हम अक्सर सड़क, पार्क, बस स्टैंड या किसी कोने में सिगरेट पीने के बाद उसके बचे हुए टुकड़े पड़े देखते हैं. आमतौर पर लोग इन्हें कचरा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही बेकार समझे जाने वाले सिगरेट के टुकड़े कुछ पक्षियों के घोंसलों में भी मिल सकते हैं? सुनने में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने गौरैया जैसे कुछ पक्षियों के घोंसलों में सिगरेट के बचे हुए टुकड़े पाए हैं. इसके पीछे एक दिलचस्प वजह सामने आई है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, कुछ पक्षी अपने घोंसलों में सिगरेट के टुकड़े इसलिए रख सकते हैं, क्योंकि उनमें मौजूद कुछ केमिकल घोंसले में रहने वाले पैरासाइट और कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकते हैं. ये कीड़े पक्षियों के बच्चों को परेशान कर सकते हैं और उनके विकास पर बुरा असर डाल सकते हैं. हालांकि, इस व्यवहार के पीछे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं है. साथ ही, सिगरेट के टुकड़ों में मौजूद जहरीले पदार्थ पक्षियों के लिए नुकसानदायक भी हो सकते हैं.
घोंसले में सिगरेट के टुकड़े रखने से क्या होता है?
पक्षियों के लिए घोंसला सिर्फ अंडे देने की जगह नहीं होता, बल्कि उनके बच्चों के शुरुआती जीवन का ठिकाना भी होता है. अंडों से निकलने के बाद बच्चे कुछ समय तक पूरी तरह अपने माता-पिता पर निर्भर रहते हैं. इस दौरान उन्हें गर्मी, भोजन और बाहरी खतरों से सुरक्षा की जरूरत होती है. लेकिन घोंसले के अंदर कई तरह के छोटे कीड़े और पैरासाइट भी पनप सकते हैं. ये पक्षियों के बच्चों का खून चूस सकते हैं, उनकी स्कीन को नुकसान पहुंचा सकते हैं और उन्हें कमजोर कर सकते हैं. ऐसे में घोंसले को इन कीड़ों से बचाना पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है.
कुछ साइंटिफिक स्टडीज में पाया गया है कि कुछ पक्षी अपने घोंसलों में तंबाकू या सिगरेट के बचे हुए टुकड़े जमा करते हैं. एक संभावना यह है कि वे इन टुकड़ों में मौजूद केमिकल का इस्तेमाल पैरासाइट से बचने के लिए करते हों. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर पक्षी ऐसा करता हो या हर घोंसले में सिगरेट के टुकड़े मिलने की यही वजह हो.
सिगरेट में मौजूद निकोटीन कैसे कर सकता है कीड़ों पर असर?
सिगरेट में निकोटीन नाम का एक रसायन पाया जाता है. तंबाकू के पौधे में यह प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है और कुछ कीड़ों के तंत्रिका तंत्र पर असर डाल सकता है. इसके अलावा, सिगरेट के धुएं और इस्तेमाल किए गए फिल्टर में कई अन्य केमिकल पदार्थ भी मौजूद हो सकते हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते रहे हैं कि क्या घोंसले में मौजूद सिगरेट के टुकड़े वहां रहने वाले पैरासाइट की संख्या को प्रभावित कर सकते हैं.
हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है. किसी केमिकल का कुछ कीड़ों पर असर होना और उसका पक्षियों के लिए सुरक्षित होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. यह भी जरूरी नहीं कि सिगरेट के इस्तेमाल किए गए टुकड़े में मौजूद रसायनों की मात्रा हर बार कीड़ों को दूर रखने के लिए पर्याप्त हो. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सिगरेट के टुकड़े पक्षियों के लिए किसी प्राकृतिक दवा की तरह काम करते हैं.
क्या पक्षी जानबूझकर सिगरेट के टुकड़े चुनते हैं?
यह सवाल भी काफी दिलचस्प है कि आखिर पक्षी सिगरेट के टुकड़ों को ही क्यों चुनते हैं? क्या वे इनके अंदर मौजूद रसायनों के बारे में जानते हैं या फिर वे इन्हें आसपास उपलब्ध दूसरी चीजों की तरह घोंसले में इस्तेमाल कर लेते हैं? वैज्ञानिकों के सामने यह एक अहम सवाल है. पक्षी घोंसला बनाने के लिए सूखी घास, पत्तियां, छोटी टहनियां, पंख और दूसरे उपलब्ध पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं. शहरों में रहने वाले पक्षियों को अपने आसपास प्लास्टिक, धागे, कागज और इंसानों की फेंकी हुई दूसरी चीजें भी मिलती हैं.
इसलिए संभव है कि कुछ पक्षी सिगरेट के टुकड़ों को घोंसले में उपलब्ध सामग्री के रूप में इस्तेमाल करते हों. यह भी एक संभावना है कि कुछ परिस्थितियों में वे इन टुकड़ों के रासायनिक गुणों से प्रभावित होते हों. लेकिन यह साबित करने के लिए कि पक्षी जानबूझकर पैरासाइट से बचने के लिए ही सिगरेट के टुकड़े चुनते हैं, उनके व्यवहार और घोंसलों पर और रिसर्च की जरूरत है.
सिगरेट के टुकड़े पक्षियों के लिए खतरनाक भी हो सकते हैं
सिगरेट के टुकड़ों का घोंसले में मिलना भले ही वैज्ञानिकों के लिए दिलचस्प हो, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि ये पक्षियों के लिए फायदेमंद हैं. सिगरेट के फिल्टर में आमतौर पर सेल्यूलोज एसीटेट नाम का प्लास्टिक जैसा पदार्थ होता है. यह पर्यावरण में आसानी से खत्म नहीं होता. इस्तेमाल के बाद फिल्टर में निकोटीन और दूसरे हानिकारक पदार्थों के अवशेष भी रह सकते हैं.
अगर पक्षियों के बच्चे इन टुकड़ों को चोंच मारते हैं या गलती से निगल लेते हैं, तो उन्हें नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है. इसके अलावा, घोंसले में मौजूद केमिकल पदार्थ अंडों और बच्चों के संपर्क में आ सकते हैं. सिगरेट के फिल्टर में इस्तेमाल होने वाले रेशे भी पर्यावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं. यानी, किसी खास परिस्थिति में सिगरेट के टुकड़ों से कीड़ों पर असर पड़ने की संभावना होने का मतलब यह नहीं है कि उनसे पक्षियों को कुल मिलाकर फायदा ही होगा. उनके संभावित लाभ और नुकसान को अलग-अलग समझना जरूरी है.
इंसानों की छोटी-सी लापरवाही बन सकती है पक्षियों के लिए खतरा
शहरों में सिगरेट के टुकड़े सड़कों, पार्कों, नालियों और सार्वजनिक जगहों पर आसानी से दिखाई दे जाते हैं. लोग अक्सर इन्हें बहुत छोटा कचरा समझते हैं, लेकिन पर्यावरण में इनका असर लंबे समय तक रह सकता है. पक्षी अपने आसपास मौजूद चीजों को घोंसले में ले जा सकते हैं. ऐसे में जमीन पर फेंका गया सिगरेट का टुकड़ा उनके घोंसले तक पहुंच सकता है. वहां पहुंचने के बाद यह उनके लिए मददगार होगा या नुकसानदायक, यह कई बातों पर निर्भर कर सकता है. लेकिन इतना साफ है कि सिगरेट के टुकड़े पर्यावरण में छोड़ना सही नहीं है.
इसलिए सिगरेट पीने के बाद उसके बचे हुए हिस्से को सड़क, पार्क या नाली में फेंकने के बजाय उचित कूड़ेदान में डालना चाहिए. इससे पक्षियों और दूसरे जीवों के ऐसे कचरे के संपर्क में आने की आशंका कम की जा सकती है. कुल मिलाकर, पक्षियों के घोंसलों में सिगरेट के टुकड़े मिलना प्रकृति और इंसानी व्यवहार के बीच एक दिलचस्प संबंध दिखाता है. कुछ स्टडी में यह संभावना सामने आई है कि इन टुकड़ों में मौजूद रसायन घोंसले के पैरासाइट पर असर डाल सकते हैं. लेकिन सिगरेट के टुकड़े हानिकारक पदार्थ भी अपने साथ रखते हैं. इसलिए इन्हें पक्षियों के लिए फायदेमंद मानना सही नहीं होगा.