कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने रविवार को एक पोस्ट करके चौंका दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके लिखा कि 'मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं. आखिर में मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मुझे मध्य प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर दिया.’
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस 'इस्तीफे' की चर्चा हो रही है. असल में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने व्यंग्यात्मक ‘इस्तीफा पत्र’ शेयर किया था. इसके जरिए उन्होंने मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधा.
दिपके का यह पोस्ट बालाघाट दौरे के एक दिन बाद आया, जहां उन्हें कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा था. डिपके बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनके परिवारों से मिलने पहुंचे थे.

लेटर में लिखा- आदिवासी बच्चों को मैंने निराश किया
दिपके ने X पर लिखा, ‘मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे मध्य प्रदेश की जनता की सेवा करने का अवसर दिया, जिसमें मैं स्पष्ट रूप से असफल रहा हूं.’ उन्होंने एक फर्जी इस्तीफा पत्र भी शेयर किया, जो किसी ऑफिशियल लेटर जैसा ही लग रहा था, इसमें सरकारी प्रतीक, मुख्यमंत्री कार्यालय का पता और हस्ताक्षर भी लगाए गए थे.
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल को संबोधित इस व्यंग्यात्मक चिट्ठी में दिपके ने बालाघाट में बच्चों की मौत की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने का ऐलान करते हुए सरकार को घेरा. उन्होंने लिखा कि 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनकी अंतरात्मा उन्हें इस पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देती.
दिपके ने पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में दो लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की गई थी, जिसे आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद बढ़ाकर चार लाख रुपये किया गया. उन्होंने सवाल किया कि अगर मरने वाले बच्चे मंत्रियों या विधायकों के होते, तो क्या चार लाख रुपये का मुआवजा पर्याप्त माना जाता?
दिपके ने स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया. इसके अलावा उन्होंने शिक्षा, बिजली, पोषण और अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराध जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकारी और NCRB के आंकड़ों का हवाला दिया.
बालाघाट में दिपके के साथ क्या हुआ?
शनिवार को दिपके बालाघाट जिले के अदोरी, कोरका और बोंदारी गांव पहुंचे थे. वह आदिवासी बच्चों के परिवारों से मिलने और इलाके की स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति जानने गए थे. इस दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसमें एक महिला, जिसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताया जा रहा है, दिपके की कार के पास पहुंचकर उनसे सवाल करती नजर आई. महिला ने पूछा कि क्या वह ‘लाशों पर राजनीति करने’ आए हैं और इलाके में इतनी देर से क्यों पहुंचे. इस पर अभिजीत दिपके ने देर से आने के लिए माफी भी मांगी.
महिला ने इलाके में अच्छी सड़क बनाए जाने का जिक्र करते हुए भी दिपके से सवाल किए. इसके बाद CJP कार्यकर्ता उन्हें दूसरी गाड़ी में बैठाकर वहां से ले गए. दिपके के जाने पर महिला को वीडियो में कहते सुना गया, ‘भाग गया, भाग गया.’ स्थानीय पत्रकारों ने दूरदराज के गांव में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए और आशंका जताई कि क्या उन्हें डिपके का दौरा बाधित करने के लिए भेजा गया था. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

हाई कोर्ट ने भी मांगा जवाब
बालाघाट में बैगा और गोंड आदिवासी समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट भी पहुंच चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चों की मौत को खसरा और मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों के संदिग्ध प्रकोप से जोड़ा जा रहा है. हाई कोर्ट ने मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. याचिका में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा था. इसके अलावा पीने के पानी, साफ-सफाई और कुपोषण से निपटने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.
दिपके ने अपने व्यंग्यात्मक इस्तीफे में मोहन यादव सरकार को अन्य मुद्दों पर भी घेरा, जिसमें सागर की जहरीली शराब त्रासदी में 16 लोगों की मौत का मामला भी शामिल है.