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यमन: कभी भारत से कंट्रोल होता था इस देश का प्रशासन

यमन अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के मिलन बिंदु पर स्थित एक देश है. अपनी प्राचीन जड़ों के बावजूद, आधुनिक यमन गणराज्य एक अपेक्षाकृत नया राज्य है. भारत के साथ इसके संबंध काफी पुराने हैं. ब्रिटिश राज में यमन का प्रशासन भारत से ही कंट्रोल होता था.

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यमन का भारत के साथ सदियों पुराना रिश्ता है (Photo - Reuters)
यमन का भारत के साथ सदियों पुराना रिश्ता है (Photo - Reuters)

यमन एक नया देश है. इसका गठन 1990 में हुआ है. सालों तक जंग और लड़ाई के बाद कम्युनिस्ट दक्षिण यमन के उत्तरी यमन के एक होने पर यह नया देश बना.  यमन 2011 से राजनीतिक संकट की स्थिति में है. जब ट्यूनीशिया और मिस्र में अरब स्प्रिंग विद्रोह से प्रेरित होकर 2011 में विरोध प्रदर्शनों की एक नई लहर ने राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया था.

हूतियों ने देश के उत्तर और पश्चिम के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लिया है. जबकि सऊदी नेतृत्व वाली सेनाओं ने दक्षिण में अदन में स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने के लिए हस्तक्षेप किया. 2018 में अदन पर अलगाववादी दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद ने कब्जा कर लिया. इसे संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन प्राप्त है. 

यमन में जारी गृहयुद्ध में कथित तौर पर 150,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और इसने दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया है.

अप्रैल 2022 में राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी द्वारा अपनी शक्तियां परिषद को हस्तांतरित करने के बाद रशाद अल-अलीमी राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष बने. इसे हूतियों के साथ बातचीत करने और स्थायी युद्धविराम तथा युद्ध का राजनीतिक समाधान निकालने का कार्य सौंपा गया है.

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यमन में चल रहे गृहयुद्ध और सुरक्षा कारणों की वजह से, राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अक्सर पड़ोसी देश सऊदी अरब (रियाद) में रहकर अपनी सरकार चलाते हैं.

राजधानी-  सना

क्षेत्रफल - 528,000 वर्ग किमी

आबादी - 42 करोड़ लगभग

भाषा - अरबी

मुद्रा - यमनी रियाल

कभी भारत से चलता था यमन का शासन 
भारत और यमन के रिश्ते कई सदियों पुराने हैं. 19वीं और 20वीं सदी में अदन, मोचा और कमरान द्वीप हज पर जाने वाले यात्रियों के लिए रास्ते में रुकने और जहाज बदलने के अहम ठिकाने हुआ करते थे.

दक्षिणी यमन पर ब्रिटेन का नियंत्रण था. उस समय वहां का प्रशासन बॉम्बे प्रेसीडेंसी के तहत चलता था. यहां भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी भी तैनात रहती थी और भारतीय रुपया वहां की आधिकारिक मुद्रा हुआ करता था. भारत की आजादी से पहले अदन एक अहम बंदरगाह था, जहां कई प्रमुख भारतीय नेता और हस्तियां पहुंच चुके थे. इनमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय और सरोजिनी नायडू जैसे नाम शामिल हैं.

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भारत उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिन्होंने यमन को ब्रिटेन से आजादी दिलाने का समर्थन किया था. भारत ने 1962 में यमन अरब गणराज्य और 1967 में पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ यमन को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में भी जगह बनाई थी. साल 1990 में इन दोनों देशों का विलय हो गया और मिलकर यमन गणराज्य बना.

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यमन में भारतीय नागरिकों को कांसुलर सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने के लिए भारत ने 1 अक्टूबर 2025 से अदन में अपना प्रतिनिधि कार्यालय शुरू किया है. कांसुलर सेवाओं में पासपोर्ट, वीजा और विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों से जुड़े दूसरे जरूरी काम शामिल होते हैं.

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व्यापार की बात करें तो भारत यमन को चावल, गेहूं, चीनी, दवाइयां, सिरेमिक और उससे जुड़े उत्पाद, प्रोसेस्ड फल, फलों का जूस, कपड़ा, पेट्रोलियम उत्पाद, धागे और कपड़े आदि निर्यात करता है.

वहीं, भारत यमन से लोहा और स्टील, पेट्रोलियम उत्पाद, दूरसंचार से जुड़े उपकरण, एल्युमिनियम और उससे बनी चीजें, सीसा और उससे जुड़े उत्पाद, बिजली के उपकरण, तांबा और उससे बनी चीजें, साथ ही कच्ची खाल और चमड़ा आयात करता है.

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