भारत में दोपहर के खाने में दाल-चावल की थाली काफी आम है, खासतौर पर नॉर्थ इंडिया में तो लंच में दाल-चावल ही बनाया जाता है. इसका एक कारण यह भी है कि दाल स्वादिष्ट होने के साथ प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स मानी जाती है, इसलिए इसे रोज की डाइट का हिस्सा बनाया जाता है. अरहर, मूंग, मसूर, उड़द और चना जैसी कई दालें घरों में बनाई जाती हैं और इन सभी को बनाने का तरीका लगभग एक जैसा होता है. हालांकि, दाल पकाते समय एक चीज लगभग सभी ने नोटिस की होगी कि दाल पकाते समय उबलते पानी के ऊपर बनने वाला सफेद या हल्के रंग का झाग.
दाल में उबाल आते ही पानी में बुलबुले बनने लगते हैं और कुछ देर बाद सतह पर झाग की परत दिखाई देती है. कई घरों में इसे गंदगी समझकर तुरंत चम्मच से निकाल दिया जाता है. लेकिन क्या ऐसा करना वाकई जरूरी है? आइए जानते हैं दाल के इस झाग की असली वजह क्या है.
आखिर दाल में झाग बनता क्यों है?
दाल और दूसरी फलियों में प्रोटीन, स्टार्च और कई प्राकृतिक प्लांट कंपाउंड पाए जाते हैं. इनमें सैपोनिन जैसे यौगिक भी शामिल होते हैं. जब दाल पानी में गर्म होती है और उबाल आने लगता है, तो ये तत्व पानी में निकल सकते हैं.
उबलते पानी में लगातार हलचल और हवा के संपर्क के कारण प्रोटीन या दूसरे यौगिक बुलबुलों को कुछ हद तक स्थिर कर देते हैं. इसी वजह से दाल की सतह पर झाग नजर आने लगता है. इसलिए सामान्य तौर पर इसे दाल पकने की प्राकृतिक प्रोसेस माना जा सकता है.
क्या दाल का झाग गंदा या जहरीला होता है?
दाल के ऊपर बनने वाले झाग को सीधे गंदगी या जहरीली चीज मानना सही नहीं है. सिर्फ झाग दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि दाल खराब है या खाने के लिए सुरक्षित नहीं है. दाल और फलियों को अच्छी तरह पकाना जरूर जरूरी है. पकाने, भिगोने और कुछ अन्य प्रक्रियाओं से इनमें मौजूद कुछ प्राकृतिक एंटीन्यूट्रिशनल कंपाउंड्स की मात्रा कम हो सकती है. इसलिए दाल को पर्याप्त पानी में अच्छी तरह पकाना अहम है.
फिर लोग झाग निकालते क्यों हैं?
झाग निकालने की मुख्य वजह अक्सर दाल का लुक और टेक्सचर होती है. झाग रहने पर दाल का पानी थोड़ा मटमैला दिखाई दे सकता है. अगर आपको एकदम साफ, हल्की और स्मूद दाल पसंद है, तो उबाल आने के बाद ऊपर जमा झाग को चम्मच से निकाल सकते हैं.
हालांकि, रोज के खाने के लिए दाल बना रहे हैं और थोड़ा झाग रहने से कोई परेशानी नहीं है, तो इसे निकालना जरूरी नहीं है. दाल पकने के साथ झाग अक्सर कम हो जाता है और उसका कुछ हिस्सा दाल में मिल जाता है.
क्या झाग निकालने से दाल ज्यादा हेल्दी हो जाती है?
ऐसा जरूरी नहीं है. दाल को भिगोने, पकाने या कुछ मामलों में पानी निकालने से पानी में घुलने वाले कुछ यौगिकों की मात्रा कम हो सकती है, लेकिन ऊपर दिखाई देने वाले झाग को इन यौगिकों की मात्रा का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता.यानी ज्यादा झाग का मतलब यह नहीं है कि दाल में ज्यादा हानिकारक पदार्थ हैं. इसी तरह झाग निकाल देने से दाल अचानक ज्यादा पौष्टिक भी नहीं हो जाती.
दाल का झाग निकालें या नहीं?
आप चाहें तो इसे निकाल सकते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है. अगर साफ और स्मूद दाल पसंद है, तो उबाल आने के शुरुआती मिनटों में चम्मच की मदद से झाग हटा दें. वरना दाल को सामान्य तरीके से पकने दें.
दाल बनाते समय ज्यादा जरूरी है कि उसे पकाने से पहले अच्छी तरह धोया जाए और पर्याप्त पानी के साथ पूरी तरह पकाया जाए. कुछ दालों को पकाने से पहले भिगोने से उनका पकने का समय भी कम हो सकता है.