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पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने भाई को बुलाया, फिर जंगल में कर दी हत्या, बहन समेत 5 को उम्रकैद

बिहार के बगहा में चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अभियोजन के मुताबिक संपत्ति के लालच में मृतक की बहन गीता देवी ने हत्या की साजिश रची थी. विजय को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने बुलाया गया था, जिसके करीब सात दिन बाद उसका शव गोवर्धना जंगल में गड्ढे से बरामद हुआ.

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मुख्य आरोपित अशोक यादव पर 11 सितंबर को सुनवाई होगी.(Photo: Abhishek Pandey/ITG)
मुख्य आरोपित अशोक यादव पर 11 सितंबर को सुनवाई होगी.(Photo: Abhishek Pandey/ITG)

बिहार के बगहा में बहुचर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. रामनगर थाना क्षेत्र के इस मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, मुशहर और गीता देवी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी. सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

दरअसल, यह सनसनीखेज वारदात 1 मई 2022 को हुई थी. विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन करके बुलाया गया था. फोन आने के बाद वह बाइक से घर से निकले, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटे. काफी देर तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की. जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई.

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मामले की जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों पर शक हुआ. घटना के करीब सात दिन बाद महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया. शव की पहचान उसके हाथ में मौजूद अंगूठी और घड़ी के आधार पर की गई. इसके बाद पुलिस ने हत्या से जुड़े साक्ष्यों को जुटाते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई.

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10 गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों से मजबूत हुआ केस

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 10 गवाह पेश किए. इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, बेटे राहुल कुमार सहनी, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख रहे. गवाहों के बयानों के अलावा पुलिस जांच से जुड़े दस्तावेज भी अदालत के सामने रखे गए.

अभियोजन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बरामद मोबाइल फोन और बाइक समेत कई अहम साक्ष्य प्रस्तुत किए. इन सबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की भूमिका अदालत के सामने रखी. सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पांच आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी माना.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक विजय सहनी की हत्या के पीछे संपत्ति का लालच था. आरोप है कि उसकी बहन गीता देवी ने अपने भाई को रास्ते से हटाने के लिए साजिश रची थी. इसके बाद मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई. अदालत के फैसले के बाद पांच दोषियों को आजीवन कारावास के साथ आर्थिक दंड भी भुगतना होगा.

मुख्य आरोपित अशोक यादव भी दोषी करार

इस मामले में मुख्य आरोपित अशोक यादव को भी अदालत ने दोषी करार दिया है. लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि अशोक यादव की सजा पर अदालत 11 सितंबर को फैसला सुनाएगी. यानी पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद अब मुख्य आरोपित की सजा का इंतजार है.

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विजय सहनी की हत्या के बाद यह मामला इलाके में काफी चर्चित रहा था. परिवार के मुताबिक वह 1 मई को घर से बाइक लेकर निकले थे. उन्हें पोखरा विवाद के सिलसिले में बुलाया गया था, लेकिन फिर उनका कोई पता नहीं चला. एक सप्ताह बाद जंगल में शव मिलने के बाद परिजनों को घटना की भयावह सच्चाई का पता चला.

पुलिस जांच में आरोपियों की निशानदेही पर शव बरामद होना मामले की जांच में अहम कड़ी साबित हुआ. अंगूठी और घड़ी से शव की पहचान की गई. इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल, मोबाइल फोन, बाइक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को केस का हिस्सा बनाया. इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा.

अदालत का फैसला, अब 11 सितंबर को अशोक यादव की सजा

जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत के फैसले के बाद पांच दोषियों को अब अपना शेष जीवन जेल में बिताना होगा. महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, मुशहर और गीता देवी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि मुख्य आरोपित अशोक यादव को भी अदालत ने दोषी माना है. उसकी सजा पर 11 सितंबर को सुनवाई होगी. ऐसे में इस बहुचर्चित हत्याकांड में अदालत का अगला फैसला भी महत्वपूर्ण होगा.

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संपत्ति के विवाद से शुरू हुई साजिश, भाई को फोन कर घर से बुलाना, फिर उसका लापता होना और सात दिन बाद जंगल से शव मिलना इस मामले की प्रमुख कड़ियां रहीं. अदालत में पेश किए गए गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पांच आरोपियों को दोषी ठहराया गया. अब अशोक यादव की सजा के बाद मामले की न्यायिक कार्रवाई का अगला चरण पूरा होगा.

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