क्या पॉटी से कंक्रीट को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता है? अगर ऐसा होता है तो इससे सीमेंट का इस्तेमाल कम करने और ह्युमन वेस्ट को मैनेज करने का एक संभावित तरीका भी मिल सकता है. लेकिन क्या यह असल दुनिया की इमारतों, सड़कों, पुलों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तैयार है? अभी नहीं इसके लिए और टेस्टिंग की जरूरत है.
ह्युमन वेस्ट से बने बायोचार, कंक्रीट की मजबूती, सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन, सीमेंट से होने वाले पॉल्यूशन और इको-फ्रेंडली बिल्डिंग मटीरियल के भविष्य के पीछे के विज्ञान को समझने के लिए जानते हैं यह पूरी तकनीक और स्टडी क्या है?
लल्लन टॉप की रिपोर्ट के मुताबिक, जयपुर के मणिपाल यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने एक स्टडी में ह्युमन वेस्टेज से एक'बायोचार' बनाया है. रिसर्चर्स ने जब कंक्रीट में सीमेंट की जगह इसे आंशिक रूप से इस्तेमाल करके टेस्ट किया तो चौंकाने वाला रिजल्ट आया. स्टडी में पाया गया कि 5% बायोचार मिलाने से कंक्रीट की कम्प्रेशिव और फ्लेक्सुरल मजबूती में अच्छा सुधार हुआ.
यह स्टडी साइंटिफिक रिपोर्ट में भी छपी है. भारत में हर दिन सवा लाख टन ह्युमन वेस्ट से बने फीकल स्लज जेनरेट होता है. इतनी मात्रा में यह पूरी तरह से ट्रीट नहीं हो सकता और पानी और हवा को प्रदूषित करता है. रिसर्चर ने वारंगल के ह्युमन वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट से फीकल स्लज बायोचार लिया.
यह बायोचार, इंसानी मल को सुखाकर उसे 400 से 500 डिग्री तापमान पर कम ऑक्सीजन में जलाकर बनाया जाता है. अब इस बायोचार को सीमेंट की जगह कंक्रीट में 5 या 10 परसेंट तक मिला दिया गया. जांच में पाया गया कि सीमेंट से बने कंक्रीट की तुलना में ह्युमन वेस्ट बायोचार मिला हुआ कंक्रीट ज्यादा मजबूत थी. इसमें 20 प्रतिशत ज्यादा कम्प्रेशिव स्ट्रेंथ और फ्लेक्सुरल मजबूती 36 प्रतिशत ज्यादा थी. इसका मतलब यह कंक्रीट ज्यादा लोड भी उठा सकती थी और मुड़ने पर जल्दी टूटने वाली भी नहीं थी.
जब 5 परसेंट से ज्यादा 10 प्रतिशत तक बायोचार सीमेंट मिला दिया गया तो यह और भी ज्यादा मजबूत हो गया. बायोचार के पार्टिकल में ऐसी काफी जगह होती है जहां पानी जमा हो सकती है. पानी ऐसे केमिकल रिएक्शन को सपोर्ट करता है कि कंक्रीट और ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो जाती है. इसमें मौजूद सिलिका कैल्शियम सिलिकेट बनाकर और ज्यादा मजबूती देती है. इसके पार्टिकल काफी महीन होते हैं, जो कंक्रीट में अच्छे से मिल जाते हैं.
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अब इसके इन चौंकाने वाले रिजल्ट के बारे में जानकर आप सोच रहे होंगे कि इसका इस्तेमाल अब शुरू हो जाएगा. लेकिन, अभी यह सिर्फ लैब कंडीशन में टेस्ट किया गया है. इस पर अभी काफी सारे रिसर्च किए जाएंगे और यह व्यवहारिक धरातल पर कैसे उतारा जाए, इसको लेकर भी रिसर्च होने बाकी हैं.
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क्योंकि, इमारतों पर कई तरह के दबाव होते हैं. इसलिए कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने से पहले भी इसे कई तरह के टेस्ट से गुजरना पड़ेगा. अगर इसे सच में व्यावहारिक बिल्डिंग मटेरियल बना दिया जाता है तो घरों की मजबूती के लिए सोचा ही नहीं पड़ेगा.