बेंगलुरु पुलिस ने SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कम से कम 100 लोगों को हिरासत में लिया है. खास बात यह है कि बेंगलुरु पुलिस ने ये कार्रवाई तब की है जब राज्य के सीएम डीके शिवकुमार भी लगभग उसी समय दिल्ली में SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. इस अजीब स्थिति को देखते हुए शिवकुमार और कर्नाटक के अन्य कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कथित मनमानी की जांच का वादा किया है.
सोमवार को बेंगलुरु में पुलिस ने कम से कम 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. ये लोग वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के खिलाफ़ चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) के ऑफिस तक मार्च करने की कोशिश कर रहे थे. आरोप है कि बेंगलुरु सिटी पुलिस ने छात्रों, वकीलों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की जबकि प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों और फोटोग्राफरों को भी पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा.
एक तरफ़ जहां CM डीके शिवकुमार नई दिल्ली में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ़ मार्च कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ़ उनके अपने राज्य में पुलिस उन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी जो उसी चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के SIR के खिलाफ़ विरोध कर रहे थे।
कर्नाटक पुलिस की बढ़ती आलोचनाओं के बीच सीएम शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि बल के किसी भी अनावश्यक इस्तेमाल के लिए जवाबदेही तय की जाएगी. वहीं कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में कोई बाधा न आए, यह सुनिश्चित किया जाए.
सोमवार को वामपंथी छात्र और युवा संगठनों के साथ-साथ एक्टिविस्ट ग्रुप 'माई वोट, माई राइट' ने पूरे कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए. उन्होंने बेंगलुरु में CEO के ऑफिस और दूसरे ज़िलों में डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस तक मार्च करने की योजना बनाई थी. प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की.
बेंगलुरु में प्रदर्शनकारी एक ज्ञापन सौंपने के इरादे से सीईओ के कार्यालय से कुछ मीटर की दूरी पर केआर सर्कल के पास एकत्र हुए. हालांकि पुलिस ने उन्हें कार्यालय तक मार्च करने से पहले ही हिरासत में ले लिया. हिरासत में लिए गए लोगों में वरिष्ठ पत्रकार और कार्यकर्ता आकार पटेल भी शामिल हैं.
कई प्रदर्शनकारियों, जिनमें से अधिकांश छात्र थे, को कथित तौर पर पुलिस कर्मियों द्वारा बसों में धकेल दिया गया, जिनमें से कई सादे कपड़ों में थे. टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस कर्मियों ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया तो वे घटनास्थल पर लौट आएंगे.
बेंगलुरु सिटी पुलिस के सेंट्रल डिवीजन के पुलिस उपायुक्त अक्षय एम हाके ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के इकट्ठा हुए थे और उन्हें फ्रीडम पार्क में जाने के लिए कहा गया था. लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया. जिसके बाद उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया गया और रिहा कर दिया गया.
CM DK शिवकुमार ने रिपोर्ट मांगी, गृह मंत्री खड़गे ने निर्देश जारी किए
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए CM DKS ने सोमवार को कहा कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों और मीडियाकर्मियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का संज्ञान लिया है और घोषणा की कि उन्होंने इस घटना से जुड़ी परिस्थितियों पर पूरी रिपोर्ट मांगी है.
उन्होंने कहा, "अगर बल का अनावश्यक प्रयोग या ज्यादती हुई है, तो जवाबदेही तय की जाएगी."
शिवकुमार ने एक्स पर पोस्ट किया, "शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे लोकतंत्र के लिए मौलिक है। हम दिल्ली में अपने लिए उस अधिकार की मांग नहीं कर सकते और बेंगलुरु में दूसरों को उससे वंचित नहीं कर सकते। कर्नाटक को उन लोकतांत्रिक मानकों का पालन करना चाहिए जिनकी हम देश के बाकी हिस्सों से अपेक्षा करते हैं। कोई दोहरे मापदंड नहीं होंगे."
मंगलवार को CM ने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार चुनिंदा आधार पर लागू नहीं किया जा सकता है.