कर्नाटक हाई कोर्ट ने बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर अहम निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने किसानों की जमीन और संपत्तियों पर किसी भी तरह की कार्रवाई से रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा है कि उसकी इजाजत के बिना न तो एक भी पेड़ काटा जाए और न ही एक ईंट हटाई जाए.
यह मामला चार किसानों की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है. किसानों ने प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को चुनौती दी है. मामले की सुनवाई जस्टिस नटराज की एकल पीठ कर रही है.
कोर्ट की इजाजत के बिना नहीं होगी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि उसकी अनुमति के बिना किसानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए. यह निर्देश उस स्थिति में भी लागू होगा, जब जमीन के मुआवजे की रकम तय हो चुकी हो.
कोर्ट ने सवाल किया कि अगर सरकार मुआवजा तय कर दे और बुलडोजर लेकर जमीन पर पहुंच जाए तो क्या होगा. इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
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कोर्ट ने अधिकारियों को रातोंरात किसी संपत्ति को गिराने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करने का भी निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि किसानों की संपत्तियों के साथ जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए.
सुनवाई के दौरान GBA की ओर से पेश वकील शिवप्रकाश शांतनागौड़ा ने कहा कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है. उनका कहना था कि फिलहाल किसानों की जमीन के अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है.
वहीं किसानों की ओर से पेश वकील ने अलग दावा किया. उन्होंने कहा कि बहुत कम किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार हुए हैं. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि पांच प्रतिशत से भी कम किसानों ने जमीन देने पर सहमति जताई है.
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किसानों की सहमति को लेकर अलग-अलग दावे
मामले में सरकार की ओर से पहले कहा गया था कि कई किसान अपनी जमीन देने के लिए आगे आए हैं. हालांकि सुनवाई के दौरान इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज कोर्ट के सामने पेश नहीं किया गया.
किसानों का कहना है कि जमीन देने के लिए तैयार किसानों की संख्या बेहद कम है. उनका दावा है कि 95 प्रतिशत से ज्यादा किसान अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया को लेकर विवाद बना हुआ है.
हाई कोर्ट के ताजा निर्देश से बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों को फिलहाल राहत मिली है. अब कोर्ट की इजाजत के बिना उनकी जमीन या संपत्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी.
मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल के अदालत में पहुंचने में देरी हुई. इसके कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी. कोर्ट ने मामले को अगली तारीख के लिए टाल दिया.
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अब अगली सुनवाई में सरकार अपना पक्ष रखेगी. साथ ही जमीन अधिग्रहण और किसानों की सहमति से जुड़े दावों पर भी स्थिति साफ हो सकती है. फिलहाल हाई कोर्ट ने किसानों की जमीन पर किसी भी तरह की कार्रवाई को अपनी अनुमति से जोड़ दिया है.