स्वाइन फ्लू के कारण लोगों को खांसी- जुकाम, बुखार हो रहा है. कुछ मामलों में मरीजों में सांस लेने की परेशानी भी हो रही है, लेकिन यह फ्लू आंखों पर भी अटैक कर सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर इस मौसम में किसी व्यक्ति को फ्लू के लक्षणों के साथ आंखों में भी कोई समस्या हो रही है तो इसको हल्के में ना लें.
स्वाइन फ्लू यानी H1N1 एक इन्फ्लूएंजा A वायरस है जो मुख्य रूप से सांस लेने के सिस्टम जैसे नाक, गले और फेफड़ों पर असर डालता है. इसके आम लक्षणों में बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना या बहना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और थकान शामिल हैं, लेकिन इन्फ्लूएंजा में आंखें लाल होना, उनसे पानी आना और आंखों में दर्द भी हो सकता है. H1N1 के कुछ मरीजों में आंखें लाल होना, उनसे पानी आना और वायरल कंजंक्टिवाइटिस हो सकता है. दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डॉ. दीपक कुमार ने इस बारे में बताया है.
कंजंक्टिवाइटिस की भी हो सकती है समस्या
डॉ. दीपक कहते हैं कि मेडिकल स्टडीज में H1N1 से पीड़ित कुछ लोगों में कंजंक्टिवाइटिस और आंखों से जुड़ी दूसरी परेशानियां देखी गई हैं. हालांकि, बुखार के बाद आंखें लाल होने का मतलब यह नहीं है कि ऐसा सीधे H1N1 की वजह से हुआ है. आम वायरल कंजंक्टिवाइटिस, एलर्जी, आंखों का सूखापन, जलन पैदा करने वाली चीजें और बैक्टीरियल इन्फेक्शन से भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं. अगर फ्लू के साथ आंखों में ज्यादा लालिमा, सूजन, दर्द, धुंधला दिखाई देना या लगातार पानी आने की समस्या हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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क्या आंखें पूरी तरह भी हो सकती हैं खराब
श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट में इंटरनल मेडिसिन विभाग में डॉ. अरविंद अगव्राल ने बताया कि स्वाइन फ्लू से परमानेंट आई डैमेज के मामले नहीं देखे गए हैं, लेकिन कुछ मरीजों में आंखों की गंभीर समस्याएं देखी गई है, जिनमें रेटिना, ऑप्टिक नर्व या आंख के अंदर सूजन जैसी शिकायत होती है. आंखों में ज्यादा परेशानी के साथ तेज सिरदर्द या तेज बुखार बना रहे तो भी डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
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आंखों को स्वाइन फ्लू के असर से कैसे बचाएं
डॉ. अरविंद ने बताया कि स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए हाथों को बार-बार साफ करें, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें. आंखों में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई ड्रॉप या दवा न डालें. आंखों को बार-बार छूने से बचें और तौलिया, रुमाल व अन्य निजी सामान किसी के साथ साझा न करें. समय पर जांच और सही ट्रीटमेंट से ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं.