हुई विद्यार्थियों की संख्या

अंग्रेजी शिक्षक और प्रभारी प्रधानाध्यापक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने सीमित संसाधनों वाले विद्यालयों में जनभागीदारी के जरिए बड़ा बदलाव किया. उनके प्रयासों का असर विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या और उपस्थिति दोनों पर दिखाई दिया. उनके प्रयासों से विद्यार्थियों की संख्या 69 से बढ़कर 202 हो गई, जबकि उपस्थिति 44 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुंची.

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उन्होंने शिक्षा के साथ सामाजिक मुद्दों पर भी काम किया. बाल विवाह रोकने, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने और दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी उन्होंने अहम प्रयास किए.

संगीता यादव: गणित को बनाया प्रयोग और आनंद का विषय

सुश्री संगीता यादव प्रधान शिक्षिका हैं और नवाचार आधारित गणित शिक्षण तथा शिक्षक सशक्तिकरण के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने गणितोत्सव, क्वेस्ट फॉर मैथमेटिक्स, मैथेमाइंड और बैगलेस मैथमेटिक्स डे जैसे कार्यक्रमों के जरिए गणित को विद्यार्थियों के लिए आनंदपूर्ण और प्रयोग आधारित विषय बनाने का प्रयास किया.

वह तकनीक आधारित शिक्षण के साथ-साथ AI को भी शिक्षा से जोड़ रही हैं. उनका जोर इस बात पर है कि गणित को केवल किताब और परीक्षा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि विद्यार्थियों को उसे समझने और प्रयोग करने का अवसर मिले.

प्रो. सौरव दत्ता: पौधों पर शोध से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच

प्रो. सौरव दत्ता आईआईएसईआर भोपाल में पादप जीवविज्ञानी हैं. शिक्षण और अनुसंधान के जरिए वह विद्यार्थियों में मौलिक और शोधपरक सोच विकसित करने पर काम कर रहे हैं. उन्हें दो बार IISER भोपाल Distinguished Teacher Award से सम्मानित किया जा चुका है. जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पौधों के विकास से जुड़ा उनका शोध विशेष रूप से उल्लेखनीय है.

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शिक्षण और शोध को साथ लेकर चलने के उनके प्रयासों ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है.

रीना गुप्ता: दिव्यांग प्रशिक्षुओं को डिजिटल कौशल से बना रहीं आत्मनिर्भर

रीना गुप्ता शासकीय संभागीय ITI, उज्जैन में श्रवण एवं दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड में प्रशिक्षण अधिकारी हैं. पिछले 16 वर्षों से वह दिव्यांग प्रशिक्षुओं को कंप्यूटर और डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दे रही हैं. उनका उद्देश्य इन प्रशिक्षुओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है.

विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्ग के दिव्यांग प्रशिक्षुओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उनके काम को खास माना गया है.

ज्योतिबाला राठौर: प्रशिक्षण से रोजगार तक युवाओं को दे रहीं दिशा

ज्योतिबाला राठौर राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला), इंदौर में प्रशिक्षण अधिकारी हैं. उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में छह वर्ष और शिक्षण के क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है. उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षुओं ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. इसके अलावा प्लेसमेंट अधिकारी के रूप में उन्होंने बड़ी संख्या में प्रशिक्षुओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी भूमिका निभाई है.

उनका काम प्रशिक्षण को केवल प्रमाणपत्र तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार से जोड़ने पर केंद्रित रहा है.

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6 शिक्षकों का सम्मान, पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव

शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों मध्यप्रदेश के छह शिक्षकों और शिक्षाविदों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है.

इन छह शिक्षकों की उपलब्धियां यह भी दिखाती हैं कि शिक्षा का दायरा सिर्फ कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं है. कोई पर्यावरण संरक्षण को पढ़ाई से जोड़ रहा है, कोई गणित में नए प्रयोग कर रहा है, कोई शोध के जरिए वैज्ञानिक सोच विकसित कर रहा है तो कोई दिव्यांग युवाओं को डिजिटल कौशल देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है.

शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बना रहे शिक्षक

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि शिक्षक सिर्फ विद्यार्थियों को ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता भी होता है. मध्यप्रदेश के इन छह शिक्षकों ने अपने नवाचार, समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है.

उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की उपलब्धियां प्रदेश के दूसरे शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं. राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों को आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा देने और शिक्षकों को नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है.

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