मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वह अयोध्या में मुकदमा दायर करेंगे और मांग करेंगे कि उनके द्वारा दिया गया चंदा वापस किया जाए, क्योंकि उसका गबन हुआ है.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा, 'मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा. मैंने जो दान दिया था, उसका गबन हुआ है, उसे लूटा गया है. इसलिए वह पैसा मुझे वापस किया जाए ताकि मैं उसे रामालया ट्रस्ट में जमा कर सकूं. मुझे थाने पर भरोसा नहीं है. पुलिस बीजेपी के नियंत्रण में है, इसलिए मैं थाने नहीं जाऊंगा, अदालत जाऊंगा.'
मंदिर के लिए दो बार दान दिया: दिग्विजय
दिग्विजय सिंह ने कहा, 'राम मंदिर के लिए दो बार चंदा अभियान चलाया गया था. पहली बार जब लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा निकली थी, तब भी मैंने योगदान दिया था. हमें राम मंदिर और भगवान राम पर आस्था है. लेकिन पहली बार जुटाए गए चंदे का कभी हिसाब नहीं दिया गया. अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में (श्रीराम जन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद विवाद) सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद फिर से चंदा अभियान शुरू किया गया. विश्व हिंदू परिषद ने अभियान चलाया था, लेकिन मैंने उन्हें दान नहीं दिया क्योंकि मुझे उन पर भरोसा नहीं था. चंदे के पैसों के गबन की उनकी आदत पुरानी है. इसलिए मैंने सीधे ट्रस्ट को दान दिया.'
#WATCH | Bhopal, Madhya Pradesh: Congress leader Digvijaya Singh says, "...I have decided to file a lawsuit in Ayodhya stating that the donation I made was misappropriated— they looted it, and therefore, it should be returned to me so I can deposit it into the 'Ramlaya Trust'. I… pic.twitter.com/dkFDjUq1vf
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) July 3, 2026
दिग्विजय सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 लाख रुपये दान दिए थे, इसलिए उन्होंने उनसे ज्यादा राशि देने का फैसला किया. कांग्रेस नेता ने कहा, 'मैंने 1 लाख 11 हजार रुपये दान किए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि यह राशि ट्रस्ट में जमा कराई जाए. हमने खुद पैसा जमा किया और उसकी रसीद भी ली. मैंने यह दान भगवान राम में आस्था और भव्य मंदिर निर्माण की भावना से दिया था, लेकिन अब सामने आ रही शिकायतें बेहद चिंताजनक हैं.'
यह हमारी आस्था पर गहरी चोट: दिग्विजय
उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे चंपत राय ने 10 से 15 हजार रुपये महीने के वेतन पर कर्मचारियों की नियुक्ति की थी, जबकि रोजाना आने वाले दान का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा गायब हो जाता था. दिग्विजय सिंह ने कहा, 'दान में आने वाली नकदी की गड्डियां गायब हो जाती थीं. इसमें बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भी भूमिका सामने आई है. यह हमारी आस्था और भगवान राम के प्रति श्रद्धा पर गहरी चोट है.' दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और अपने दान की राशि वापस मांगेंगे.
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (नकदी, सोना-चांदी, आभूषण इत्यादि) के गबन का मामला 7 जून को सामने आया था. आरोप है कि चढ़ावे का प्रबंधन करने वाले राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों और बैंक से जुड़े कुछ लोगों की मिलीभगत से गड़बड़ी की गई. यूपी सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की. इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. वहीं राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा हुआ है.