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जब शैंपू-साबुन नहीं बने थे तब कैसे बाल साफ करते थे लोग? जानें पुराने जमाने का सीक्रेट

आज के चमकते-दमकते शैंपू के पीछे का इतिहास काफी हैरान करने वाला है. जब बाजार में साबुन और शैंपू नहीं थे, तब इंसान खुद को साफ रखने के लिए प्रकृति पर पूरी तरह निर्भर था. वह अपने बालों की सफाई कैसा करता था, इस बारे में जानेंगे.

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(Photo: AI Generated)
(Photo: AI Generated)

Evolution of hair care: आज के समय में बालों और शरीर की सफाई के लिए न जाने कितने तरह के शैंपू और साबुन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब ये चीजें नहीं बनी थीं, तब लोग अपने बाल और बॉडी को कैसे साफ रखते थे? आज से सैकड़ों साल पहले लोगों के पास सफाई के लिए केवल प्रकृति की दी हुई चीजें ही थी. पुराने समय में लोग गंदगी और तेल को हटाने के लिए मिट्टी, पौधों और तेलों का इस्तेमाल करते थे लेकिन समय के साथ यह सफर कैसे बदलता गया, इस बारे जान लीजिए.

प्रकृति ही थी असली क्लीनर

प्राचीन समय में लोग बाल धोने के लिए किसी एक चीज पर निर्भर नहीं थे. हिस्ट्री फैक्ट्स के मुताबिक, उस समय लोग बालों में प्राकृतिक तेल और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करना पसंद करते थे जिससे बाल चमकदार और स्वस्थ रहते थे.

प्राचीन मिस्र के लोग बालों को साफ करने के लिए इत्र वाली तेलों और मोम का इस्तेमाल करते थे. वहीं रोम के लोग बालों से गंदगी हटाने के लिए तेल का उपयोग करते थे और फिर एक धातु का औजार इस्तेमाल करते थे जिसे स्ट्रिजिल (strigil) कहते थे. उससे स्किन और बालों की सफाई करते थे.

साबुन से पहले का अनोखा तरीका

साबुन के आविष्कार से काफी पहले लोग शरीर को साफ करने के लिए राख और चर्बी के मिक्सचर का इस्तेमाल करते थे. लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने समय में लोग पानी के साथ घर्षण पैदा करने वाली चीजों जैसे रेत और मिट्टी का उपयोग करते थे ताकि त्वचा से पसीना और गंदगी बाहर निकल सके. यह तरीका आज के आधुनिक बॉडी स्क्रब की तरह काम करता था.

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जड़ी-बूटियां आती थीं काम

दुनिया भर में लोग अलग-अलग पौधों का इस्तेमाल करते थे. स्मिथसोनियन मैगजीन का कहना है, कई संस्कृतियों में साबुन जैसा प्रभाव देने वाले पौधों का उपयोग किया जाता था जो पानी के संपर्क में आने पर झाग पैदा करते थे.

BBC हिस्ट्री के अनुसार, प्राचीन सभ्यताओं में सफाई के लिए प्योर ऑलिव ऑयल का अधिक इस्तेमाल करते थे. लोग शरीर पर तेल मलते थे और फिर उसे खुरच कर साफ कर देते थे. यह तरीका न केवल शरीर को साफ रखता था बल्कि त्वचा को नमी भी देता था.

कुल मिलाकर पुराने समय में सफाई की प्रक्रिया आज की तरह जल्दबाजी वाली नहीं थी, बल्कि यह एक लंबी और प्राकृतिक दिनचर्या का हिस्सा थी जिसमें प्रकृति के साधनों का ही इस्तेमाल किया जाता था.

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