नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका इंसानी जिंदगी पर कितनी भारी पड़ी है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां सैकड़ों अज्ञात शवों को बिना पहचान किए सामूहिक तौर पर दफनाया जा रहा है. अब सवाल उठता है कि क्या यह शवों का अंतिम संस्कार है? तकनीकी तौर पर देखें तो नेपाल प्रशासन शवों को दफनाकर इसका अंतिम संस्कार नहीं कर रही, बल्कि इसे सहेजने की कोशिश कर रही है. ताकि, भविष्य में इन लाशों से संबंधित दावेदारों को उनके परिजन के अवशेष DNA जांच के बाद सौंपे जा सके.
नेपाल -तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में पानी, कीचड़, चट्टानें और भारी मात्रा में मलबा आपदा बनकर इंसानी बस्ती और लोगों को बहा ले गई. इसमें हजारों लोग लापता हो गए. अब जब सबकुछ शांत हो चुका है तो कीचड़ और मलबे में दबे लोगों के शव बाहर निकाले जा रहे हैं.
पानी और कीचड़ में दबे शव इतनी बुरी स्थिति में हैं कि इन्हें पहचानना मुश्किल हो गया है. पानी में फूल गए बॉडी तेजी से सड़ रहे हैं. एक- दो या दस की भी बात हो तो शवों को कुछ दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता था. लेकिन, कुछ जगहों पर एक साथ सैकड़ों शव बरामद किए गए हैं और सभी तेजी से सड़ रहे हैं. ऐसे में स्थानीय प्रशासन के सामने इनकी पहचान करने और इन्हें लंबे समय तक पहचान के लिए सुरक्षित रखने की एक बड़ी समस्या सामने आ खड़ी हुई है.
नेपाल के शवगृहों और अस्थायी आश्रय केंद्रों में जगहें खत्म हो गई हैं. सभी सुविधा सेंटर शवों से भर गए हैं. इसके साथ ही तेजी से सड़ते इन शवों को संभालना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में इन्हें कुछ और दिनों तक सुरक्षित रख पाना लगभग नामुमकिन हो गया है. इसलिए नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के अज्ञात शवों को दफनाना शुरू कर दिया गया है.

नेपाल के अलग- अलग इलाकों में शनिवार शाम तक बरामद किए गए शवों की संख्या 768 हो चुकी थी. इनमें से केवल 20 की ही पहचान परिजनों कर पाए. बाकी शव तेजी से सड़ने लगे थे. क्योंकि अधिकारी सबूतों को सुरक्षित रखने और सड़ते हुए शवों के लिए जगह खोजने में जुटे हुए थे. ऐसे में नेपाल प्रशासन ने शवों को सामूहिक रूप से दफनाने का फैसला किया. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब रविवार को विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 734 तक पहुंच गई. ये सारे शव शव आठ जिलों से बरामद किए गए थे.
चितवन में सबसे अधिक मौतें दर्ज की गई हैं. यहां से 259 शव बरामद किए गए हैं. इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 184, नवलपरासी पश्चिम में 82, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धाडिंग में 50, तनहुन में 36 और रसुवा में 13 शव बरामद हुए हैं. इसके अलावा लगभग 2,500 अन्य लोग अभी भी लापता हैं.
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, आपातकालीन प्रक्रिया के तहत, शवों को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने की क्षमता खत्म हो जाने के कारण अधिकारी अज्ञात शवों को दफना सकते हैं. यही वजह है कि नेपाल के स्थानीय अधिकारी सामूहिक तौर पर इन अज्ञात शवों को दफना रहे हैं. लेकिन इन्हें दफनाने से पहले डीएनए सैंपल, इनकी तस्वीरें और अन्य पहचान संबंधी सबूत इकट्ठा कर रहे हैं. ताकि परिवार बाद में अपने प्रियजनों की पहचान कर सकें.
शवों की पहचान के प्रयास में सात फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट और सात दंत शल्य चिकित्सकों सहित 40 सदस्यीय चिकित्सा दल शामिल है. अस्थायी हिरासत केंद्रों में रखे गए शवों से डीएनए के नमूने पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं.
शवों के प्रबंधन की समस्या चितवन तक ही सीमित नहीं है. बाढ़ से प्रभावित एक अन्य क्षेत्र नवलपरासी पूर्व में अधिकारियों को शवों को चितवन जिले के बाहर पोखरा और पालपा सहित अन्य सुविधाओं में भी शवों ट्रांसफर करना पड़ा.रूपन्देही और कपिलवस्तु के अस्पतालों में ले जाया गया है.
नेपाल में शवों को दफनाए जाने के ये है मुख्य वजह
चितवन में अधिकारियों ने 200 से अधिक शव बरामद किए थे, लेकिन उनमें से केवल चार की ही पहचान हो पाई थी. बाकी शवों को अस्पतालों के मुर्दाघर और अस्थायी सुविधा केंद्रों में रखा गया था. सभी बरामद बॉडी तेजी से सड़ रही थी. सभी शवगृह और फैसिलिटी शवों से भर गई थी और इन्हें ज्यादा दिनों तक ऐसे हालात में रखना मुश्किल होता जा रहा था. इससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो चला था.
इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि शवों के और अधिक सड़ने और उनसे आने वाली दुर्गंध से बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है. शवगृहों की क्षमता भी कम पड़ गई थी. चितवन के अस्पतालों में केवल कुछ ही शवों को रखा जा सका. इस वजह से शवों को दफनाने का फैसला लिया गया.
चितवन जिला सुरक्षा समिति ने नेपाल के अज्ञात और लावारिस शव प्रबंधन निर्देश, 2026 के तहत भरतपुर महानगरपालिका के देवघाट में एक खुली जगह पर अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने का फैसला लिया.
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि जिन शवों की पहचान नहीं की जा सकी है. उनका प्रबंधन सरकार की ओर से किया जाएगा. ताकि,भविष्य में परिवार की तरफ से पहचान के बाद उनके अवशेष परिजन को सौंपे जा सके.
शवों की कैसे होगी पहचान ?
दफनाने से पहले, फोरेंसिक टीमें शवों के डीएनए सैंपल ले रहे हैं. प्रत्येक बॉडी को एक स्थायी पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जा रहा है. उनकी तस्वीरें, शारीरिक विवरण, कपड़े, आभूषण, पहचान पत्र और अन्य सामान भी उसी ट्रैकिंग नंबर के तहत सुरक्षित रखे जाएंगे.
अधिकारियों द्वारा जांच, शव परीक्षण, डीएनए प्रोफाइल, दफन की तारीखें और प्रत्येक कब्र के सटीक स्थान का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है. बाद में गुमशुदा व्यक्तियों के इन रिकॉर्डों और रिपोर्ट्स का रिश्तेदारों से प्राप्त डीएनए सैंपल की रिपोर्ट से मिलान किया जाएगा.
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काठमांडू में अधिकारियों ने संभावित दफन स्थलों की पहचान करना भी शुरू कर दिया है. क्योंकि सरकार इस संभावना के लिए तैयारी कर रही है कि और भी अज्ञात अवशेष बरामद किए जा सकते हैं.
इसलिए नेपाल दो अति आवश्यक जरूरतों के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है. सड़ते हुए शवों के कारण पैदा होने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को रोकना और यह सुनिश्चित करना कि परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान करने का मौका न खोएं.