गर्मियों के मौसम में आम का स्वाद तो हर कोई बड़े चाव से लेता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस आम के पत्तों को हम अक्सर पूजा-पाठ के बाद या पेड़ों की छंटाई के समय कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, वे असल में सेहत और खूबसूरती का खजाना हैं. आम के आम गुठलियों के दाम की कहावत तो आपने सुनी होगी, लेकिन अब बारी है आम के आम... पत्तों के भी दाम को समझने की. आमतौर पर इन्हें पूजा में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन आयुर्वेद में आम के पत्तों को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है.
आम के पत्तों के अनोखे इस्तेमाल
इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन और एंटी-बैक्टीरियल गुण न सिर्फ आपकी सेहत को दुरुस्त रख सकते हैं, बल्कि आपकी त्वचा को भी बेदाग और चमकदार बना सकते हैं. अगर आप भी अब तक इन्हें बेकार समझ रहे थे, तो आइए जानते हैं आम के पत्तों के कुछ ऐसे अनोखे इस्तेमाल जो आपके बहुत काम आएंगे.
स्किन के लिए नेचुरल स्किनकेयर
आम के पत्तों में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो त्वचा के लिए वरदान हैं. अगर आप चेहरे के पिंपल्स, दाग-धब्बों या ब्लैकहेड्स से परेशान हैं तो आम के कुछ कोमल पत्तों को सुखाकर उनका पाउडर बना लें. इस पाउडर में थोड़ा सा गुलाब जल या दही मिलाकर फेस पैक की तरह चेहरे पर लगाएं. यह पैक त्वचा को डीप क्लीन करता है, एक्स्ट्रा ऑयल को कंट्रोल करता है और चेहरे पर नेचुरल निखार लाता है. इसके उबले हुए पानी से चेहरा धोने पर स्किन इन्फेक्शन का खतरा भी कम होता है.
बालों की ग्रोथ में मददगार
अगर आपके बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं या बेजान हो गए हैं तो आम के पत्तों का पेस्ट बनाकर उसमें थोड़ा सा नारियल का तेल मिलाएं. इस मिश्रण को स्कैल्प (सिर की त्वचा) पर 15-20 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें. यह बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है और उन्हें नेचुरल ब्लैक शाइन देता है.
ओरल हेल्थ के लिए अचूक उपाय
पुराने समय में लोग आम के पत्तों को चबाकर थूक देते थे. इसके पत्तों को उबालकर कुल्ला करने से मुंह की बदबू दूर होती है, मसूड़ों की सूजन कम होती है और दांतों का पीलापन भी साफ होता है. इसके पत्तों को जलाकर बनाई गई राख से मंजन करने पर दांत मजबूत होते हैं.
बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद
अगर आप होम गार्डनिंग के शौकीन हैं तो आम के गिरे हुए पत्तों को फेंकने के बजाय उन्हें छोटे टुकड़ों में काटकर गमले की मिट्टी में दबा दें. ये पत्ते बहुत अच्छे मल्चिंग का काम करते हैं और धीरे-धीरे सड़कर पौधों के लिए एक बेहतरीन नाइट्रोजन-रिच ऑर्गेनिक कंपोस्ट (खाद) में बदल जाते हैं.