उत्तर प्रदेश के खान-पान की बात ही निराली है, और जब बात वहां की पारंपरिक मिठाइयों की आती है तो लौकी की लौज का नाम सबसे ऊपर आता है. इसे लौकी की लोच, घिया की लोच और घिया की बर्फी भी कहते हैं. यह मिठाई स्वाद में जितनी लाजवाब होती है, सेहत के लिहाज से भी उतनी ही हल्की और पौष्टिक होती है. अक्सर लोग सोचते हैं कि कोई भी गाढ़ी और स्वादिष्ट मिठाई बनाने के लिए मावा (खोया) या चाशनी की जरूरत होती है, लेकिन UP की यह पारंपरिक रेसिपी इस सोच को पूरी तरह बदल देती है.
बिना किसी मावे या चाशनी के झंझट के, केवल दूध, थोड़ी सी चीनी और ताज़ा लौकी की मदद से आप इसे बेहद आसानी से घर पर बना सकते हैं. इसका मलाईदार टेक्सचर और मखमली स्वाद ऐसा होता है कि इसके आगे बाजार की महंगी से महंगी मिठाइयां भी फीकी लगने लगती हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने का एकदम आसान और सटीक तरीका.
सामग्री:
ताजी लौकी: 500 ग्राम (छीलकर और कद्दूकस की हुई, बीज हटा दें)
फुल क्रीम दूध: 1 लीटर
दूध की मलाई या मिल्क पाउडर: 1/2 कप (मावे का विकल्प)
चीनी: 1/2 कप (स्वादानुसार)
देशी घी: 2 बड़े चम्मच
हरी इलायची पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच
कटे हुए मेवे (काजू, बादाम, पिस्ता): 2 चम्मच
केसर के धागे: ऑप्शनल
बनाने की सरल विधि:
सबसे पहले कद्दूकस की हुई लौकी का हल्का सा पानी हाथों से दबाकर निकाल लें ताकि पकाने में समय कम लगे.
अब एक कड़ाही में देसी घी डालकर लौकी की अच्छी तरह भुनाई करें जब तक इसका पानी न निकल जाए.
अब एक भारी तले की कढ़ाई में 1 लीटर दूध डालकर उबलने रखें. जब दूध उबलकर थोड़ा गाढ़ा (3/4 भाग) हो जाए तो इसमें कद्दूकस की हुई लौकी डाल दें.
दूध और लौकी को मध्यम-धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं जब तक कि लौकी पूरी तरह से गल न जाए और दूध पूरी तरह से सूखकर मावे जैसा न हो जाए.
मिक्सी जार में काजू और नारियल का बुरादा डालकर महीन पेस्ट तैयार कर लें.
अब लौकी में तैयार किया हुआ पेस्ट डालें और चीनी डाल दें. धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं जब तक कि मिश्रण गाढ़ा होकर कड़ाही न छोड़ने लगे.
इसमें इलायची पाउडर और चाहें तो हरा फूड कलर डालकर अच्छे से मिलाएं. जब मिश्रण से घी अलग होने लगे तो गैस बंद कर दें.
एक थाली या ट्रे पर घी लगाकर चिकना करें, मिश्रण को उसमें फैलाएं और ऊपर से कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर हल्का सा दबा दें.
ठंडा होने के बाद इसे मनचाहे आकार की बर्फी के टुकड़ों में काट लें.