29 अक्टूबर को देश भर में करवाचौथ का त्योहार मनाया जाएगा. उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर करवाचौथ की एक रात पहले इमरती और जलेबी खाने का पुराना रिवाज है. सुहागिनें और उनके परिवार करवा चौथ के व्रत या उसकी तैयारियों से एक दिन पहले शाम या रात को इमरती खाती हैं. चूंकि इमरती मीठी और ऊर्जा देने वाली होती है इसलिए ऐसा माना जाता है कि इससे अगले दिन निर्जला व्रत रखने के दौरान शरीर को ताकत मिलती है.
आमतौर पर लोग बाजार से इमरती खरीदकर लाते हैं लेकिन उनमें मिलावट और बासी होने का डर बना रहता है. ऐसे में क्यों न आप करवाचौथ पर अपने हाथों से शुद्ध, रसीली और एकदम कुरकुरी इमरती बनाएं जो आपकी सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होंगी. इसे घर पर बनाना बेहद आसान है और यहां हम आपको जौनपुर के फेमस बेनीराम जैसी इमरती बनाने का तरीका बता रहे हैं क्योंकि ये इमरती बेहद मशहूर है.
ब्रिटिश काल से बन रही है बेनीराम की इमरती
बेनीराम की इमरती 170 साल से फेमस है. ये प्राचीन तरीके, प्राकृतिक सामग्री और खास स्वाद के कारण अन्य जगहों की इमरतियों से पूरी तरह अलग और खास मानी जाती है. इसे सरकारी तौर पर जीआई टैग (GI Tag) भी मिल चुका है
इसे धोइया उड़द, देसी घी और देसी चीनी (खांडसारी) से बनाया जाता है. इसमें किसी तरह का मैदा, खोवा या कृत्रिम रंग नहीं मिलाया जाता है. आज भी इसे आधुनिक गैस की जगह पारंपरिक तरीके से लकड़ी की मद्धम आंच पर तैयार किया जाता है.
बिना किसी केमिकल या फ्रिज के यह इमरती आसानी से 7 से 10 दिन तक ताजा बनी रहती है.
सामग्री:
• उड़द की दाल: 1 कप (बिना छिलके वाली सफेद उड़द दाल, 4-5 घंटे या रात भर भिगोई हुई)
• देसी घी: तलने के लिए पर्याप्त मात्रा
• देसी खांड या चीनी : 2 से 3 कप (चाशनी के लिए)
• पानी: 1.5 कप (चाशनी के लिए)
• इलायची पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
बनाने की विधि
1. दाल का पेस्ट तैयार करना:
भीगी हुई उड़द दाल का पानी अच्छी तरह निकाल लें. इसके बाद मिक्सी या सिलबट्टे की मदद से इसे बिना ज्यादा पानी डाले एकदम चिकना, गाढ़ा और फ्लफी (हल्का) पीस लें. दाल को तब तक फेंटें जब तक वह बिल्कुल हल्की न हो जाए.
2. चाशनी बनाना:
एक कढ़ाई में चीनी (या देसी खांड) और पानी डालकर गैस पर रखें. इसे तब तक उबालें जब तक चीनी घुल जाए और एक तार की चाशनी तैयार न हो जाए. इसमें चाहें तो इलायची पाउडर मिला लें.
3. इमरती बनाना:
एक कढ़ाई या फ्लैट कड़ाही में देसी घी गरम करें. आंच को मध्यम रखें.
उड़द दाल के गाढ़े घोल को किसी सूती कपड़े (जिसमें बीच मेंछेद हो) या इमरती वाले पाइपिंग बैग में भरें.
घी में पहले एक छोटा गोल घेरा बनाएं और उसके ऊपर सुंदर फूल या घुमावदार पैटर्न बनाएं.
इसे धीमी आंच पर दोनों तरफ से हल्का सुनहरा और करारा होने तक सेक लें.
4. चाशनी में डुबोना:
कढ़ाई से निकालकर इमरती को हल्की गर्म चाशनी में 3 से 4 मिनट के लिए डुबोकर रखें.
जौनपुर की असली बेनीराम इमरती की खूबी यह है कि यह गर्मागर्म की बजाय थोड़ी ठंडी या कुछ घंटों बाद और भी ज्यादा नरम और रसीली लगती है.