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हर खाने में नुक्स निकालने वाले लोग कैसे होते हैं? जानिए क्या कहती है साइकोलॉजी

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा इंसान है जो हर खाने में कोई न कोई कमी जरूर निकालता है? मनोविज्ञान के अनुसार इसके पीछे परफेक्शनिस्ट सोच, नेगेटिविटी बायस, कंट्रोलिंग बिहेवियर और तनाव जैसी कई वजहें हो सकती हैं.

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मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि बचपन का माहौल इंसान की आदतों पर गहरा असर डालता है. ( Photo: ITG)
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि बचपन का माहौल इंसान की आदतों पर गहरा असर डालता है. ( Photo: ITG)

क्या आपके घर, ऑफिस या दोस्तों के बीच भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो हर खाने में कोई न कोई कमी जरूर निकाल देता है? कभी कहता है कि नमक ज्यादा है, कभी सब्जी फीकी है, कभी रोटी मोटी है तो कभी मिठाई बहुत मीठी है. कई बार ऐसा लगता है कि चाहे कितना भी अच्छा खाना बना लें, उन्हें उसमें कोई न कोई खामी मिल ही जाएगी. पहली नजर में यह सिर्फ नखरे या खराब आदत लग सकती है, लेकिन साइकोलॉजी कहती है कि हर बार ऐसा होना सिर्फ स्वाद का मामला नहीं होता. इसके पीछे व्यक्ति की सोच, पर्सनैलिटी और इमोशनल कंडिशन भी जिम्मेदार हो सकती है,

1. परफेक्शनिस्ट स्वभाव वाले लोग
कुछ लोग हर चीज को बिल्कुल परफेक्ट देखना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि अगर कोई काम 100 प्रतिशत सही नहीं है तो उसमें कमी निकालना जरूरी है. ऐसे लोग सिर्फ खाने में ही नहीं, बल्कि कपड़ों, घर की सफाई, ऑफिस के काम और दूसरों के व्यवहार में भी गलतियां ढूंढ़ते रहते हैं. साइकोलॉजी के अनुसार, परफेक्शनिस्ट लोग अक्सर खुद से भी बहुत ज्यादा उम्मीद रखते हैं. यही वजह है कि वे दूसरों से भी उसी स्तर की उम्मीद करने लगते हैं,

2. हर बात पर कंट्रोल रखना चाहते हैं
कुछ लोगों को हर स्थिति पर अपना कंट्रोल बनाए रखना पसंद होता है. जब वे खाने में कमी निकालते हैं तो कई बार उसका मकसद सिर्फ अपनी पसंद बताना नहीं होता, बल्कि यह दिखाना भी होता है कि अंतिम फैसला उनका ही चलेगा. ऐसे लोग छोटी-छोटी बातों में भी अपनी राय को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं. यह व्यवहार रिश्तों में तनाव भी पैदा कर सकता है.

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3. निगेटिव सोच की आदत
साइकोलॉजी में इसे नेगेटिविटी बायस कहा जाता है. इसका मतलब है कि कुछ लोगों का ध्यान अच्छी बातों की बजाय कमियों पर ज्यादा जाता है. अगर खाने में दस चीजें अच्छी हैं और सिर्फ एक कमी है, तो ऐसे लोग उसी एक कमी पर पूरा ध्यान देंगे. धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन जाती है.

4. अपनी भावनाएं सीधे नहीं बता पाते
कई बार व्यक्ति किसी और वजह से तनाव, गुस्से या निराशा में होता है, लेकिन वह अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं कर पाता. ऐसे में उसका गुस्सा खाने या छोटी-छोटी बातों पर निकलने लगता है. यानी समस्या खाना नहीं होती, बल्कि व्यक्ति का मानसिक तनाव होता है.

5. बचपन का असर
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि बचपन का माहौल इंसान की आदतों पर गहरा असर डालता है. अगर किसी व्यक्ति ने ऐसे परिवार में परवरिश पाई हो जहां हर चीज में गलतियां निकाली जाती थीं, तो बड़े होकर वह भी वैसा ही व्यवहार अपना सकता है. उसे यह सामान्य लगने लगता है कि हर चीज की आलोचना करना ही सही तरीका है.

6. खुद को ज्यादा जानकार दिखाने की कोशिश
कुछ लोग दूसरों के सामने खुद को एक्सपर्ट साबित करना चाहते हैं. वे खाने का स्वाद, मसाले, बनाने का तरीका या क्वालिटी पर लगातार टिप्पणी करते रहते हैं ताकि लोग उन्हें ज्यादा समझदार मानें. ऐसे मामलों में आलोचना कई बार जानकारी दिखाने का माध्यम बन जाती है.

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7. ध्यान आकर्षित करने की कोशिश
कुछ लोगों को पसंद होता है कि हर जगह उनकी बात सुनी जाए. अगर सभी लोग खाने की तारीफ कर रहे हों, तो वे जानबूझकर कोई कमी बता देते हैं ताकि बातचीत का केंद्र वही बन जाएं. यह व्यवहार अनजाने में भी हो सकता है और कई बार व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता.

क्या हर आलोचना गलत होती है?
अगर कोई व्यक्ति सम्मानपूर्वक सुझाव देता है, जैसे थोड़ा नमक कम होता तो और अच्छा लगता, तो यह सामान्य प्रतिक्रिया है.लेकिन अगर हर बार, हर खाने में और हर व्यक्ति के बनाए भोजन में सिर्फ कमियां ही दिखाई दें, तो यह सिर्फ स्वाद का मामला नहीं रह जाता. यह व्यक्ति की सोच या व्यवहार का हिस्सा भी हो सकता है.

अगर आपके आसपास भी कोई हर खाने में नुक्स निकालता है, तो उसकी हर बात को दिल पर लेने की जरूरत नहीं है. शांत रहकर उसकी बात सुनें और अगर आलोचना क्रिएटिव हो तो उसे अपनाएं. लेकिन अगर सामने वाला सिर्फ आदतन कमियां निकालता है, तो बार-बार खुद को दोषी मानने की जरूरत नहीं है. याद रखें, हर इंसान का स्वाद अलग होता है. हर किसी को खुश करना संभव नहीं है. इसलिए अपनी मेहनत की कद्र करें और बेवजह की आलोचना को अपनी आत्मविश्वास पर हावी न होने दें.

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