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दुनिया की सबसे ऊंची बनने वाली इमारत की नींव कितनी गहरी है? जानें Jeddah Tower का राज

इस वक्त दुनिया में जिस इमारत की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है जेद्दाह टावर. दावा है कि पूरी तरह तैयार होने के बाद यह बुर्ज खलीफा से भी ऊंची होगी. लेकिन सवाल यह है कि इतनी विशाल इमारत को खड़ा रखने के पीछे आखिर कौन सी साइंस और इंजीनियरिंग काम कर रही है?

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ये इमारत बनने के बाद होगी दुनिया की सबसे ऊंची  (Photo: Reuters)
ये इमारत बनने के बाद होगी दुनिया की सबसे ऊंची (Photo: Reuters)

सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बनाई जा रही है. पूरी होने के बाद जेद्दाह टावर की ऊंचाई 1000 मीटर से ज्यादा होगी. यह मौजूदा वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर दुबई के बुर्ज खलीफा से करीब 173 मीटर ज्यादा ऊंचा होगा. लेकिन सवाल यह है कि इतनी ऊंची और भारी इमारत को जमीन पर टिकाए रखने का इंतजाम कैसे किया गया है? इसका जवाब जमीन के नीचे छिपा है.

प्रोजेक्ट के स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स थॉर्नटन टोमासेट्टी के मुताबिक, जेद्दाह टावर के पूरे बेस के नीचे करीब 5 मीटर मोटी कंक्रीट की एक विशाल परत बनाई गई है. इसे आप एक बहुत मजबूत प्लेट की तरह समझ सकते हैं, जो इमारत के पूरे वजन को जमीन पर बराबर तरीके से फैलाती है. इससे इमारत के एक तरफ झुकने या ज्यादा धंसने का खतरा कम होता है.

270 पाइल्स, 100 मीटर से भी ज्यादा गहरे

डीजीन एक जानी-मानी आर्किटेक्चर और डिजाइन मैगजीन है. इस पर दुनिया भर की बड़ी इमारतों, आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट्स, इंटीरियर और डिजाइन से जुड़ी खबरें और रिपोर्ट पब्लिश होती हैं. इस कंक्रीट परत के नीचे 270 कंक्रीट पाइल्स लगाए गए हैं. पाइल्स का मतलब यहां जमीन के अंदर डाले गए लंबे और मजबूत कंक्रीट के खंभे हैं. हर पाइल का व्यास करीब 1.8 मीटर है. ये पाइल्स जमीन के अंदर 105 से 110 मीटर तक गहराई में जाती हैं.

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इनका काम इमारत का भार जमीन की ज्यादा मजबूत परतों तक पहुंचाना है, ताकि इतना भारी स्ट्रक्चर सुरक्षित तरीके से टिका रहे. इतनी गहराई का अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं कि 100 मीटर से ज्यादा की गहराई करीब 30 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर होती है.

लाल सागर के किनारे की जमीन थी चुनौती

जेद्दाह शहर लाल सागर के किनारे बसा है. रिसर्चगेट पर पब्लिश एक टेक्निकल पेपर के मुताबिक, यहां जमीन के नीचे वाटर टेबल काफी ऊंची है. मिट्टी के नीचे कोरल लाइमस्टोन और सैंडस्टोन जैसी परतें भी मिलती हैं.

ऐसी जमीन पर 10 लाख टन से ज्यादा वजन वाली इमारत खड़ी करना इंजीनियर्स के लिए बड़ी चुनौती थी. इसलिए फाउंडेशन तैयार करने से पहले 120 मीटर से ज्यादा गहरे बोरहोल खोदकर जमीन की जांच की गई. इसके बाद फाउंडेशन का डिजाइन तैयार किया गया.

यह भी पढ़ें: बुर्ज खलीफा का रिकॉर्ड टूटना तय! 109 मंजिल तक पहुंचा जेद्दा टावर

इस टेक्निकल पेपर के मुताबिक, जेद्दाह टावर की नींव को इस तरह डिजाइन किया गया है कि पूरी इमारत बनने के बाद भी इसके धंसने की सीमा करीब 100 मिलीमीटर यानी 10 सेंटीमीटर से कम रहेगी. इतनी ऊंची इमारत के लिए यह बेहद सटीक इंजीनियरिंग है.

अभी कहां तक पहुंचा है टावर?

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जेद्दाह टावर का निर्माण 2013 में शुरू हुआ था, लेकिन 2018 में काम रुक गया था. इसके बाद 2024 के अंत में एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट के साथ निर्माण फिर शुरू हुआ.

Architecture Lab और Riyadh2030.ai की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 की शुरुआत तक टावर करीब 430 मीटर ऊंचाई और 107 मंजिल तक पहुंच चुका था. निर्माण टीम करीब हर चार से पांच दिन में एक नई मंजिल तैयार कर रही थी.

खास बात यह है कि जमीन के नीचे मौजूद फाउंडेशन सिर्फ टावर के मौजूदा ढांचे का वजन नहीं संभाल रहा है. इसे शुरू से ही पूरी 1000 मीटर से ज्यादा ऊंची इमारत के अनुमानित अंतिम वजन को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

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