बिहार में गैर-वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को नियमित वेतनमान देने की मांग को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को पटना में 'कफन मार्च' निकाला. शिक्षक दिवस के मौके पर कांग्रेस सेवा दल के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से बिहार विधानसभा के पास स्थित शहीद स्मारक की ओर बढ़े. हालांकि रास्ते में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और 13 लोगों को हिरासत में ले लिया. बाद में सभी को छोड़ दिया गया.
पटना टाउन के SDPO कामाख्या नारायण सिंह ने बताया कि मार्च के दौरान 13 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया. कांग्रेस के मुताबिक, यह प्रदर्शन बिहार की 1981 की गैर-वित्तपोषित शिक्षा नीति के विरोध में आयोजित किया गया था. इस नीति में 2008 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने बदलाव करते हुए प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था लागू की थी.
इस व्यवस्था के तहत बिहार सरकार निजी या सामुदायिक स्तर पर संचालित शिक्षण संस्थानों को उनके परीक्षा परिणामों के आधार पर अनुदान देती है. ये संस्थान मुख्य रूप से छात्रों से मिलने वाली फीस पर निर्भर रहते हैं. इनमें काम करने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए नियमित वेतनमान की व्यवस्था नहीं होने के कारण उनकी आय स्थिर नहीं रहती.
'अनुदान नहीं, नियमित वेतनमान चाहिए'
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार गैर-वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों की समस्याओं का तत्काल समाधान करे और अनुदान की जगह नियमित वेतनमान लागू करे. बिहार कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष संजय यादव ने कहा, 'हमने कफन यात्रा निकालकर बिहार के मुख्यमंत्री से मांग की है कि कम से कम हमें कफन ही दे दें. चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसे शिक्षकों को वेतनमान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन न तो वह और न ही उनके उत्तराधिकारी इसे पूरा कर पाए.'
कांग्रेस ने दावा किया कि संजय यादव के अलावा अफरोज आलम, राजेश राठौड़ और रुचि सिंह समेत पार्टी के कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया.
सरकार ने कहा- नया वेतनमान बनाने पर विचार
इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना के एसके मेमोरियल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में गैर-वित्तपोषित स्कूलों के शिक्षकों के लिए नई वेतन व्यवस्था बनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि सरकार गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों के आंतरिक संसाधनों और सरकारी अनुदान को मिलाकर नया वेतनमान तैयार करने पर विचार कर रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमने उनके आंतरिक संसाधनों और सरकार के अनुदान को मिलाकर एक नई व्यवस्था बनाने का फैसला किया है, जिससे नया वेतनमान तैयार होगा और गैर-वित्तपोषित शिक्षकों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा.'
वहीं बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने सरकार पर शिक्षकों की आवाज दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर शिक्षकों और उनके नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है. सरकार को शिक्षकों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करना चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह दमन का रास्ता अपना रही है.