MP Industrial Corridor: मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तैयार किया जाएगा. करीब 600 किमी लंबा यह कॉरिडोर प्रदेश के तीन बड़े शहरों जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ेगा. राज्य सरकार ने मार्च 2028 तक इसके तहत 10 हजार एकड़ औद्योगिक भूमि विकसित करने, 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और 3 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित संवाद भवन में आयोजित कार्यक्रम में इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार का रोडमैप बताया. उन्होंने कहा कि जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर मध्य प्रदेश के औद्योगिक इतिहास में एक नए युग की शुरुआत करेगा.
7 जिलों और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री के मुताबिक, कॉरिडोर से प्रदेश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी. इसकी परिधि में आने वाले 7 जिलों के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.
यह केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा. इसके जरिए उद्योग, कृषि, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर का एक इंटीग्रेटेड नेटवर्क तैयार करने की योजना है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में यह कॉरिडोर इंदौर, भोपाल और जबलपुर के मेट्रोपोलिटन रीजन को सीधे जोड़ेगा. सरकार का लक्ष्य इसके जरिए मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल बेल्ट तैयार करना है.
3 से 6 महीने में मास्टर प्लान तैयार करने का लक्ष्य
सरकार ने कॉरिडोर के विकास के लिए समयसीमा भी तय की है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुताबिक, अगले 3 से 6 महीने में भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. इसके बाद 6 से 12 महीने में औद्योगिक क्षेत्रों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का काम शुरू करने की योजना है.
कॉरिडोर के विकास के लिए राज्य सरकार अपने पूर्ण स्वामित्व वाली एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) कंपनी भी स्थापित करेगी. इसमें शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा.
मार्च 2028 तक क्या है सरकार का टारगेट?
राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए तीन बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं. मार्च 2028 के अंत तक 10 हजार एकड़ औद्योगिक भूमि विकसित करने की योजना है. इसके साथ ही 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और 3 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है.
जबलपुर बनेगा डिफेंस और एयरोस्पेस का बड़ा केंद्र
कॉरिडोर में अलग-अलग क्षेत्रों की औद्योगिक क्षमता के हिसाब से सेक्टर विकसित करने की योजना है. जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र को इसका बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
सरकार जबलपुर को इंडस्ट्रियल हब के साथ इंजीनियरिंग, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस एंसिलरी, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है.
नरसिंहपुर और रायसेन में कृषि प्रसंस्करण और फूड पार्क सेक्टर को बढ़ावा देने की योजना है.
भोपाल में IT-इलेक्ट्रॉनिक्स, इंदौर में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग
भोपाल क्षेत्र को टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और नॉलेज सर्विसेज के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां साझा व्यावसायिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की भी योजना है.
वहीं, सीहोर-देवास क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग और वेयरहाउसिंग को बढ़ावा मिलेगा. इंदौर क्षेत्र को आईटी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सहित दूसरे निवेश क्षेत्रों में विकसित करने की योजना है.
सरकार का दावा है कि नए इकोनॉमिक कॉरिडोर के विकसित होने पर निवेशकों को बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई जाएंगी.
उद्योगपतियों ने किया मुख्यमंत्री का अभिनंदन
जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मंजूरी मिलने पर महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज समेत जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र के उद्योगपतियों एवं व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का अभिनंदन किया.
कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और महाकौशल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि गुप्ता भी मौजूद रहे. महाकौशल क्षेत्र के 11 जिलों से आए उद्योगपतियों, व्यवसायियों और व्यापारियों ने भी कॉरिडोर को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर सरकार का आभार जताया.