आपने सड़क पर देखा होगा कि कई कार या बाइक मालिक अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट में एक डिजिट को छुपा लेते हैं. हो सकता है कि आपने भी शायद ऐसा किया होगा. लेकिन, क्या आप जानते हैं ट्रैफिक पुलिस के कैमरे से बचने के लिए नंबर प्लेट का एक डिजिट छुपाना किस तरह मुश्किल में डाल सकता है. लोगों को लगता है कि ऐसा करने से पुलिस का कैमरा नंबर को पकड़ नहीं पाएगा और चालान नहीं कटेगा, मगर ये गलत साबित हो सकता है. ऐसे ही एक केस पर दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी है और बताया है कि किन-किन धाराओं में चालान किया गया है.
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक यूजर ने आरोप लगाया था कि कुछ ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उनसे रिश्वत की मांग की और रिश्वत देने से मना करने पर उन्होंने 5000 का चालान काट दिया. चालान काटने के बाद वो एक प्राइवेट नंबर में बैठ गए, जिसकी नंबर प्लेट के एक डिजिट को छुपाया हुआ था. ये पोस्ट करते हुए यूजर ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी और अब दिल्ली पुलिस ने इसका जवाब दिया है.
बता दें कि रोहित नंदन नाम के एक यूजर ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा था- 'हॉस्पिटल जा रहा एक व्यक्ति का बिना मतलब के पांच हजार का चालान कर देती है ये दिल्ली ट्रैफिक पुलिस. जब बंदा उतरकर पूछता है कि आपने चालान क्यों किया तब ये कुछ नहीं बोलते, डायरेक्ट अपनी प्राइवेट गाड़ी में जाके बैठ जाते हैं. जब इनकी गाड़ी चेक किया जाता है इनका नंबर प्लेट दोनों तरफ से छुपाया गया था, गाड़ी के शीशे पूरे काले थे, जैसे कि ये चोर हों.'
इस पोस्ट को मधु मुकुल त्रिपाठी नाम के एक यूजर ने एक्स पर शेयर किया और दिल्ली पुलिस को टैग किया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जवाब दिया है कि अवतार दीप सिंह की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई. नांगलोई सर्कल के ट्रैफिक स्टाफ की ओर से एक कार के रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट को कथित तौर पर छिपाने/धुंधला करने के संबंध में शिकायत मिली.
पुलिस ने बताया कि शिकायत की जांच की गई है और संबंधित ट्रैफिक फील्ड स्टाफ के माध्यम से मामले का सत्यापन किया गया है. सत्यापन के दौरान, रजिस्ट्रेशन नंबर HR12AW0936 वाली गाड़ी की पहचान की गई और पाया गया कि वह रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट के उचित प्रदर्शन से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन कर रही थी. इसके बाद कार पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 50, 51 CMVR/39/192 के तहत मुकदमा चलाया गया.
हालांकि ट्रैफिक स्टाफ पर लगाए गए रिश्वत के आरोपों पर पुलिस ने कहा, 'रिश्वत की मांग या स्वीकार करने के संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच की गई. जांच करने पर उक्त आरोपों के समर्थन में कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला. अतः, रिश्वत की मांग/स्वीकृति संबंधी आरोप झूठे, निराधार और अप्रमाणित प्रतीत होते हैं. नांगलोई सर्कल यातायात के तैनात फील्ड स्टाफ को आगे निर्देश दे दिया गया है कि वे सतर्क रहें, कानून के प्रावधानों के अनुसार ही अपने कर्तव्यों का पालन करें और किसी भी अवैध या अनाधिकृत गतिविधि में शामिल न हों.'