दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने के हादसे के बाद अब उस इलाके की दूसरी बिल्डिंग्स की चर्चा हो रही है. दरअसल, जो बिल्डिंग गिरी है, उसके आसपास की इमारतों की हालत भी काफी जर्जर है. सोशल मीडिया पर हादसे वाली जगह के पास वाली बिल्डिंग की एक फोटो वायरल है और वायरल होने की वजह ये है कि उस बिल्डिंग में एक भी पिलर नहीं दिख रहा है. ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कम स्पेस में इतनी बड़ी बिल्डिंग बिना किसी पिलर के कैसे बनाई जा सकती है? इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि जो बिल्डिंग गिरी है, उसमें भी पिलर नहीं था. हालांकि, ये अभी स्पष्ट नहीं है कि बिल्डिंग गिरने का कारण पिलर ही है.
ऐसे में जानते हैं कि आखिर घर बनाते वक्त पिलर ना बनाने की एक गलती कितनी भारी पड़ सकती है और किस तरह के घरों में पिलर बनाना ज्यादा जरूरी हो जाता है. तो समझते हैं घर बनाने में पिलर बनाना कितना जरूरी है और कैसे ये घर को मजबूती देता है.
पास वाली बिल्डिंग का क्या है हाल?
जिस इमारत में हादसा हुआ, उससे महज 10 कदम की दूरी पर मकान नंबर 111-112 के हालात काफी खराब हैं. यहां दो इमारतों के लिए एक ही सीढ़ी है और करीब 60 से 70 छात्र यहां रहते हैं. अंदर छत टूटी हुई और उससे पानी टपकता हुआ नजर आता है. कई कमरों में खिड़कियां तक नहीं हैं. रसोई बेहद छोटी और दमघोंटू है. इन दोनों इमारतों में कुल 18 बिजली के मीटर और 6 पानी के मीटर लगे हैं. हालात इतने खराब होने के बावजूद इन इमारतों में रहना जारी है.
पास वाली बिल्डिंग की फोटो वायरल है, जिसमें दिख रहा है कि एक भी पिलर नहीं है. 6 सितंबर को अचानक इमारत गिरने के बाद ही प्रशासन ने उसके बगल वाली इस बिल्डिंग को भी खाली करा दिया था. बिना पिलर, टूटी दीवारों और खंडहर जैसी स्थिति में खड़ी इस इमारत पर अब बुलडोजर चलने जा रहा है. अब लोग सवाल उठा रहे हैं.
क्यों जरूरी है पिलर?
पिलर घर का वह हिस्सा है जो ऊपर के पूरे वजन को संभालकर नीचे जमीन तक पहुंचाता है. किसी बहुमंजिला इमारत में वजन सिर्फ छत का नहीं होता. ऊपर की हर मंजिल की दीवारें, स्लैब, फर्नीचर, लोग, पानी की टंकी और दूसरी चीजों का वजन नीचे की तरफ आता है. पिलर इस भार को नींव तक पहुंचाने का प्रमुख रास्ता होता है. अगर यह भार सही तरीके से नीचे नहीं पहुंचा तो इमारत के अलग-अलग हिस्सों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ सकता है. इससे दरारें, झुकाव, स्लैब में खराबी और गंभीर स्थिति में आंशिक या पूरा ढहना तक हो सकता है.
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कम जमीन के मकान में ज्यादा जरूरी
जब मकान छोटे होते हैं तो इसकी जरूरत ज्यादा होती है. छोटे मकान में जब ज्यादा मंजिल होती हैं तो ऊपर की हर मंजिल का वजन नीचे की संरचना पर आता है. कम स्पेस होने की वजह से ज्यादा वजन एक जगह पर पड़ता है. अगर बीम और पिलर रहते हैं तो पिलर इस भार को नींव तक पहुंचाते हैं. छोटी जगह में जब 3–4 या उससे ज्यादा मंजिलें बना दी जाती हैं, तो सीमित जमीन पर बनी नींव और नीचे के पिलरों को कई मंजिलों का भार संभालना पड़ता है.
ज्यादा मंजिल वाले मकान में पिलर का होना ही नहीं, बल्कि उसकी संख्या, जगह, आकार, स्टील, कंक्रीट, बीम और नींव सबका सही इंजीनियरिंग डिजाइन जरूरी है.